विदेशों से पैसे भेजे जाने में भारत टॉप पर, मिले 137 अरब डॉलर; IOM की रिपोर्ट में खुलासा
भारत ने 2024 में 137 अरब डॉलर से अधिक रेमिटेंस प्राप्त कर दुनिया में शीर्ष स्थान बनाए रखा, जो 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने वाला एकमात्र देश है। आईओ ...और पढ़ें

दुनियाभर से भारत में आया सबसे ज्यादा पैसा। (फोटो- एएनआई)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने वर्ष 2024 में 137 अरब डॉलर से अधिक राशि विदेश से (रेमिटेंस) हासिल कर दुनिया में शीर्ष स्थान बरकरार रखा और वह 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने वाला एकमात्र देश रहा। संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आइओएम) की तरफ से जारी वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत विदेशों से लगातार सबसे अधिक रेमिटेंस पाने वाला देश बना हुआ है। भारत के बाद मेक्सिको का स्थान है। वर्ष 2024 में भारत, मेक्सिको, फिलीपींस और फ्रांस वैश्विक स्तर पर रेमिटेंस पाने के मामले में शीर्ष चार देशों में शामिल रहे।
2024 कितना मिला रेमिटेंस?
रिपोर्ट कहती है कि भारत को 2024 में 137.67 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला, जो अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है। 2010 में भारत के लिए यह आंकड़ा 53.48 अरब डालर था, जो 2015 में 68.91 अरब डालर, 2020 में 83.15 अरब डालर और 2024 में बढ़कर 137 अरब डालर से अधिक हो गया।
क्षेत्रीय स्तर पर दक्षिण एशिया में 2024 के दौरान रेमिटेंस में 11.8 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि का अनुमान है। इसमें भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश को मिले मजबूत प्रवाह की अहम भूमिका रही। रिपोर्ट के अनुसार, उच्च आय वाले देश इस रेमिटेंस के प्रमुख स्त्रोत बने हुए हैं।
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अमेरिका से भेजी गई सबसे ज्यादा राशि
अमेरिका से 2024 में सर्वाधिक 100 अरब डॉलर से अधिक राशि दूसरे देशों को भेजी गई। उसके बाद सऊदी अरब से 46 अरब डॉलर से अधिक, स्विट्जरलैंड से 40 अरब डॉलर और जर्मनी से लगभग 24 अरब डॉलर की राशि भेजी गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पढ़ाई करने वाले छात्रों में एशियाई देशों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
इस मामले में भारत दूसरे स्थान पर
वर्ष 2022 में चीन के 10 लाख से अधिक छात्र विदेशों में पढ़ रहे थे, जबकि भारत विदेश में पढ़ने वाले 6.2 लाख छात्रों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। भारतीय प्रवासी समुदाय को देश के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया गया है। इसके साथ ही, रिपोर्ट ने 'ब्रेन ड्रेन' की चुनौती को 'ब्रेन गेन' में बदलने के लिए नीतिगत उपायों की जरूरत पर भी बल दिया गया।