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    एपस्टीन केस में घिनौनी करतूतों का नया खुलासा, अमेरिकी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने की थी छात्रा की डिमांड

    Updated: Fri, 13 Feb 2026 06:46 PM (IST)

    जैफ्री एपस्टीन मामले में नए चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, येल यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने 2000 के दशक में एक छात्रा की सि ...और पढ़ें

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका में चर्चित अपराधी जैफ्री एपस्टीन से जुड़े मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 2000 के दशक की शुरुआत में येल यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने एक अच्छी दिखने वाली छात्रा की सिफारिश एपस्टीन को की थी।

    बताया जा रहा है कि प्रोफेसर ने बाद में कहा कि उन्हें अपने इस कदम पर कोई पछतावा नहीं है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर एपस्टीन के संपर्कों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

    येल यूनिवर्सिटी अमेरिका के प्रतिष्ठित आईवी लीग समूह का हिस्सा है। इसी समूह में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, प्रिंसटॉन यूनिवर्सिटी, कॉलम्बिया यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवैनिया, ब्राउन यूनिवर्सिटी, डर्टमाउथ कॉलेज और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी जैसी यूनिवर्सिटी शामिल हैं।

    बार्ड कॉलेज और निजी द्वीप का जिक्र

    रिपोर्ट में 2012 के एक ईमेल का भी जिक्र है, जिसमें लियोन बोटस्टीन का नाम सामने आया है। वे बार्ड कॉलेज के अध्यक्ष हैं। बताया गया है कि एपस्टीन के निजी द्वीप के दौरे के बाद उन्होंने कथित तौर पर अच्छा समय बिताने का जिक्र किया था। हालांकि इस मामले में विस्तृत जांच की मांग लगातार उठ रही है।

    हाउस कमेटी में ट्रंप के नाम पर बहस

    इस बीच अमेरिका में एपस्टीन मामले को लेकर हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी में चार घंटे तक सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का नाम भी चर्चा में आया। डेमोक्रेटिक सांसद जैस्मिन क्रॉकेट ने अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी से पूछा कि फाइलों में ट्रंप के नाम के कई उल्लेख होने के बावजूद स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई जा रही है।

    इस पर बॉन्डी ने जवाब दिया कि किसी दस्तावेज में नाम होना अपने आप में अपराध नहीं होता। सुनवाई के दौरान डेमोक्रेट नेता जेमी रास्किन ने न्याय विभाग पर मामले को दबाने का आरोप लगाया। हालांकि अटॉर्नी जनरल ने किसी भी तरह की गलती या माफी से इनकार किया है।

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    तुर्किये से युवतियों को भेजे जाने का दावा

    इसी मामले से जुड़ा एक और दावा सामने आया है कि तुर्किये से हजारों युवतियों को संदिग्ध नेटवर्क के जरिए दूसरे देशों में भेजा गया। इस दावे से नया विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन युवतियों को संदिग्ध तरीके से विदेश भेजे जाने की बात कही गई है। हालांकि अभी इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

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