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    THAAD से पैट्रियट तक... खत्म हो गया अमेरिका का डिफेंस सिस्टम; ईरान युद्ध में फिनिश मिसाइल इंटरसेप्टर?

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 05:50 PM (IST)

    अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से अमेरिकी रक्षा प्रणाली पर गहरा असर पड़ा है। ...और पढ़ें

    ईरान से युद्ध लड़ने में अमेरिका का डिफेंस सिस्टम हो गया खत्म? (फोटो-रॉयटर्स)

    ईरान से युद्ध लड़ने में अमेरिका का डिफेंस सिस्टम हो गया खत्म? (फोटो-रॉयटर्स)

    HighLights

    1. ईरान युद्ध ने अमेरिकी मिसाइल इंटरसेप्टर स्टॉक को गंभीर रूप से घटाया।

    2. THAAD के 80% और Patriot के 50% इंटरसेप्टर उपयोग हुए।

    3. अमेरिकी बेस की सुरक्षा पर मंडराया खतरा, व्हाइट हाउस ने नकारा।

    डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इस हमले के बाद से ही मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ गया और ये युद्ध अभी भी जारी है।

    अमेरिका ने इस युद्ध के इतना लंबा चलने की कल्पना भी नहीं की होगी, क्योंकि इस युद्ध में नुकसान सिर्फ ईरान का नहीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल के साथ ही मिडिल ईस्ट देशों का भी हुआ है।

    खत्म हो गया अमेरिका का डिफेंस सिस्टम?

    खबरों के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका के पास अहम मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इंटरसेप्टर का स्टॉक खतरनाक हद तक कम हो गया है।

    CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने THAAD एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए करीब 80 प्रतिशत इंटरसेप्टर और Patriot इंटरसेप्टर के करीब 50 प्रतिशत का इस्तेमाल कर लिया है।

    इससे पहले एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिकी सेना ने अप्रैल में युद्ध के शुरुआती दौर में अपने लगभग 30 प्रतिशत Tomahawk मिसाइलों का इस्तेमाल कर लिया था।

    अमेरिका के पास कैसे हुई कमी?

    अमेरिकी ब्रॉडकास्टर ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिकी डिफेंस के पास गोला-बारूद की कमी उन वजहों में से एक थी, जिनकी वजह से सलाहकारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ एक बड़े हमले की योजना को टालने के लिए कहा था।

    सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुमान के मुताबिक, ईरान में युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी सेना के पास करीब 2,200 Patriot और 452 THAAD मिसाइलें थीं।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने युद्ध के दौरान अपनी बेहद सटीक लंबी दूरी की, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का भी लगभग पूरा इस्तेमाल कर लिया है।

    मिडिल ईस्ट देशों की सुरक्षा को खतरा

    अधिकारियों का मानना है कि जिन मिडिल ईस्ट देशों में अमेरिकी बेस हैं, वे ज्यादातर अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम पर ही निर्भर हैं। ऐसे में स्टॉक की कमी होने के चलते ईरान की ओर से आने वाली मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकना मुश्किल हो सकता है।

    सूत्रों के मुताबिक, गोला-बारूद कम होने की हालिया चेतावनियों को देखते हुए ट्रंप के कुछ सबसे आक्रामक सलाहकारों ने वीकेंड पर होने वाले ऑपरेशन को रद करने का फैसला किया।

    वहीं व्हाइट हाउस ने गोला-बारूद की कमी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने सीएनएन से बातचीत में कहा, 'अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति ट्रंप के सभी रणनीतिक लक्ष्यों और उससे भी आगे की जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरत से ज्यादा गोला-बारूद और स्टॉक मौजूद है।'

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