Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ग्रीनलैंड पर ट्रंप की तिरछी नजर, NATO और यूरोप की होगी अग्निपरीक्षा; क्या युद्ध के मुहाने पर खड़ा है वेस्ट?

    Updated: Mon, 19 Jan 2026 10:55 PM (GMT+05:30)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए उस पर स्वामित्व चाहते हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है ...और पढ़ें

    ट्रंप का दावा है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व जरूरी है

    ट्रंप का दावा है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व जरूरी है

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पत्नी समेत अगवा कराए जाने के बाद अब डेनमार्क के स्वायत्त द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर अपनी मुहिम तेज कर दी है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व जरूरी है।

    ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो कनाडा और यूरोप के बीच उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित है। उत्तरी ध्रुव से सटे होने के कारण इसका 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बर्फ की मोटी परत से ढका हुआ है। जलवायु परिवर्तन के कारण यह बर्फ तेजी से पिघल रही है और इसके साथ ही उत्तरी ध्रुव सागर की बर्फ भी घटती जा रही है।

    इसका एक बड़ा असर यह है कि समुद्री यातायात के लिए नए जलमार्ग खुल रहे हैं, जो रूस, चीन और जापान से उत्तरी अमेरिका तथा यूरोप की दूरी काफी कम कर देते हैं।

    greenland controversy

    ग्रीनलैंड का भू-राजनीतिक और सामरिक महत्व

    इन नए जलमार्गों पर पकड़ बनाने के लिए रूस और चीन अपने विशेष युद्धपोतों और पनडुब्बियों का विकास कर रहे हैं। इसी कारण ग्रीनलैंड का भू-राजनीतिक और सामरिक महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। दूसरे विश्व युद्ध में भी इस क्षेत्र ने हिटलर की नौसेना को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी।

    युद्ध के बाद अमेरिका ने इसे खरीदने की कोशिश की थी, जबकि 1951 में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा में अमेरिका को विशेष भूमिका देते हुए सैन्य अड्डे बनाने की अनुमति दे दी थी।

    ग्रीनलैंड में तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों के भंडार भी बताए जाते हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, रक्षा तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा की बैटरियों के लिए बेहद जरूरी हैं। ट्रंप का कहना है कि रूस और चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका को ग्रीनलैंड अपने नियंत्रण में लेना चाहिए।

    खबरें और भी

    europe greenland

    डेनमार्क और ग्रीनलैंड का रुख स्पष्ट

    हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने साफ कर दिया है कि उनका देश “बिकाऊ नहीं है।” ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनना पड़ा तो वे डेनमार्क के साथ रहना पसंद करेंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश को दूसरे देश की संप्रभुता छीनने की अनुमति नहीं देता, लेकिन ट्रंप ने हालिया इंटरव्यू में कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि अमेरिका ऐसा कदम उठाता है तो विश्व व्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

    ग्रीनलैंड मुद्दे पर नाटो और यूरोपीय संघ की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। कुछ देशों ने सीमित सैन्य टुकड़ियां भेजी हैं, लेकिन ट्रंप लगातार टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर दबाव बना रहे हैं। यदि यह संकट बढ़ता है, तो नाटो के सामने अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा खड़ी हो सकती है।

    'टकराव की ओर अमेरिका-यूरोप, ग्रीनलैंड को लेकर जिद पर अड़े ट्रंप' इस विषय पर शिवकांत शर्मा का लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।