Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ईरान की नई हवाई रक्षा प्रणाली अमेरिकी विमानों के लिए बन रही सिरदर्द, ब्लैक हॉक-चिनूक को नुकसान पहुंचाने का दावा

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 02:00 AM (IST)

    ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी हवाई वर्चस्व को चुनौती देते हुए पिछले 48 घंटों में दो अमेरिकी सैन्य विमानों और तीन हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाने का दा ...और पढ़ें

    ईरान की नई हवाई रक्षा प्रणाली। (रॉयटर्स)

    ईरान की नई हवाई रक्षा प्रणाली। (रॉयटर्स)

    HighLights

    1. ईरान ने अमेरिकी विमानों, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाया।

    2. माजिद इन्फ्रारेड एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग कर रहा ईरान।

    3. अमेरिकी सैन्य इतिहास में लड़ाकू विमानों को भारी नुकसान।

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने पिछले 48 घंटों में दो अमेरिकी सैन्य विमानों तथा दो ब्लैक हॉक समेत तीन हेलीकाप्टरों को निशाना बनाकर अमेरिकी हवाई वर्चस्व के दावों को चुनौती दी है।

    ईरान सेना ने इसके पीछे नई हवाई रक्षा प्रणाली को श्रेय दिया है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब पारंपरिक रडार के बजाय इन्फ्रारेड और मोबाइल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। इससे दुश्मन विमानों को ट्रैक करना आसान होता है और खुद की लोकेशन छिपी रहती है।

    अमेरिकी सैन्य इतिहास के 20 वर्षों में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमानों को नुकसान हुआ है। एपी के अनुसार, ईरान की इस सफलता के पीछे उसकी एसीमिट्रिक युद्धक रणनीति और कम दृश्यता वाली वायु रक्षा प्रणाली को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा

    शुक्रवार को अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान को मार गिराए जाने के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने एक नई उन्नत रक्षा प्रणाली के उपयोग का संकेत दिया। इसके कुछ घंटे बाद एफ-15ई के चालक दल की तलाश में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकाप्टर भी हमले की चपेट में आए, हालांकि वे ईरानी हवाई क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे। इसी दौरान एक अमेरिकी ए-10 वार्थोग विमान कुवैत के ऊपर मार गिराने का दावा ईरान की तरफ से किया गया।

    खबरें और भी

    माजिद इन्फ्रारेड एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग कर रहा ईरान

    विश्लेषकों के अनुसार, ईरान ने संभवत: माजिद इन्फ्रारेड एयर डिफेंस सिस्टम या कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइलों का उपयोग किया। माजिद प्रणाली रडार संकेत उत्सर्जित नहीं करती, बल्कि निष्क्रिय इन्फ्रारेड सेंसर और प्राक्सिमिटी फ्यूज से काम करती है। इससे लड़ाकू विमान मिसाइल दागे जाने से पहले खतरे का पता नहीं लगा पाते। इसकी मारक क्षमता लगभग आठ किलोमीटर दूरी और छह किलोमीटर ऊंचाई तक है, जबकि सेंसर 15 किलोमीटर तक लक्ष्य पकड़ सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यही प्रणाली मार्च में अमेरिकी एफ-35 स्टेल्थ विमान को नुकसान पहुंचाने में भी प्रयुक्त हुई थी। एफ-35 जैसे अत्याधुनिक विमान से निकलने वाली ऊष्मा इसे इन्फ्रारेड मिसाइलों के लिए संवेदनशील बनाती है। माजिद प्रणाली में एक साथ आठ मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं और यह बाहरी कशेफ-99 फेज्ड ऐरे सिस्टम से जुड़कर 30 किलोमीटर तक लक्ष्य ट्रैक कर सकती है।

    ईरान ने पिछले साल 12 दिन के युद्ध के बाद अपनी रणनीति बदलते हुए स्थायी वायु रक्षा प्रतिष्ठानों की जगह भूमिगत सुरंगों, मिसाइल शहरों और मोबाइल लॉन्चरों पर जोर दिया।

    ईरान के लगभग आधे मिसाइल लॉन्चर अब भी सुरक्षित

    अमेरिकी खुफिया आकलन के अनुसार, लगातार हमलों के बावजूद ईरान के लगभग आधे मिसाइल लॉन्चर अब भी सुरक्षित हैं। मोबाइल सतह से हवा में मार करने वाली प्रणालियां ''शूट एंड स्कूट'' रणनीति के तहत तुरंत स्थान बदल लेती हैं, जिससे उन्हें नष्ट करना कठिन हो जाता है।

    रूसी दस्तावेजों के अनुसार, ईरान ने 500 वेरबा मैन-पोर्टेबल मिसाइल लॉन्चर खरीदने का समझौता किया है। इसके अलावा कुछ विश्लेषकों ने चीन की एचक्यू-9बी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली के संभावित उपयोग की भी आशंका जताई है, जो रडार और इन्फ्रारेड दोनों मार्गदर्शन प्रणालियों से लैस है।

    यह भी पढ़ें- 'नर्क बरसने में 48 घंटे बाकी...', ट्रंप ने ईरान को होर्मुज पर याद दिलाई डेडलाइन