ईरान के 'डील मेकर' और अमेरिका संग बातचीत का अहम चेहरा... कौन हैं अब्बास अराघची?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें एक मजबूत 'डील मेकर' और अनुभवी कूटनीतिज्ञ ...और पढ़ें

सीजफायर वार्ता के केंद्र में अराघची निजी जिंदगी और करियर भी चर्चा में (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इन दिनों चर्चा में हैं, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सीजफायर वार्ता में वे अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें एक मजबूत 'डील मेकर' माना जाता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बातचीत को आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।
अराघची का कूटनीतिक करियर काफी लंबा और अनुभव से भरा रहा है। साल 2015 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों और जर्मनी के साथ ईरान के परमाणु समझौते की वार्ता के अंतिम दौर में भी वे प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उस समय बातचीत के दौरान उनके सख्त और स्पष्ट रुख की काफी चर्चा हुई थी।
क्यों हैं चर्चा में?
वर्तमान में ईरान-अमेरिका के बीच चल रही वार्ताओं में समझौता कराने की कोशिशों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी कारण वे फिर से अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं।
2007 से 2013 के बीच उन्होंने ईरान के तत्कालीन मुख्य वार्ताकार सईद जलीली के अधीन काम किया। हालांकि कुछ कूटनीतिक मुद्दों पर मतभेद होने के बाद उन्होंने सीधे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई से शिकायत भी की थी, जिससे उनकी स्वतंत्र सोच और मजबूत व्यक्तित्व का अंदाजा लगता है।
कैसा है निजी जीवन?
अब्बास अराघची का जन्म 5 दिसंबर 1962 को तेहरान में हुआ था। उन्होंने इंग्लैंड की केंट यूनिवर्सिटी से पीएचडी की पढ़ाई की। उनकी पारिवारिक जिंदगी भी चर्चा में रही है। उनकी दो शादियां हुई हैं और उनके तीन बच्चे हैं। पहली पत्नी से उनका तलाक हो चुका है, जबकि दूसरी पत्नी अरेजू अहमद के साथ उनका एक बेटी है।
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अराघची का परिवार कालीन के कारोबार से जुड़ा था। जब वे 17 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति को अपना क्षेत्र बनाया। उनकी पढ़ाई का विषय 20वीं सदी के इस्लामी राजनीतिक विचार और राजनीतिक अर्थव्यवस्था का विकास रहा, जिससे उन्हें वैश्विक राजनीति की गहरी समझ मिली।
करियर का सफर
उन्होंने 1989 में ईरान के विदेश मंत्रालय में अपने करियर की शुरुआत की। बाद में वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से भी जुड़े और फिनलैंड व जापान में ईरान के राजदूत रहे। 2003 से 2007 के बीच वे यूरोप विभाग के प्रमुख रहे। इसके बाद 2024 में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने उन्हें विदेश मंत्री नियुक्त किया।
अराघची को फारसी संगीत का शौक है और वे अक्सर अपने खाली समय में संगीत सुनते हैं। इसके अलावा वे सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करते हैं और वैश्विक मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं। वे कूटनीति में सख्त और स्पष्ट छवि के लिए जाने जाते हैं, लेकिन निजी तौर पर शांत और विचारशील माने जाते हैं।
क्या-क्या हैं उपलब्धियां?
उन्हें जापान का 'ऑर्डर ऑफ राइजिंग सन' सम्मान भी मिल चुका है। इसके अलावा वे एक लेखक भी हैं और उन्होंने कूटनीति से जुड़ी किताबें लिखी हैं। हालांकि उन पर परिवार से जुड़े व्यवसाय को फायदा पहुंचाने के आरोप भी लगे हैं। 2015 के परमाणु समझौते के दौरान भी उनके खिलाफ ऐसे आरोप सामने आए थे, जिन्हें लेकर विवाद हुआ था।
अराघची अंग्रेजी और अरबी दोनों भाषाओं में धाराप्रवाह बोलते हैं, जो उनके कूटनीतिक काम में मदद करता है। फिनलैंड में अपने कार्यकाल के दौरान वे साइकिल से ऑफिस जाया करते थे, जो उनके सादगीपूर्ण जीवन का एक उदाहरण माना जाता है।