क्या है वर्साय की संधि और क्यों सता रहा ट्रंप को इसका डर? जानिए मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान का प्लान
अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को 60 दिनों के युद्धविराम का समझौता हुआ था, लेकिन इस समझौते को एक महीना भी नहीं हुआ और सीजफायर टूट गया है। ...और पढ़ें
-1783767651830_m.webp)
अमेरिका-ईरान के बीच टूटा सीजफायर (जागरण)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, तेहरान। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इस युद्ध का अंजाम सिर्फ इन तीन देशों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को भुगतान पड़ा। लेकिन अब एक बार फिर चिंगारी भड़कती दिख रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत के बाद 17 जून को समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन ईरान की तरफ से होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस सीजफायर को तोड़ दिया है।
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर टूटा
राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार, 8 जुलाई को ईरान के साथ युद्धविराम को खत्म घोषित कर दिया। हरान के होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमला करने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरानी ठिकानों पर हमला करने का आदेश दिया।
ईरान ने इस सप्ताह होर्मुज में तीन टैंकरों पर हमला किया। इसके बाद अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर करीब 90 हमले करके जवाब दिया और फिर तेहरान ने बहरीन और कुवैत पर 85 जवाबी हमले करने का दावा किया।
खबरें और भी
ट्रंप पर वर्साय का साया
ट्रंप ने 17 जून को वर्साय के महल में ईरान के साथ 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जहां आधिकारिक तौर पर प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ था।
107 साल पहले वर्साय पैलेस में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन समेत मित्र राष्ट्रों के नेताओं ने जर्मनी के साथ वर्साय संधि पर दस्तखत किए थे।
एक तरफ जहां प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हो रहा था, लेकिन जर्मनी पर संधि की इतनी कठोर शर्तें रखी गई, जिसके कारण स्थायी शांति के बजाय द्वितीय विश्व युद्ध की सुगबुगाहट तेज हो गई।
अमेरिका-ईरान के बीच समझौते पर भी राष्ट्रपति ट्रंप ने वर्साय के महल में ही साइन किए थे, लेकिन दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा अनसुलझा है।
दोनों देशों के कहा था कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने तक होर्मुज और यूरेनियम के मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा। दोनों देशों के बीच 17 जून को 60 दिनों के युद्धविराम का समझौता हुआ था, लेकिन इस करार को एक महीना भी नहीं हुआ और ये समझौता टूट गया।
-1783768649153.jpg)
क्या फिर छिड़ेगा अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध?
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से जानकारी मिलने के बाद, ट्रंप ने ईरान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल बेचने की अनुमति रद कर दी और नए हमलों का आदेश दिया है।
ईरान भी अमेरिका के हर हमले का जवाब दे रहा है। ईरान ने अमेरिका से जुड़ी सुविधाओं और अमेरिकी सेना की मेजबानी करने वाले खाड़ी देशों को निशाना बनाकर जवाब दिया।
अंकारा में NATO समिट में जब राष्ट्रपति ट्रंप ने पूछा गया कि क्या अमेरिका-ईरान के बीच मेमोरेंडम खत्म हो गया है तो ट्रंप ने कहा, 'यह बहुत दिलचस्प सवाल है। मुझे लगता है कि यह खत्म हो चुका है। मैं अब उनसे कोई डील नहीं करना चाहता।'
ट्रंप ने आगे कहा, 'वे घटिया लोग हैं, जानते हैं घटिया लोग क्या होते हैं? वे घटिया हैं। वे बीमार मानसिकता वाले लोग हैं। उन्हें बीमार मानसिकता वाले लोग ही चलाते हैं और वे क्रूर, हिंसक लोग हैं।'
ट्रंप ने इन तीखी बातों के साथ ही ईरान के साथ बातचीत जारी रखने की गुंजाइश भी छोड़ी। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि वॉशिंगटन कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और तकनीकी बातचीत जारी है।

ईरान कर रहा युद्ध को कंट्रोल?
ट्रंप के मुकाबले ईरान इस युद्ध को ज्यादा कंट्रोल कर रहा है, क्योंकि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य में अपना दबदबा चाहता है और कम लागत पर गड़बड़ी पैदा कर सकता है। वहीं अमेरिका होर्मुज की स्थायी सुरक्षा की गारंटी देने में ज्यादा खर्च कर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वो जलमार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस इसी गुजरता है। ईरान ने इस जलमार्ग पर अपना कंट्रोल करके युद्ध पर भी नियंत्रण हासिल किया है।
तेहरान का मकसद जरूरी नहीं कि जलडमरूमध्य को हमेशा के लिए बंद करना हो। मकसद यह साबित करना है कि जब तक ईरान को जलमार्ग में प्रमुख सुरक्षा शक्ति के तौर पर मान्यता नहीं मिलती, तब तक कोई अंतिम समझौता संभव नहीं है।
ट्रंप को रोकना होगा युद्ध
ईरान इन्हीं सभी वजहों से अमेरिका के सभी हमलों को झेलने के लिए तैयार दिखता है। ईरान के भी नए नेतृत्व का मानना है कि ट्रंप इस युद्ध से जल्दी बाहर निकलना चाहते हैं।
दुनियाभर में बढ़ती पेट्रोल की कीमतें और अमेरिका में मध्यावधि चुनाव ट्रंप को तनाव बढ़ाने से रोक रहे हैं। अमेरिका में इसी साल नवंबर में मध्यावधि चुनाव हैं, इसलिए ट्रंप किसी भी तरह इस युद्ध को रोकना चाहेंगे।
यह भी पढ़ें- ट्रंप की 1000 मिसाइलों की धमकी के बीच तेहरान में धमाके, ईरान बोला- पुराना गोला-बारूद नष्ट किया
-1783768458370.jpg)