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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Energy Crisis से जूझ रहे यूरोप के लिए रूस बना है सबसे बड़ा खलनायक, यूरोपीय कमीशन जल्‍द उठाएगा कुछ बड़े कदम

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Sat, 10 Sep 2022 02:09 PM (IST)

    रूस द्वारा गैस सप्‍लाई बंद कर देने से यूरोपीय यूनियन की हालत बेहद खराब है। लोगों के एनर्जी बिल बढ़ गए हैं और ऊर्जा कमी की वजह से सदस्‍य देशों को कई चु ...और पढ़ें

    EU के सदस्‍य देशों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
    EU के सदस्‍य देशों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    ब्रसेल्‍स (एजेंसी)। रूस से आने वाली गैस में आई रुकावट से जो संकट समूचे यूरोप के सामने खड़ा है उससे निजाद पाने के लिए यूरोपीय कमीशन कुछ बड़े कदम उठाने की घोषणा करने वाला है। इसकी जानकारी यूरोपीय कमीशन की तरफ से दी गई है। यूरोपीय कमीशन ने कहा है कि रूस की वजह से यूरोपीय यूनियन के सदस्‍य देश भीषण ऊर्जा संकट की मार झेल रहा है। इसलिए जरूरी है कि जल्‍द ही इसके लिए कुछ उपाय किए जाएं। यूरोपीय कमीशन इसको देखते हुए जल्‍द ही कुछ जरूरी घोषणओं की लिस्‍ट जारी करेगा। इसमें ये भी साफ कर दिया गया है कि कमीशन कुछ बड़े और कड़े कदम भी उठा सकता है।

    जर्मनी को झटका

    आपको बता दें कि फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, तभी से यूरोप को होने वाली गैस सप्‍लाई में लगातार गिरावट और रुकावट आ रही है। जुलाई, अगस्‍त और अब सितंबर में भी कुछ दिनों के लिए रूस ने यूरोप को होने वाली गैस सप्‍लाई रोक दी है। इससे यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था जर्मनी को जबरदस्‍त झटका भी लगा रहा है। पिछले दिनों इस संकट से उबरने के लिए जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्‍कोल्‍ज कनाडा भी गए थे।इसके अलावा इस संकट से फ्रांस समेत सभी देश जूझ रहे हैं। गैस की कमी से इसकी कीमतों में भी जबरदस्‍त उछाल देखने को मिला है। इसकी वजह ये यूरोपीय यूनियन के सदस्‍य देशों की अर्थव्‍यवस्‍था डांवाडोल होती दिखाई दे रही है।

    विकल्‍प खोजने में जुटा ईयू 

    हालांकि, ईयू के कुछ सदस्‍य देश अपने लिए विकल्‍प खोजने में काफी समय से जुटे हुए हैं। इसके बाद भी उनके पास मौजूद संसाधन उनकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं। इस बीच यूरोप के सबसे बड़े परमाणु केंद्र जेपोरिझिझिया की एक मात्र यूनिट को भी बंद कर देने से इस संकट में वृद्धि ही हुई है। इस यूनिट को इस परमाणु केंद्र के आसपास हो रहे हमलों के मद्देनजर बंद किया गया है। ये केंद्र रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही रूस के कब्‍जे में है। पिछले दिनों यहां पर अंतरराष्‍ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की टीम भी पहुंची थी। इस टीम का काम इसकी रखरखाव करना है। गौरतलब है कि इस केंद्र के आसपास हो रहे हमलों को बंद करने की अपील लगातार यूएन समेत दुनिया के कई देश कर चुके हैं। इन हमलों के लिए रूस और यूक्रेन एक दूसरे को जिम्‍मेदार ठहरा रहे हैं।

    रूस की गैस पूरी तरह से बंद होने का डर

    ईयू को इस बात का भी डर है कि आने वाले समय में रूस यूरोपीय यूनियन को होने वाली गैस सप्‍लाई को पूरी तरह से बंद कर सकता है। इसकी आशंका से घिरे ईयू के ऊर्जा मंत्री अब लीगल टेक्‍स को बनाने में लगे हैं जिसमें इमरजेंसी फंडिंग का भी जिक्र किया गया है। एनर्जी क्राइसेस की मार चपेट रहे ईयू के लोगों को बिजली केबबिल पर पहले के मुकाबले अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है। ईयू अब इस विकल्‍प की भी तलाश कर रहा है कि सदस्‍य देशों में गैस रहित बिजली कंपनियों को बढ़ावा दिया जाए। इसके अलावा वो इसके लिए परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ सौर और अक्षय ऊर्जा को तलाशने पर भी जोर देने पर विचार कर रहा है। ईयू का ये भी मानना है कि गैस रहित बिजली के उत्‍पादन से जहां बिजली के बिलों में कटौती की जा सकती है वहीं इसके दूसरे फायदे भी हो सकते हैं।

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    गैस सप्‍लाई में रुकावट पर रूस का तर्क 

    दूसरी तरफ रूस का कहना है कि यूरोपीय यूनियन ने उसके ऊपर जो आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं, यदि वो हटा लिए जाते हैं तो वो गैस की सप्‍लाई को सामान्‍य कर सकता है। रूस लगातार गैस को एक हथियार के रूप में ईयू पर इस्‍तेमाल कर रहा है।  

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