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    'सिर्फ कागज का टुकड़ा, नहीं मिलेगी कोई सुरक्षा', सऊदी-तुर्किए और पाकिस्तान के नए रक्षा समझौते से ईरान खफा

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 09:36 PM (GMT+05:30)

    सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए रक्षा समझौते पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई है। ईरान का कहना है कि यह समझौता सऊदी अरब को सुरक्षा नहीं दे सकता औ ...और पढ़ें

    मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट।

    मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट।

    HighLights

    1. सऊदी, पाकिस्तान, तुर्किए ने किया नया रक्षा समझौता।

    2. ईरान ने समझौते को बताया 'कागज़ का टुकड़ा'।

    3. क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहराएगा भू-राजनीतिक तनाव।

    डिजिटल डेस्क, तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और युद्ध के माहौल के बीच शुक्रवार को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने मिलकर एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में अब इस समझौते को लेकर ईरान ने अपना रुख साफ करते हुए इस त्रिपक्षीय समझौते को लेकर सऊदी अरब पर बड़ा निशाना साधा है।

    बता दें कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की हालिया मुलाकात के दौरान 'मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' पर मुहर लगी है।

    मक्का समझौते के बाद क्या होगा?

    तीनों देशों के बीच हुए इस समझौते के तहत सऊदी, तुर्किय और पाकिस्तान में से किसी भी एक देश पर होने वाले हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।इसका उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्तर पर सुरक्षा को बढ़ावा देना है।

    Mecca Joint Defense Agreement

    समझिए ईरान ने क्यों साधा निशाना?

    इस बात को ऐसे समझिए कि सऊदी अरब लंबे समय से ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों जैसे हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करता रहा है। अपने तेल भंडारों और अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए सऊदी अरब अब अमेरिका के अलावा अन्य देशों के साथ भी अपने रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है।

    ईरान ने समझौते पर क्या कहा?

    ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के सदस्य इब्राहिम रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस समझौते की कड़ी आलोचना की है।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सऊदी अरब को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि तुर्किए और पाकिस्तान के साथ किया गया यह कागजी समझौता उन्हें सुरक्षा नहीं दिला सकता।

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    उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ठीक वैसे ही, जैसे पिछले कई सालों से अमेरिका की तरफ झुकाव रखने से भी उन्हें सुरक्षा नहीं मिली थी। सांसद ने आगे दो टूक अंदाज में दावा किया कि अगर सऊदी अरब अपनी नीतियों में सुधार करे, तो उसे दूसरों से सुरक्षा की 'भीख' मांगने की कभी जरूरत नहीं पड़ेगी।

    इस समझौते के मायने क्या?

    गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने खाड़ी देशों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस युद्ध के कारण लाल सागर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए का यह नया सैन्य गठबंधन क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाने की कोशिश है, लेकिन ईरान की इस चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और अधिक गहरा सकता है।

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