अररिया का झमटा पुल हादसा: पाइल कैप फेल होने की वजह से धंसा पाया, जांच टीम ने गुणवत्ता की कमी को बताया वजह
पटना से आई तीन सदस्यीय टीम ने अररिया के झमटा-महिषाकोल में परमान नदी पर धंसे पुल के पाए की जांच की। प्रारंभिक जांच में पाया धंसने का कारण पाइल कैप का फ ...और पढ़ें

पुल की जांच करने पहुंची टीम। फोटो जागरण
HighLights
पटना से तीन सदस्यीय टीम ने पुल की जांच की।
पाइल कैप फेलियर और गुणवत्ता की कमी मुख्य कारण।
स्थानीय लोगों ने निर्माण में घटिया सामग्री की शिकायत की।
संवाद सूत्र, अररिया। सदर प्रखंड के झमटा-महिषाकोल में परमान नदी पर बने पुल के एक पांया के धंसने की जांच के लिए पटना से तीन सदस्यीय विभागीय टीम तीसरे दिन शनिवार को अररिया पहुंची। जहां से टीम के सदस्य स्थानीय कार्यपालक अभियंता के साथ चंद्रशेखर सिंह के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर उसकी जांच की।
टीम में ग्रामीण कार्य विभाग के चीफ इंजीनियर दीप नारायण प्रसाद, ब्रिज एक्सपर्ट अरुण कुमार मिश्रा और राज्य गुणवत्ता समन्वयक राजीव रंजन कुमार शामिल थे। टीम ने ब्रिज के महिषाकोल की ओर से धंसे तीसरे पाया की जांच की, जिसमें उसकी संरचना, गुणवत्ता के साथ ही ब्रिज के दूसरे किनारे के पाया को भी परखा।
टीम के सदस्यों ने ब्रिज के ऊपर रेलिंग और उसके नीचे के स्ट्रक्चर में आई दरार, पाया धंसने से स्लैब के डाउन होने आदि की मापी कर जांच की। ब्रिज एक्सपर्ट सेवानिवृत इंजीनियर अरुण कुमार मिश्रा ने प्रथम दृष्टया पाया धंसने का कारण पाइल कैप का फेल होना और गुणवत्ता की कमी को माना है।
वहीं, क्वालिटी कंट्रोल पूर्णिया से पहुंचे अधीक्षण अभियंता रविंद्र कुमार ने भी अपने स्तर से जांच शुरु की है। यह प्रारंभिक और उपरी सतह की जांच है। इसमें पानी के अंदर और क्वालिटी कंट्रोल की बारीकी से जांच होनी है। जिसके बाद ही जांच टीम किसी नतीजे पर पहुंचेगी।
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डेढ़ इंच धंसा पाया
प्रारंभिक जांच में पाया करीब डेढ़ इंच धंसा मिला है। जिसके कारण वहां का उपरी सतह डाउन हुआ है। टीम ने नाव की मदद से पाया के समीप जाकर उसका भी निरीक्षण किया। जांच टीम के सदस्यों ने इस संबंध में कुछ भी बताने से इंकार किया। सिर्फ इतना बताया कि इसकी विभिन्न स्तरों पर जांच होगी और उसके बाद किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।
वहीं, नदी में पानी धीरे-धीरे बढ़ रही है। यदि जल्द इसके मरम्मत का कार्य शुरु नहीं हुआ, तो इसमें समय लग सकता है। तत्काल पानीे के करंट से पाया के बचाव के लिए उसमें बोल्डर पाइलिंग भी किया जा सकता है।
अभियंता की मानें तो पाया के दोनों ओर अलग से पक्की संरचना तैयार कर उस पर जैक लगाकर तत्काल इसकी मरम्मत की जा सकती है। एक्सपर्ट ऐसे पुल के लिए पाइल की जगह वेल फाउंडेशन को ज्यादा मजबूत मानते हैं।
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
इस पुल का निर्माण नालंदा की एजेंसी प्रकाश कंस्ट्रक्शन द्वारा मार्च 2023 में पूरा किया गया था। महज तीन साल में पुल का एक पाया धंसने की घटना ने ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बताया कि पुल निर्माण के दौरान नदी के बालू का इस्तेमाल किया गया था और उस समय भी गुणवत्ता को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मौके पर मौजूद समाजसेवी फैसल यासीन ने निर्माण कार्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुल निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर घटिया सामग्री और नदी के बालू के इस्तेमाल की शिकायत की गई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।
इधर पुल से होकर भारी वाहनों के गुजरने पर रोक के लिए हाइट गेज लगाने और दोनों ओर ड्रम रखने पर भी विचार हो रहा है। तत्काल वहां इस होकर भारी वाहनों के नहीं गुजरने को लेकर सूचना बोर्ड लगाया गया है।