'बाहर कमाए भेजलक, कफन में लौटल'... इंदौर अग्निकांड में बिहार के एक और मजूदर की मौत, अब तक 6 ने तोड़ा दम
इंदौर पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड में बिहार के अररिया जिले के एक और मजदूर निरंजन कुमार की मौत हो गई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। ...और पढ़ें

पीड़ित के घर में जुटे स्वजन। फोटो जागरण
HighLights
इंदौर अग्निकांड में बिहार के एक और मजदूर की मौत।
अररिया के गोखलापुर-भवानीपुर गांवों में अब तक 6 मौतें।
परिवार गरीबी के कारण बाहर कमाने गए बेटों को खो रहे।
संवाद सूत्र, फुलकाहा (अररिया)। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले स्थित पटाखा फैक्ट्री में 14 मई को हुए भीषण अग्निकांड ने नरपतगंज प्रखंड के गोखलापुर और भवानीपुर गांवों को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है।
शनिवार को एक और घायल मजदूर की मौत की खबर पहुंचते ही दोनों गांवों में फिर कोहराम मच गया। अब तक इस दर्दनाक हादसे में छह मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई मजदूर अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार गोखलापुर वार्ड संख्या आठ निवासी 26 वर्षीय निरंजन कुमार, पुत्र हीरालाल राम की शुक्रवार की देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। वे विस्फोट में गंभीर रूप से झुलस गए थे और इंदौर के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
मौत की खबर गांव पहुंचते ही स्वजनों में चीख-पुकार मच गई। शनिवार की सुबह से ही मृतक के घर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। गांव की महिलाएं रो-रोकर बेसुध हो रही थीं, जबकि बूढ़े माता-पिता की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए, लेकिन किसी के पास इस दर्द का जवाब नहीं था। हर कोई बस यही कह रहा था-गरीबी बेटा लोग के बाहर कमाए भेजलक, लेकिन वापस कफन में लौटल...बताया जाता है कि निरंजन कुमार बेहद गरीब परिवार से थे और मजदूरी कर ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।
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अब तक 6 मजदूरों की मौत
गौरतलब है कि इस अग्निकांड में इससे पूर्व गोखलापुर के दो मजदूरों की मौत हो चुकी थी। वहीं भवानीपुर गांव के भी तीन मजदूरों की जान जा चुकी है। अब निरंजन कुमार की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। गोखलापुर और भवानीपुर गांव की स्थिति इन दिनों बेहद मार्मिक बनी हुई है।
जिन गलियों में कभी युवकों की आवाज और हंसी सुनाई देती थी, वहां अब सिर्फ रोने और सिसकियों की आवाज गूंज रही है। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला है। मां-बाप अपने बेटों की तस्वीर देखकर रो रहे हैं।
बहनें और बच्चे अब भी यकीन नहीं कर पा रहे कि उनका अपना अब कभी लौटकर नहीं आएगा।ग्रामीणों का कहना है कि गांव के गरीब युवक परिवार का पेट पालने और बहनों की शादी के लिए बाहर कमाने जाते हैं, लेकिन वहां सुरक्षा के अभाव में उनकी जिंदगी दांव पर लगी रहती है। लोगों ने आरोप लगाया कि पटाखा फैक्ट्री में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।