'द सीक्रेट ट्रेड्स ऑफ विक्रमशिला' थीम पर बनाई रिवर्सिबल साड़ी; भारत के 80 डिजाइनरों को पछाड़ बिहार के दीपक रहे अव्वल
भागलपुर के टेक्सटाइल डिजाइनर दीपक कुमार ने 'द सीक्रेट ट्रेड्स ऑफ विक्रमशिला' थीम पर बनी रिवर्सिबल साड़ी के लिए राष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता में प्रथम ...और पढ़ें

10 अगस्त को नई दिल्ली में वस्त्र मंत्री देंगे 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार; 'द सीक्रेट ट्रेड्स ऑफ विक्रमशिला' थीम पर बनाई साड़ी
HighLights
दीपक कुमार ने राष्ट्रीय डिजाइन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
'द सीक्रेट ट्रेड्स ऑफ विक्रमशिला' थीम पर बनाई रिवर्सिबल साड़ी।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री द्वारा 10 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुरी सिल्क को एक बार फिर से देश और दुनिया के फैशन पटल पर नई पहचान दिलाने में स्थानीय डिजाइनरों का हुनर रंग ला रहा है। जिले के जगदीशपुर स्थित मिरनचक क्लस्टर के प्रतिभावान टेक्सटाइल डिजाइनर दीपक कुमार ने राष्ट्रीय स्तर की डिजाइन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे बिहार का नाम रोशन किया है।
आगामी 10 अगस्त को नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में आयोजित 'डिजाइनर्स कॉन्क्लेव' में केंद्रीय वस्त्र मंत्री द्वारा दीपक को सम्मानित किया जाएगा। वस्त्र मंत्रालय की ओर से प्रथम पुरस्कार के रूप में उन्हें 1 लाख रुपये की नकद राशि भी प्रदान की जाएगी।
'द सीक्रेट ट्रेड्स ऑफ विक्रमशिला' थीम ने दिलाया राष्ट्रीय सम्मान
राष्ट्रीय अवार्ड के लिए चुने गए इस विशेष कलेक्शन का आधार भागलपुर की ऐतिहासिक धरोहर विक्रमशिला बौद्ध महाविहार की कहानी थी। इसे 'द सीक्रेट ट्रेड्स ऑफ विक्रमशिला कलेक्शन' नाम दिया गया।
बुनकर सेवा केंद्र के सहयोग से हैंडलूम पर मलबरी सिल्क, तसर और एरी सिल्क पर विक्रमशिला अवशेषों में अंकित बौद्ध धर्म के 'कमल के फूल' को पहली बार उकेरा गया। वस्त्र मंत्रालय को दो विशेष साड़ियां और गारमेंट्स (स्कर्ट व टॉप) का सेट भेजा गया था, जिसे निर्णायकों ने देशभर के 72 क्लस्टरों के 80 डिजाइनरों में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया।
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दोनों तरफ से पहनी जाने वाली 'टू-वे ड्रेप' साड़ी
दीपक कुमार ने केवल डिजाइन ही नहीं बनाया, बल्कि एक नया तकनीकी प्रयोग करते हुए ऐसी साड़ी तैयार की जिसे महिलाएं दोनों तरफ से (Reversible) पहन सकती हैं। इस अनूठी साड़ी को 'टू-वे ड्रेप' नाम दिया गया है।
उन्होंने इस कला में मिरनचक के स्थानीय बुनकरों—कयूम अंसारी, शमशेर अली, बदरुद्दीन अंसारी और अमन को भी पूरी तरह से प्रशिक्षित कर दिया है। अब इस अनूठी साड़ी की बाजार में काफी मांग बढ़ गई है।
NIFT गांधीनगर से पढ़ाई, 14 साल कॉर्पोरेट अनुभव के बाद लौटे अपनी माटी
बांका जिले के रजौन प्रखंड अंतर्गत कठौन गांव के निवासी दीपक कुमार ने वर्ष 2009 में निफ्ट (NIFT) गांधीनगर से फैशन डिजाइनिंग की डिग्री पूरी की थी। 14 वर्षों तक देश-विदेश की प्रतिष्ठित ब्रांडेड कंपनियों में काम करने के बाद बिहार की माटी का खिंचाव उन्हें 2023 में वापस ले आया।
सितंबर 2024 में मिरनचक को हस्तकरघा क्लस्टर बनाए जाने पर उन्हें बतौर डिजाइनर प्रतिनियुक्त किया गया, जहां उन्होंने बुनकरों के साथ मिलकर भागलपुरी सिल्क को नया रूप दिया।
केंद्रीय वस्त्र मंत्री को सौंपेंगे बिचौलिया-मुक्ति और एक्सपोर्ट का प्लान
पुरस्कार समारोह के दौरान दीपक कुमार केवल सम्मान स्वीकार नहीं करेंगे, बल्कि भागलपुर के बुनकरों की समस्याओं से केंद्रीय वस्त्र मंत्री को अवगत भी कराएंगे।
दीपक ने बताया कि भागलपुर में सिल्क का एक्सपोर्ट कम हुआ है, जिससे कुशल बुनकरों को सही मजदूरी नहीं मिल रही और बिचौलिए मुनाफा कमा रहे हैं। वे वस्त्र मंत्री को एक ठोस प्रस्ताव सौंपेंगे, जिसमें बुनकरों को सीधे बाजार से जोड़ने, एक्सपोर्ट बढ़ाने और आधुनिक ट्रेंड के अनुसार उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव शामिल होंगे।