Vikramshila Setu Update: विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज के ट्रायल की तैयारी, हल्के वाहनों को मिल सकती है मंजूरी
विक्रमशिला सेतु के ध्वस्त हिस्से पर बने 170 फीट लंबे बेली ब्रिज के ट्रायल की तैयारी शुरू हो गई है, जिसके सफल होने पर जून के पहले सप्ताह में आवागमन बहा ...और पढ़ें

विक्रमशिला पर पहला बेली ब्रिज तैयार। फोटो जागरण

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जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Update: विक्रमशिला सेतु के ध्वस्त हिस्से पर बने 170 फीट लंबे बेली ब्रिज के ट्रायल की तैयारी शुरू हो गई है। इसी परीक्षण की सफलता पर जून के पहले सप्ताह में आवागमन बहाल करने की योजना निर्भर है।
हालांकि, ट्रायल की प्रक्रिया को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। गंगा की सतह से काफी ऊपर सेतु के दोनों टूटे सिरों को जोड़ता यह ढांचा नीचे से देखने पर हैंगिंग ब्रिज जैसा दिखाई देता है।
यही कारण है कि इसके परीक्षण और प्रदर्शन पर तकनीकी विशेषज्ञों के साथ आम लोगों की भी नजर टिकी हुई है। बीआरओ और तकनीकी विशेषज्ञ इस पर विचार कर रहे हैं कि पहले 170 फीट लंबे मुख्य बेली ब्रिज का परीक्षण किया जाए या तीनों बेली ब्रिजों का निर्माण पूरा होने के बाद संयुक्त ट्रायल कराया जाए।
जानकारों के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण 170 फीट लंबे मुख्य बेली ब्रिज का होगा, क्योंकि यही उस हिस्से को जोड़ रहा है, जहां विक्रमशिला सेतु का स्लैब ध्वस्त होकर गंगा में गिर गया था। यहां से सेतु दो भाग में हो गया था, जिसपर बीआरओ ने बेली ब्रिज बनाकर फिर से जोड़ दिया है।
हल्के चार पहिया वाहनों के आवागमन को मिल सकती है अनुमति
बीते सप्ताह भागलपुर पहुंचे बीआरओ के अपर महानिदेशक जितेंद्र प्रसाद ने कहा था कि किसी ध्वस्त या क्षतिग्रस्त सड़क पुल के ऊपर इस प्रकार का बेली ब्रिज देश में पहली बार बनाया जा रहा है।
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पहला ब्रिज चूंकि ध्वस्त हिस्से पर है इसलिए सभी की नजर इसी पर होगी। वैसे, पुल पर आवागमन शुरू कराने से पहले अन्य दोनों बेली ब्रिजों का भी तकनीकी परीक्षण किया जाएगा।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट और परीक्षण परिणामों के आधार पर ही सेतु पर यातायात बहाली को अंतिम मंजूरी मिलेगी। प्रारंभिक योजना के अनुसार बेली ब्रिजों को 20 से 25 टन तक की भार क्षमता के अनुरूप तैयार किया गया/जा रहा है, लेकिन आवागमन शुरू होने पर पहले चरण में कार और एसयूवी जैसे हल्के चारपहिया वाहनों को अनुमति मिलने की संभावना है।
जिन स्पैनों पर था संशय, वही बनेंगे नए बेली ब्रिजों का मजबूत आधार
विक्रमशिला सेतु पर तीन बेली ब्रिजों का कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। इनमें 170 फीट लंबा मुख्य बेली ब्रिज ध्वस्त हिस्से पर बनाया गया है, जबकि ध्वस्त हिस्से से नवगछिया की ओर 12 मीटर और भागलपुर की ओर 24 मीटर लंबे बेली ब्रिज कमजोर स्पैनों पर बनाए जा रहे हैं।
विशेष बात यह है कि जिन स्पैनों को तकनीकी जांच में कमजोर माना गया है, वही इन दोनों नए बेली ब्रिजों के लिए आधार का काम करेंगे।
अगले दो दिन में पूरा हो जाएगा दूसरा बेली ब्रिज
बीआरओ की टीम ने शनिवार रात युद्धस्तर पर काम करते हुए दूसरे बेली ब्रिज का फाउंडेशन और प्लेट संयोजन पूरा कर लिया। अब इसके डेक पर लोहे की चादर बिछाई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार अगले दो दिनों में 12 मीटर लंबे इस बेली ब्रिज का निर्माण पूरा हो जाएगा। इसके बाद भागलपुर की ओर 24 मीटर लंबे तीसरे बेली ब्रिज का निर्माण शुरू किया जाएगा। तेज धूप और गर्मी के कारण अधिकांश कार्य रात में कराया जा रहा है।
तकनीकी सूत्रों के अनुसार, 12 और 24 मीटर वाले बेली ब्रिज अपेक्षाकृत कम जटिल हैं, क्योंकि इनके नीचे पुल की संरचना मौजूद है, जो अतिरिक्त आधार का कार्य करेगी।
एक्सपर्ट की टीम कर रही जांच
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार भार पड़ने से कमजोर स्पैनों का गैप बढ़ने और संरचनात्मक जोखिम की आशंका बनी रह सकती है। ऐसे में बेली ब्रिज तैयार होने के बाद यातायात का भार नई संरचनाओं पर स्थानांतरित होगा और कमजोर हिस्सों पर दबाव नहीं पड़ेगा।
दूसरी ओर, पटना IIT समेत विशेषज्ञ संस्थानों की टीम सेतु के विभिन्न हिस्सों की जांच कर रही है। विशेष रूप से नवगछिया की ओर स्थित स्पैनों की भार क्षमता, कंपन, दरारों और संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण किया जा रहा है।
जिला प्रशासन और बीआरओ लगातार निर्माण व जांच कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। लक्ष्य जून के पहले सप्ताह से सीमित आवागमन बहाल करने का है।
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