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    भोजपुर: करोड़ों की सरकारी संपत्ति खंडहर में तब्दील, सनदिया पंचायत भवन पर प्रशासन की चुप्पी

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 03:06 PM (IST)

    भोजपुर की सनदिया पंचायत में 1.17 करोड़ रुपये की लागत से बना पंचायत सरकार भवन उपेक्षा के कारण खंडहर में बदल गया है। पटना हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद इस ...और पढ़ें

    करोड़ों की सरकारी संपत्ति खंडहर में तब्दील, सनदिया पंचायत भवन पर प्रशासन की चुप्पी

    करोड़ों की सरकारी संपत्ति खंडहर में तब्दील, सनदिया पंचायत भवन पर प्रशासन की चुप्पी

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    अरुण प्रसाद, आरा। सदर प्रखंड की सनदिया पंचायत में विडंबना यह है कि जिस पंचायत सरकार भवन को ग्रामीण प्रशासनिक सुविधाओं का केंद्र बनना था, वह उद्घाटन की प्रतीक्षा करते-करते खंडहर में तब्दील हो चुका है। वर्ष 2014 में करीब 1.17 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पंचायत सरकार भवन आज भी उपयोग में नहीं आ सका है।

    नतीजतन, पूरे पंचायत की सरकार बिना अपने भवन के ही संचालित हो रही है। पटना-बक्सर फोरलेन के समीप स्थित यह भवन वर्षों की उपेक्षा का शिकार होकर जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।

    भवन के खिड़की-दरवाजे चोरी हो चुके हैं, जबकि परिसर और कमरों में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। रात के समय यह भवन किसी वीरान और भुतहा इमारत जैसा दिखाई देता है।

    पंचायत भवन नहीं, फिर भी चल रही पंचायत सरकार

    पंचायत से जुड़े अधिकांश कार्यों के लिए ग्रामीणों को आज भी प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से निजी कमरों में बैठकों का आयोजन तो हो जाता है, लेकिन पंचायत सरकार भवन के माध्यम से मिलने वाली कई सुविधाओं से लोग वंचित हैं।

    सनदिया पंचायत के मुखिया एवं जिला मुखिया संघ के अध्यक्ष हरेन्द्र प्रसाद यादव ने बताया कि भवन का निर्माण पूरा होने के बाद इसे पंचायत को हस्तांतरित तो कर दिया गया, लेकिन जर्जर हो चुके भवन के जीर्णोद्धार के लिए कोई राशि उपलब्ध नहीं कराई गई। परिणामस्वरूप भवन वर्षों से बेकार पड़ा है।

    हाई कोर्ट के आदेश का भी नहीं दिखा असर

    मुखिया ने बताया कि भवन के जीर्णोद्धार को लेकर उन्होंने लंबे समय तक जिला प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन समाधान नहीं होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

    उनके अनुसार, वर्ष 2025 में पटना हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी, भोजपुर को दो माह के भीतर भवन का जीर्णोद्धार कराने का निर्देश दिया था। पर, आदेश के लगभग एक वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    उन्होंने कहा कि इस संबंध में हाल में आयोजित हो रहे सहयोग शिविर में भी आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों से उपेक्षित इस भवन का जीर्णोद्धार कर जल्द ही पंचायत सरकार को उसका अपना घर मिलेगा।

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