पटना-आरा रैपिड रेल: दिल्ली-मेरठ की तर्ज पर बिहार में दौड़ेगी हाई-स्पीड ट्रेन, नौकरीपेशा लोगों की राह होगी आसान
बिहार मंत्रिमंडल ने चार रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजनाओं की डीपीआर को मंजूरी दी है, जिसमें पटना-आरा कॉरिडोर पश्चिम बिहार के लिए महत्वपूर्ण है। ...और पढ़ें
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HighLights
बिहार कैबिनेट ने 4 रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दी।
पटना-आरा कॉरिडोर पश्चिम बिहार के लिए महत्वपूर्ण परियोजना।
एनसीआरटीसी डीपीआर तैयार करेगा, आर्थिक विकास को बढ़ावा।
जागरण संवाददाता, आरा। बिहार में आधुनिक और हाई-स्पीड सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने चार रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने की मंजूरी दे दी है। इनमें पटना-आरा कॉरिडोर को पश्चिम बिहार की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में माना जा रहा है।
इस फैसले के बाद भोजपुर समेत शाहाबाद क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी है कि आने वाले वर्षों में पटना और आरा के बीच तेज, सुरक्षित और समयबद्ध क्षेत्रीय रेल सेवा शुरू हो सकेगी। राज्य सरकार के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डीपीआर नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन तैयार करेगा।
यही संस्था दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर का सफलतापूर्वक विकास कर चुकी है। डीपीआर के दौरान प्रस्तावित रूट, संभावित स्टेशनों, यात्री संख्या, तकनीकी पहलुओं, भूमि की आवश्यकता, लागत तथा वित्तीय मॉडल का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार की मंजूरी मिलने पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। पटना-आरा रैपिड रेल परियोजना को केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं माना जा रहा है।
यात्रियों का मानना है कि इससे पूरे पश्चिम बिहार की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। आरा जंक्शन वर्तमान में पूर्व मध्य रेलवे के सबसे व्यस्त स्टेशनों में शामिल है, जहां प्रतिदिन 40 हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं।
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पटना आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़क मार्ग पर जाम और ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ के कारण लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रैपिड रेल शुरू होने के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है, जिससे हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। भोजपुर जिले में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं और नए निवेश को देखते हुए भी इस कॉरिडोर का महत्व बढ़ जाएगा।
जिले में कई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की योजना है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन बढ़ेगा। ऐसे में तेज और आधुनिक परिवहन व्यवस्था उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा शाहाबाद के तीनों जिलों के साथ-साथ छपरा, सिवान, अरवल, बिहटा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
बिहटा में एयरपोर्ट बनने से बढ़ेगा आरा दायरा
बिहार सरकार पहले ही बिहटा एयरपोर्ट और उसके आसपास के क्षेत्र को विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। ऐसे में पटना-आरा रैपिड रेल कॉरिडोर इस पूरे क्षेत्र को एक नए विकास गलियारे के रूप में स्थापित कर सकता है। जानकारों का मानना है कि बेहतर परिवहन नेटवर्क से आरा का शहरी विस्तार तेजी से होगा और भविष्य में यह क्षेत्र ग्रेटर आरा के रूप में विकसित हो सकता है।
गौरतलब है कि लगभग एक वर्ष पहले आरा की महापौर इंदु देवी ने मुख्यमंत्री से आरा को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने का आग्रह किया था। हालांकि वर्तमान में सरकार ने मेट्रो के बजाय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसे लंबी दूरी के लिए अधिक व्यावहारिक और प्रभावी माना जा रहा है।
आरा नगर निगम क्षेत्र में भी शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रैपिड रेल परियोजना समय पर धरातल पर उतरती है तो यह केवल पटना और आरा के बीच दूरी कम नहीं करेगी, बल्कि पूरे पश्चिम बिहार के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाली परियोजना साबित होगी। अब लोगों की निगाहें डीपीआर तैयार होने और इसके बाद परियोजना के निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं।
रैपिड रेल भारतीय रेल का हिस्सा नही है, यह बिहार सरकार का हिस्सा होगी, जिसमे सरकार अंडरग्राउंड या अलीवेटेट बना सकती है। रैपिड रेल पार्टनरसिप से भी चला सकती है। सरस्वती चंद्र, मुख्य सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी हाजीपुर रेलवे जोन।
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