पूर्वी चंपारण: भीषण गर्मी से मुर्गीपालन व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित, अंडा उत्पादन में 25% की गिरावट
पताही प्रखंड में भीषण गर्मी के कारण मुर्गीपालन व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हीटवेव और हीट स्ट्रोक से मुर्गियों की मौत हो रही है, जिससे अंडा और मा ...और पढ़ें
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HighLights
भीषण गर्मी से मुर्गीपालन व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित।
अंडा उत्पादन में 25%, चिकन उत्पादन में 40% गिरावट।
हीट स्ट्रोक से मुर्गियों की मौत, लागत में वृद्धि।
संवाद सहयोगी, पताही। भीषण गर्मी और उमस ने प्रखंड क्षेत्र के मुर्गीपालन व्यवसाय को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। लेयर और ब्रायलर फार्मों में मुर्गियां हीटवेव और हीट स्ट्रोक की चपेट में आ रही हैं, जिससे अंडा और मांस उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा रही है।
कई ब्रायलर फार्मों में मुर्गियों की मौत भी हो रही है, जिससे पोल्ट्री व्यवसायियों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक तापमान के कारण मुर्गियों में हीट स्ट्रेस बढ़ जाता है।
इससे उनकी चारा खाने की क्षमता कम हो जाती है, वजन बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और अंडा देने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इसका सीधा असर उत्पादन और व्यवसायियों की आय पर पड़ रहा है।
पशुपालन विभाग के अनुसार पताही प्रखंड में एक दर्जन से अधिक ब्रायलर एवं लेयर फार्म संचालित हैं। इनसे करीब 100 लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। सामान्य दिनों में इन फार्मों से प्रतिदिन लगभग 50 हजार अंडों तथा करीब एक लाख किलोग्राम चिकन का उत्पादन होता है। लेकिन गर्मी के कारण अंडा उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत और चिकन उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।
बड़का बलुआ के पोल्ट्री व्यवसायी रामकुमार मिश्रा ने बताया कि गर्मी से बचाव के लिए शेड में कूलिंग सिस्टम, पानी का छिड़काव, बेहतर वेंटिलेशन तथा पोषक तत्वों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है।
इसके बावजूद उत्पादन में भारी कमी आई है। ब्रायलर मुर्गियां अपेक्षित वजन तक नहीं पहुंच पा रही हैं और कई फार्मों में हीट स्ट्रोक से उनकी मौत भी हुई है। मिर्जापुर के व्यवसायी मो. आलम ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण ब्रायलर मुर्गियां कम चारा खा रही हैं, जिससे उनका वजन बढ़ने की गति धीमी हो गई है।
वहीं बिजली और कूलिंग सिस्टम पर बढ़ते खर्च ने मुनाफा भी कम कर दिया है। पदुमकेर के राहुल कुमार ने बताया कि लेयर फार्मों में पहले की तुलना में प्रतिदिन काफी कम अंडे मिल रहे हैं।
गर्मी से बचाव के लिए फागिंग, अतिरिक्त पंखे और ठंडे पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिससे संचालन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। रोसड़ा के पोल्ट्री व्यवसायी अखिलेश कुमार ने बताया कि कई ब्रायलर मुर्गियां हीट स्ट्रोक की चपेट में आकर मर रही हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही मौसम में बदलाव नहीं हुआ तो पोल्ट्री व्यवसाय को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।