Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गया: एक पीयूष तो बच गया मगर खतरा अभी टला नहीं, पंचायत में 20 बोरवेल अब भी खुले; CO ने दिए जांच के आदेश

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 04:08 PM (IST)

    फतेहपुर के रंगूनगर में चार वर्षीय पीयूष के बोरवेल में गिरने की घटना ने पीएचईडी की लापरवाही उजागर की है। अमान्य बोरवेल को न भरने से यह हादसा हुआ, और ऐस ...और पढ़ें

    एक पीयूष तो बच गया मगर खतरा अभी टला नहीं, पंचायत में 20 बोरवेल अब भी खुले

    एक पीयूष तो बच गया मगर खतरा अभी टला नहीं, पंचायत में 20 बोरवेल अब भी खुले

    HighLights

    1. चार वर्षीय पीयूष अमान्य बोरवेल में गिरा, विभागीय लापरवाही उजागर।

    2. पीएचईडी ने असफल बोरिंग को नहीं भरा, जिससे हादसा हुआ।

    3. क्षेत्र में कई खुले बोरवेल, भविष्य में दुर्घटना का खतरा।

    संवाद सूत्र, फतेहपुर (गया)। फतेहपुर प्रखंड के गुरपा थाना क्षेत्र के रंगूनगर गांव में चार वर्षीय पीयूष के बोरवेल में गिरने की घटना ने पीएचईडी और संवेदक की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विभागीय निर्देश के बावजूद अमान्य (असफल) बोरिंग को नहीं भरना इस हादसे की बड़ी वजह बनकर सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि असफल बोरिंग को समय रहते भर दिया गया होता तो यह दुर्घटना नहीं होती।

    ग्रामीणों के अनुसार, रंगूनगर में हर घर नल जल योजना के तहत करीब एक माह पहले पीएचईडी के संवेदक ने चार स्थानों पर बोरिंग कराई थी। इनमें दो बोरिंग सफल रहीं, जबकि दो में पानी नहीं निकला।

    ग्रामीणों ने बताया कि घटना वाले स्थान पर बिहार सरकार की जमीन पर महज 100 फीट की दूरी पर दो बोरिंग की गई थी, जो असफल रही। संवेदक ने दोनों बोरिंग को सिर्फ जूट के बोरे से ढककर छोड़ दिया। गुरुवार को इन्हीं में से एक बोरिंग में चार वर्षीय पीयूष गिर गया।

    रेस्क्यू अभियान के बाद जिस बोरवेल से पीयूष को निकाला गया, फिलहाल उसे भर दिया गया, लेकिन उसके पास स्थित दूसरा अमान्य बोरवेल अब भी पूर्ववत है। इतना ही नहीं, रेस्क्यू के दौरान पोकलेन मशीन से खोदा गया करीब 30 फीट गहरा गड्ढा भी अभी तक नहीं भरा गया है, जिससे फिर दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

    रंगूनगर के ग्रामीण नरेश भारती, शिवनंदन मांझी और सतेंद्र मांझी ने बताया कि बोरिंग कार्य पूरा होने के समय ही संवेदक और उसके मुंशी से असफल बोरिंग को भरने का आग्रह किया गया था, लेकिन उनकी ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। इसका खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ा।

    कठौतिया केवल पंचायत में नल जल योजना के तहत कुल 36 बोरिंग कराई गई थीं। इनमें 16 बोरिंग सफल रहीं, जबकि 20 में पानी नहीं निकला। इन सभी अमान्य बोरिंग को भरने के बजाय केवल जूट के बोरे से ढक दिया गया है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    खबरें और भी

    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत ही नहीं, पूरे प्रखंड में पीएचईडी द्वारा कराई गई सभी असफल बोरिंग की जांच कर उन्हें तत्काल भरवाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

    सीओ ने क्या कहा?

    फतेहपुर की अंचलाधिकारी अमिता सिन्हा ने बताया कि पीएचईडी द्वारा किन-किन स्थानों पर बोरिंग कराई गई है तथा कितनी सफल और कितनी असफल रही हैं इसकी जानकारी विभाग ने अंचल कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई है। पूरे क्षेत्र में कराई गई बोरिंग का सर्वे कराने के लिए राजस्व कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है। साथ ही सभी अमान्य बोरिंग को तत्काल भरने का निर्देश भी जारी किया गया है। सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद विभागीय नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह भी पढ़ें- 8 घंटे तक मौत को मात देने वाले पीयूष के 'काले टीके' की कहानी वायरल, हर तरफ हो रही चर्चा

    यह भी पढ़ें- गया: मौत को मात देकर घर लौटा 4 साल का पियूष, बोरवेल में जिंदगी से जंग जीतने के बाद आंगन में लौटी मुस्कान