Swad Bihar Ka: बिहार की पारंपरिक मिठास 'बिरंज', 118 जड़ी-बूटियों से तैयार; बनाने की विधि और सेहत के फायदे
Bihar Famous food बिरंज बिहार की एक पारंपरिक मिठाई है, जो स्वाद और संस्कृति का प्रतीक है। शादी-विवाह में इसका विशेष महत्व है। इसे बासमती चावल, देसी घी ...और पढ़ें

स्वाद, संस्कार, सेहत और अनुष्ठान का अद्भुत संगम
HighLights
बिरंज बिहार की पारंपरिक मिठाई, सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक।
बासमती चावल, देसी घी, 118 जड़ी-बूटियों से तैयार होता है।
पाचन तंत्र मजबूत करता, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है यह व्यंजन।
धीरज कुमार, जहानाबाद। Bihar special food स्वाद, स्वागत, संस्कृति, शुद्धता और मिठास—यही बिहार की पहचान है। इसी परंपरा से निकला ‘बिरंज’ सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। शादी-विवाह जैसे अवसरों पर इसका विशेष महत्व होता है।
शादी समारोहों की शान है बिरंज
गयाजी, जहानाबाद, नवादा, नालंदा, अरवल और औरंगाबाद में यह परंपरा आज भी जीवित है। कई बार बिरंज नहीं मिलने पर बाराती नाराज भी हो जाते हैं। इसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
अनुष्ठानिक प्रक्रिया बनाती है खास
पारंपरिक रूप से इसे बनाने वाले कारीगर उपवास रखते थे और विशेष नियमों का पालन करते थे। जनेऊ धारण करने वाले ही इसे बनाते थे और इसे एक पवित्र अनुष्ठान माना जाता था।
कारीगरों की पीढ़ियों से जुड़ी विरासत
राम मनोहर शर्मा, गोपाल शर्मा, अनिल शर्मा, अरुण शर्मा और भोला शर्मा जैसे कारीगर दशकों से इस परंपरा को निभा रहे हैं। उनके हाथों का स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद है।

सामग्री
- बासमती चावल
- शुद्ध देसी घी
- चीनी
- काजू, बादाम
- किशमिश
- जटामासी
- खस की जड़
- जावित्री
- चंदनधुरा
- सुगंधकोकिला
- गुलाब के फूल
- नागरमोथा
118 जड़ी-बूटियों से बनता है बिरंज
बिरंज में बासमती चावल, देसी घी, चीनी, काजू, बादाम, किशमिश के साथ जटामासी, खस, जावित्री, चंदनधुरा, गुलाब और नागरमोथा जैसी करीब 118 जड़ी-बूटियां डाली जाती हैं, जो इसे खास बनाती हैं।
बिरंज बनाने की पारंपरिक विधि
पहले जड़ी-बूटियों को मिट्टी के बर्तन में घंटों भिगोकर उनका अर्क तैयार किया जाता है। फिर चावल को घी में भूनकर उसमें मेवे मिलाए जाते हैं। इसके बाद जड़ी-बूटियों का अर्क और चीनी डालकर मिश्रण तैयार किया जाता है। इसे मिट्टी के घड़े में 10–12 घंटे तक धीमी आंच पर पकाया जाता है।
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धीमी आंच पर पकने से आता है अनोखा स्वाद
लकड़ी या कोयले की आंच पर पकाना बेहतर माना जाता है। चावल को गलाने और सानने में करीब 3 घंटे लगते हैं। जब बर्तन की मिट्टी में दरार पड़ती है और सुगंध बाहर आती है, तब समझा जाता है कि बिरंज तैयार है।
खाने के फायदे भी हैं भरपूर
बिरंज में उपयोग होने वाली जड़ी-बूटियां पाचन तंत्र को मजबूत करती हैं। सूखे मेवे शरीर को ऊर्जा देते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। खस और जटामासी जैसे तत्व शरीर को ठंडक और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
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परंपरा में बदलाव, लेकिन पहचान कायम
अब इसकी प्रक्रिया में कुछ बदलाव आया है और पहले जैसी सख्ती नहीं रही। बावजूद इसके बिरंज की लोकप्रियता और शान आज भी बरकरार है और इसकी जगह कोई दूसरा व्यंजन नहीं ले पाया है।