जमुई में तालाब खुदाई में मिली 1200 साल पुरानी उमा-महेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा, देखने के लिए उमड़ी भीड़
जमुई के अलीगंज प्रखंड के धनामा गांव में तालाब खुदाई के दौरान 1200 साल पुरानी उमा-महेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा मिली है। इसे देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ ...और पढ़ें
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तालाब खुदाई के दौरान मिली मूर्ति। फोटो जागरण
HighLights
जमुई के धनामा गांव में प्राचीन मूर्ति मिली।
यह उमा-महेश्वर की 1200 साल पुरानी प्रतिमा है।
प्रशासन ने मूर्ति को सुरक्षित कर जांच शुरू की।
संवाद सूत्र, अलीगंज (जमुई)। प्रखंड क्षेत्र के धनामा गांव में तालाब खोदाई के दौरान एक आकर्षक प्राचीन मूर्ति मिलने से इलाके में कौतूहल का माहौल बन गया। मूर्ति मिलने की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
प्रतिमा को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान ग्रामीणों ने मूर्ति को मंदिर में रखकर पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी।
सूचना मिलने पर चंद्रदीप थानाध्यक्ष अरविंद कुमार, अंचलाधिकारी दिवाकर रंजन तथा जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रतिमा की पहचान एवं उसके कालखंड का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
‘उमा-महेश्वर आलिंगन प्रतिमा’
कुछ लोग प्रतिमा को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे भगवान शिव और माता पार्वती की उमा-महेश्वर प्रतिमा मान रहे हैं। प्रतिमा का अवलोकन करने पर भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त स्वरूप स्पष्ट प्रतीत होता है।
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भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल दिखाई दे रहा है, जबकि माता पार्वती उनकी गोद में विराजमान हैं। अंचलाधिकारी ने बताया कि पुरातत्व की भाषा में इसे ‘उमा-महेश्वर आलिंगन प्रतिमा’ कहा जाता है। यह प्रतिमा काले पत्थर से तराशी गई है तथा इसके पीछे सुंदर नक्काशीदार प्रभामंडल बना हुआ है।
1200 साल पुरानी हो सकती है मूर्ति
धनामा गांव के शिक्षाविदों का कहना है कि क्षेत्र में तालाब या खेत की खोदाई के दौरान मिलने वाली इस प्रकार की काली पत्थर की कलात्मक मूर्तियां सामान्यतः पालकाल (आठवीं से बारहवीं शताब्दी) की मानी जाती हैं।
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इस आधार पर प्रतिमा लगभग 900 से 1200 वर्ष पुरानी हो सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2019 में भी गांव में तालाब खोदाई के दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की ऐतिहासिक प्रतिमा मिली थी।
अलीगंज प्रखंड के सहोड़ा, धनामा और शाहपुर समेत कई गांवों में पूर्व में भी प्राचीन मूर्तियां मिल चुकी हैं। इधर, मूर्ति मिलने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।
कई लोगों का कहना है कि प्रतिमा की चमक और कलात्मकता को देखकर इसकी ऐतिहासिक एवं आर्थिक कीमत काफी अधिक हो सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी चिंता जताई कि क्षेत्र के कई धर्मस्थलों और शिवालयों से पूर्व में प्राचीन मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं। चंद्रदीप थानाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि प्रतिमा को सुरक्षित रख दिया गया है तथा वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है।