सीमांचल का देश के बाजारों से हुआ सीधा संपर्क, नई रेललाइन से मक्का की पहली खेप पंजाब रवाना
पौआखाली रेलवे स्टेशन से पहली बार मक्के से लदी मालगाड़ी पंजाब के राजपुरा जंक्शन के लिए रवाना हुई, जिससे सीमांचल के किसानों को राष्ट्रीय बाजार से सीधा ज ...और पढ़ें

मालगाड़ी में मक्के की लदाई। फोटो जागरण
HighLights
पौआखाली से पहली मक्का मालगाड़ी पंजाब के लिए रवाना।
सीमांचल के किसानों को राष्ट्रीय बाजार से सीधा जुड़ाव।
परिवहन लागत में कमी, किसानों को बेहतर मूल्य।
रोहित कुमार, पौआखाली (किशनगंज)। करीब आठ माह पूर्व शुरू हुए अररिया–गलगलिया रेलखंड का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत पौआखाली रेलवे स्टेशन से पहली बार मक्के से लदी एक पूरी मालगाड़ी (रेक) पंजाब के राजपुरा जंक्शन के लिए रवाना की जा रही है।
इस ऐतिहासिक पहल के साथ सीमांचल के कृषि और व्यापारिक क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। खेतों से निकलकर सीधे रेलवे स्टेशन तक पहुंच रही फसल ने किसानों, व्यापारियों और मजदूरों के चेहरों पर नई उम्मीद और उत्साह ला दिया है।
पौआखाली स्टेशन बना कृषि व्यापार का नया केंद्र
मक्का रेक की लोडिंग शुरू होने के बाद पौआखाली रेलवे स्टेशन का नजारा पूरी तरह बदल गया है। स्टेशन परिसर में मक्के से लदे ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। दर्जनों मजदूर लगातार बोरियों को मालगाड़ी के डिब्बों में लोड करने में जुटे हैं।
जो स्टेशन कुछ माह पहले तक अपेक्षाकृत शांत दिखाई देता था, वह अब व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली बार क्षेत्र के किसानों की उपज सीधे रेलमार्ग से देश के बड़े बाजारों तक पहुंच रही है, जिससे कृषि उत्पादों के विपणन में नई संभावनाएं खुली हैं।
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पंजाब के राजपुरा जंक्शन पहुंचेगी पहली खेप
रेलवे अधिकारियों और व्यापारियों के अनुसार, मक्के की यह पहली रेक सीधे पंजाब के राजपुरा जंक्शन भेजी जा रही है। दिल्ली–अमृतसर रेलखंड पर स्थित राजपुरा उत्तर भारत के प्रमुख कृषि एवं औद्योगिक व्यापारिक केंद्रों में शामिल है, जहां मक्के की भारी मांग रहती है। रेल परिवहन के माध्यम से बड़ी मात्रा में मक्का कम समय और कम लागत में गंतव्य तक पहुंच सकेगा।
सीमांचल के किसानों को वर्षों से अपनी उपज बाहर के बाजारों तक पहुंचाने के लिए ट्रकों पर निर्भर रहना पड़ता था। परिवहन लागत अधिक होने और बिचौलियों की भूमिका बढ़ने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था।
अब रेलवे रेक की सुविधा मिलने से किसानों को न केवल परिवहन खर्च में राहत मिलेगी, बल्कि उनकी फसल सीधे बड़े बाजारों तक पहुंच सकेगी। इससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी और कृषि आय में वृद्धि होगी।
क्षेत्र के विकास की दिशा में मील का पत्थर : गोपाल कुमार अग्रवाल
स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने इस उपलब्धि को सीमांचल के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ठाकुरगंज–अररिया रेलखंड वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रहा, लेकिन केंद्र सरकार की पहल से परियोजना को गति मिली और इसका लाभ अब क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों को मिलने लगा है।
उन्होंने कहा कि यह रेलखंड केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि, व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। किसानों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
इससे सीमांचल के कृषि उत्पादों को देश के विभिन्न राज्यों के बाजारों तक पहुंचाने का मार्ग आसान होगा और व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
माल ढुलाई से बढ़ेगा रोजगार
स्टेशन पर माल लोडिंग, अनलोडिंग, भंडारण और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय मजदूरों को नियमित रोजगार मिलने लगा है। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार से परिवहन, गोदाम, पैकेजिंग और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।