मुंगेर में हाईटेक होगा कांवड़िया पथ: 9 जगहों पर लगेंगे RO प्लांट, AI कैमरों से लैस होगा कमराय-कुम्हरसार मार्ग
मुंगेर में श्रावणी मेले के लिए 26 किलोमीटर लंबा कांवरिया पथ आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें एआई आधारित निगरानी और 9 आरओ प्लांट शामिल हैं। ...और पढ़ें
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HighLights
कांवरिया पथ पर एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से निगरानी।
श्रद्धालुओं के लिए 9 आरओ प्लांट और 5 टेंट सिटी की व्यवस्था।
सुरक्षित यात्रा हेतु 24 घंटे मेडिकल टीम और पुलिस बल तैनात।
संवाद सहयोगी, हवेली खड़गपुर (मुंगेर)। श्रावणी मेले में इस बार कमराय से कुम्हरसार तक का 26 किलोमीटर लंबा कांवरिया पथ आस्था के साथ आधुनिक सुविधाओं का भी गवाह बनेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के गृह जिला और विधानसभा क्षेत्र से गुजरने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पहली बार एआई आधारित निगरानी, बेहतर आधारभूत सुविधाओं और तकनीकी प्रबंधन के जरिए यात्रा को अधिक व्यवस्थित बनाने की योजना है।
जिलाधिकारी निखिल निप्पाणीकर ने सभी संबंधित विभागों को 15 से 20 जुलाई के बीच सभी कार्य हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल भीड़ नियंत्रण नहीं, बल्कि कांवरियों को हर कदम पर बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।
कांवड़िया पथ पर चार मीटर चौड़ाई वाला मार्ग तैयार किया जा रहा है, जिस पर दो इंच महीन बालू बिछाई जाएगी, ताकि पैदल चलने में किसी तरह की परेशानी न हो। इस वर्ष तीन के बजाय पांच टेंट सिटी बनाई जा रही हैं।
पीएचईडी की ओर से एक अतिरिक्त टेंट सिटी भी स्थापित की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए नौ स्थानों पर आरओ प्लांट लगाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। खराब चापाकलों की मरम्मत और शौचालयों की सफाई का कार्य भी तेजी से कराया जा रहा है।
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24 घंटे रहेगी मेडिकल टीम
पूरे कांवड़िया पथ की निगरानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से होगी, जिनकी लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जाएगी। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारी तैनात रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस और मेडिकल रिस्पांस टीम चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी।
बारिश को देखते हुए मार्ग की मरम्मत, जलनिकासी और फिसलन रोकने के उपाय भी किए जा रहे हैं। साथ ही निर्बाध बिजली आपूर्ति, अतिक्रमण हटाने और पुल-पुलियों से जुड़े कार्यों को भी समय पर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सभी तैयारियां समय पर धरातल पर उतरती हैं तो लाखों कांवरियों को बड़ी राहत मिलेगी और क्षेत्र की पहचान व छवि भी और मजबूत होगी। श्रद्धालुओं का मानना है कि सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त कांवरिया पथ से बाबा की यात्रा और अधिक सहज व आनंददायक बनेगी।
जिलाधिकारी निखिल निप्पणीकर ने सभी संबंधित विभागों को 15 से 20 जुलाई के बीच हर हाल में सभी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार प्रशासन का लक्ष्य केवल भीड़ प्रबंधन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को हर कदम पर बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।
प्रशासन की योजना के तहत कांवड़िया पथ पर चार मीटर चौड़ा कच्चा मार्ग तैयार किया जा रहा है, जिस पर दो इंच महीन बालू बिछाई जाएगी ताकि कांवरियों को पैदल चलने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। विश्राम की बेहतर व्यवस्था के लिए इस वर्ष तीन के स्थान पर पांच टेंट सिटी बनाई जा रही हैं।
इसके अलावा पीएचईडी की ओर से एक अतिरिक्त टेंट सिटी भी स्थापित की जाएगी। पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नौ स्थानों पर आरओ प्लांट लगाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। खराब पड़े चापाकलों को भी तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं शौचालयों की सफाई और मरम्मत का कार्य तेजी से कराया जा रहा है ताकि स्वच्छता व्यवस्था बनी रहे।
सुरक्षा के मोर्चे पर इस बार विशेष फोकस रहेगा। पूरे कांवड़िया पथ की निगरानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी, जिनकी लाइव मानिटरिंग कंट्रोल रूम से होगी। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती रहेगी, जबकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस और मेडिकल रिस्पांस टीम चौबीसों घंटे तैयार रहेगी।
वर्षा को देखते हुए मार्ग की मरम्मत, जलनिकासी और फिसलन रोकने के उपाय भी प्राथमिकता पर किए जा रहे हैं। निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पावर ग्रिड सब स्टेशन एवं विद्युत केबलों की जांच कराई जा रही है। साथ ही राज्य पथ-22 से अतिक्रमण हटाने और पुल-पुलियों से जुड़े आवश्यक कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि घोषित सभी सुविधाएं समय पर धरातल पर उतरती हैं तो इसका लाभ केवल लाखों कांवरियों को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को मिलेगा। हर वर्ष इस मार्ग से गुजरने वाले श्रद्धालुओं के कारण इलाके की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर होती है। बेहतर व्यवस्थाएं क्षेत्र की सकारात्मक छवि को भी नई मजबूती देंगी।
श्रद्धालु रामकुमार सिंह, कृष्ण कुमार चौरसिया, राकेश सिन्हा, राजा केशरी, जनार्दन साह कहते हैं कि बाबा की यात्रा कठिन हो सकती है, लेकिन अव्यवस्थित नहीं। यदि रास्ते में सुरक्षा, रोशनी, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम जैसी सुविधाएं सहजता से मिलें तो आस्था का यह सफर और अधिक सुखद बन जाएगा।