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    'पापा आप नहीं बने, मैं एक दिन CM बनकर दिखाऊंगा'; सम्राट ने पूरा किया अपना वादा

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 04:30 PM (IST)

    सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर उनके पिता शकुनी चौधरी भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि सम्राट ने बचपन में ही उनसे मुख्यमंत्री बनने का वादा किया था, ...और पढ़ें

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    मनोज मिश्र, तारापुर (मुंगेर)। पिता के लिए इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है कि उसका बेटा उसके अधूरे सपनों को पूरा कर दे। जब बेटे के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा हुई तो पिता शकुनी चौधरी की आंखें नम हो गईं। यह सिर्फ एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, त्याग और संकल्प की जीत की कहानी है।

    भावुक स्वर में शकुनी चौधरी कहते हैं सम्राट में शुरू से ही नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता रही है। वह विरोधियों को भी अपना बना लेता है। उसने हमेशा बड़े लक्ष्य तय किए और उन्हें पाने के लिए दिन-रात मेहनत की। वर्षाें पहले एक दिन उसने मुझसे कहा था ‘पापा, आप मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, लेकिन मैं बनकर दिखाऊंगा।’ आज उसका कहना सच हुआ।

    यह कहानी सिर्फ एक बेटे की सफलता की नहीं, बल्कि उस परिवार की है जिसने राजनीति के कठिन दौर को झेला, अन्याय सहा और फिर भी हार नहीं मानी।

    शकुनी चौधरी अपने अतीत को याद करते हुए बताते हैं कि उनका राजनीतिक संघर्ष आसान नहीं था। उस दौर में उनकी सीधी टक्कर लालू प्रसाद यादव और राजद से थी। वे विपक्ष के मजबूत चेहरा थे, लेकिन राजनीतिक साजिशों और विश्वासघात का सामना करना पड़ा।

    कांग्रेस से मिला धोखा, नाबालिग सम्राट काे भेजा जेल

    वे बताते हैं कि कांग्रेस ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने का वादा किया, लेकिन बाद में यह पद रामाश्रय सिंह को दे दिया गया। इसके बाद राजनीतिक उथल-पुथल का दौर शुरू हुआ। जनता दल के कई सांसद अलग होकर नई राह पर चले और आखिरकार समता पार्टी का गठन हुआ।

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    यह संघर्ष का समय था, जब विरोधियों ने उन्हें और उनके परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की। सबसे पीड़ादायक क्षण वह था जब नाबालिग सम्राट चौधरी को भी एक मामले में आरोपित बनाकर गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन न्याय की जीत हुई और मानवाधिकार की सुनवाई में पूरा परिवार बरी हो गया। सरकार को जुर्माना भी भरना पड़ा।

    यही वह समय था जब सम्राट के मन में राजनीति के प्रति जज्बा पैदा हुआ। शकुनी चौधरी कहते हैं कि उनके बेटे की राजनीतिक यात्रा में उनकी पत्नी यानी सम्राट की मां पार्वती देवी की भूमिका बेहद अहम रही। उप चुनाव में विधायक बनने के बाद उन्हें मंत्री बनने का अवसर मिला, लेकिन उन्होंने खुद मंत्री बनने के बजाय बेटे सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाया। यही त्याग आज फल दे रहा है।

    इसके बाद सम्राट चौधरी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने अलग-अलग दलों में रहते हुए मंत्री पद संभाला और अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई। उनकी सबसे बड़ी ताकत रही सबके साथ बेहतर संबंध और अनुशासन। यही कारण है कि उन्होंने कम समय में ही पार्टी और सरकार में मजबूत स्थान बना लिया।

    बेटा मेरा अनुशासन का करता है पालन

    शकुनी चौधरी बताते हैं कि उनका बेटा आज भी अनुशासन का पालन करता है। वह मेरे सामने बिना कहे बैठता तक नहीं है। गंभीर मामलों में सलाह जरूर लेता है। जब घर पर होता है तो हम सब साथ बैठकर खाना खाते हैं। राजनीतिक बातें कम होती हैं, लेकिन परिवार का रिश्ता मजबूत है।

    आज भले ही सम्राट चौधरी राजनीति के शिखर पर पहुंच चुके हैं, लेकिन उनकी जड़ें जमीन से जुड़ी हुई हैं। परिवार, समाज और राज्य के लोगों के प्रति उनका समर्पण ही उनकी असली ताकत है। पिता को पूरा विश्वास है कि उनका बेटा बिहार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

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