बिहार में हड़ताल पर रहने के बाद भी पंचायत सचिवों ने किया करोड़ों का भुगतान, अब गिरेगी गाज
पंचायत सचिवों की हड़ताल के बावजूद कई जिलों में वित्तीय कार्य किए जाने का खुलासा हुआ है। पंचायती राज विभाग ने ऐसे सभी भुगतानों की जांच और दोषी सचिवों प ...और पढ़ें

बिहार में हड़ताल पर रहने के बाद भी पंचायत सचिवों ने किया करोड़ों का भुगतान (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। विभिन्न मांगों को लेकर राज्य के सभी जिलों के पंचायत सचिव हड़ताल पर हैं। इसके बाद भी इस अवधि में कई जिलों में इनके द्वारा किए गए कार्यों पर सवाल उठना शुरू हो गया है। पंचायती राज विभाग ने यह गड़बड़ी पकड़ी है।
विभाग के सचिव ने बेगूसराय को छोड़ सभी राज्य के सभी डीएम को इससे अवगत कराया है। हड़ताल अवधि में पंचायत सचिवों ने जहां-जहां वित्तीय कार्य किए हैं उन सभी योजनाओं की जांच करने को कहा है। यही नहीं करोड़ों का भुगतान भी किया गया है। अब ये सभी योजना सवालों के घेरे में है।
सचिव ने बताया आठ अप्रैल से सभी पंचायत सचिव हड़ताल पर हैं। इस दौरान कुछ पंचायत सचिवों ने ई-पंचायत बिहार ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर डीएससी साइन करते हुए भुगतान व वित्तीय कार्य किए। हड़ताल में रहते हुए इस प्रकार का कार्य उनकी गलत मानसिकता दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि साथ ही यह व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के दृष्टिकोण से किया प्रतीत हो रहा है। उन सभी योजनाओं की जांच कर ऐसे पंचायत सचिवों को चिह्नित करते हुए बिहार सरकारी सेवक नियमावली 2005 के तहत अनुशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाए।
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अनधिकृत रूप से अनुपस्थित व हड़ताल पर गए सभी पंचायत सचिवों को अविलंब डोंगल प्राप्त कर इसे प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारियों के पास जमा कराया जाए, ताकि इनके द्वारा किए जा रहे वित्तीय कार्यों पर रोक लगे।
विदित हो कि गृह जिला में स्थानांतरण व 42 सौ ग्रेड पे करने समेत अन्य मांगों को लेकर पंचायत सचिव हड़ताल पर हैं।
जिले की 85 पंचायतों में ढाई करोड़ से अधिक का भुगतान:
विभाग की ओर से जिलों को हड़ताल अवधि में वित्तीय कार्य करने वाले पंचायत सचिवों की सूची भी भेजी गई है। इसके अनुसार, मुजफ्फरपुर की 85 पंचायतों के पंचायत सचिवों ने ढाई करोड़ से अधिक का भुगतान किया है। इन सभी योजनाओं की जांच होगी।
इसमें मीनापुर, मुशहरी, पारू, साहेबगंज, सकरा, सरैया, बरूराज, बोचहां, कांटी, कुढ़नी, मड़वन व औराई प्रखंड के पंचायत सचिवों ने वित्तीय कार्य किए हैं। 14 से 21 अप्रैल के बीच भुगतान किया गया है। इसके अलावा मधुबनी, मुंगेर व नालंदा भी इस सूची में शामिल है।