जीविका समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल: पोल्ट्री योजना के तहत बांटे गए चूजे, दूसरे चरण में 100 सदस्यों को लाभ
एकंगरसराय प्रखंड के तेल्हाड़ा पंचायत में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की एकीकृत पोल्ट्री विकास योजना लागू की ग ...और पढ़ें
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तेल्हारा में पोल्ट्री योजना के तहत चूजों का वितरण। (AI Generated Image)

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संवाद सूत्र, तेल्हाडा (नालंदा)। एकंगरसराय प्रखंड के तेल्हाडा पंचायत में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार की राज्य योजना “एकीकृत पोल्ट्री विकास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
इस योजना के अंतर्गत जीविका से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को 28 दिन के 45-45 चूजों का वितरण किया जा रहा है। दूसरे चरण में कुल 100 सदस्यों को इसका लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
तेल्हाड़ा स्थित पोल्ट्री मदर यूनिट में इस योजना को सफल बनाने के लिए वर्तमान में 2225 चूजों का पालन-पोषण किया जा रहा है। इससे पूर्व नवंबर माह में पहले चरण के तहत 2550 चूजों का वितरण किया गया था, जिससे लाभुक महिलाओं में उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिला है।
योजना से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि स्वरोजगार के नए अवसर भी उनके लिए खुल रहे हैं। योजना की प्रगति का जायजा लेने के लिए प्रखंड परियोजना प्रबंधक अनिल कुमार सिंह, जीविकोपार्जन विशेषज्ञ प्रेमचंद प्रसाद, क्षेत्रीय समन्वयक बिनीता राज एवं सामुदायिक समन्वयक शोभा कुमारी ने पोल्ट्री यूनिट का निरीक्षण किया।
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अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए कहा कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ महिलाओं की आय में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।
वहीं, लाभुक महिलाओं ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की योजनाओं से स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।