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    बांकीपुर उपचुनाव में दरका 'MY' समीकरण, प्रशांत किशोर की सेंधमारी ने बढ़ाई तेजस्वी की टेंशन

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 09:32 PM (IST)

    बांकीपुर उपचुनाव में राजद के पारंपरिक MY समीकरण में सेंध लगी है, जिससे तेजस्वी यादव की चुनौतियां बढ़ी हैं। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भाजपा औ ...और पढ़ें

    बांकीपुर उपचुनाव में दरका 'MY' समीकरण, प्रशांत किशोर की सेंधमारी ने बढ़ाई तेजस्वी की टेंशन

    बांकीपुर उपचुनाव में दरका 'MY' समीकरण, प्रशांत किशोर की सेंधमारी ने बढ़ाई तेजस्वी की टेंशन

    HighLights

    1. बांकीपुर उपचुनाव में राजद का MY समीकरण कमजोर पड़ा।

    2. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने निर्णायक जीत हासिल की।

    3. तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल, राजद को नई चुनौती।

    विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। बांकीपुर उपचुनाव परिणाम (Bankipur Byelection Result) के मूल निहितार्थ दो ही हैं। पहला, दलीय जनाधार का टूटना-जुड़ना और दूसरा, युवा मतदाताओं का मोहभंग, जो सत्ता पक्ष और विपक्ष के साथ बराबर का रहा। इसीलिए यह परिणाम राजद के लिए भी उतना ही अधिक त्रासद है, जितना कि भाजपा के लिए।

    उपचुनाव में राजद की सफलता का ग्राफ वैसे भी कभी अच्छा नहीं रहा, लेकिन इस झटके से उबरना सहज नहीं, क्योंकि इसने सत्ता को सशक्त चुनौती देने वाले एक विकल्प की संभावना बढ़ा दी है। यह विकल्प युवाओं को पहले भी सुहा रहा था और अब तो मुसलमान भी रिझ रहे।

    बांकीपुर कभी राजद के लिए अनुकूल नहीं रहा। फिर भी 2025 मेंं कांग्रेस को धकिया कर वह दांव आजमाने उतरा, तो माय के साथ उन वैश्यों के भरोसे, जो सवर्ण मतदाताओं की तरह यहां निर्णायक हैसियत वाले हैं। दाल तब भी नहीं गली, लेकिन मुकाबला प्रतिष्ठा लायक रहा था।

    इस बार तो राजद को उतने भी वोट नहीं मिले, जितने अंतर (19324 मत) से जीत-हार का निर्णय हुआ, जबकि प्रचार के आखिरी दो दिन यहां कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रोड-शो भी किए।

    बांकीपुर में वह उनका पहला रोड-शो था। इसके बावजूद उन इलाकों में भी राजद पीछे ही रहा, जहां की जनसंख्या मेंं उसके जनाधार (मुसलमान-यादव यानी माय समीकरण) का बोलबाला है। वे इलाके मंदिरी, सब्जीबाग, बाकरगंज, लोदीपुर, करबिगहिया, गोरिया टोली, लोहानीपुर आदि हैं।

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    दरअसल, भाजपा के लिए प्रतिबद्ध मतदाताओं (सवर्ण और वैश्य) के साथ राजद के जनाधार में सेंध लगाकर ही जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने अपनी जीत की राह निकाली। ऐन चुनाव के बीच हुए जेन-जी के आंदोलन ने उनकी राह को प्रशस्त कर दिया। अब यह जीत क्रमवत रहेगी या नहीं, इसे भविष्य के निर्णय पर छोड़ दिया जाए।

    बहरहाल, बांकीपुर ने इतना तो बता ही दिया है कि माय पर अब राजद का एकाधिकार नहीं रहा। माय की मजबूती के लिए जिस बाप (बहुजन-अगड़ा-अति पिछड़ा) पर तेजस्वी डोरे डालते रहे हैं, वह पहले की तरह आज भी बिदका हुआ है। प्रत्याशी रेखा गुप्ता के मोहल्ले ने भी राजद के पिछड़ जाने से इसकी पुष्टि हो जा रही।

    जमानत जब्त: राजद को 2025 में वैध मतों में 29.55 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिली थी। इस बार मात्र 10.95 प्रतिशत। जमानत तक नहीं बची, क्योंकि यह वैध मतों के छठे हिस्से से भी कम है।

    उपचुनाव का फलाफल: 2020 के बाद तारापुर, कुशेश्वरस्थान, कुढ़नी, बोचहा, रूपौली, गोपालगंज, रामगढ़, तरारी, बेलागंज, इमामगंज विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हुआ। उनमें तीन सीटें (कुढ़नी, रामगढ़, बेलागंज) राजद की थीं, जहां वह हार गया। एकमात्र बोचहां को वह झटक पाया, जो एनडीए की सीट थी। 2025 के बाद अभी तक एकमात्र बांकीपुर में उपचुनाव हुआ है।

    तेजस्वी के लिए चुनौती:

    1. विधानसभा चुनाव में करारी पराजय के बाद स्वयं को सिद्ध करने के लिए यह पहला अवसर था, लेकिन तेजस्वी चुनाव के बीच यूरोप घूमते रहे।
    2. महागठबंधन में नेतृत्व पर जो प्रश्न कल तक मौन था, वह अब मुखर होगा। कांग्रेस की शिकायत है कि उसे प्रचार हेतु नहीं बुलाया गया।
    3. पार्टी के भीतर से रुख-रवैये पर आवाज उठेगी। भाई वीरेंद्र ने संकेत दे दिया है। ऐसे में लालू के निकटस्थ दिग्गजों की बात माननी होगी।

    राजद के लिए चुनौती:

    1. मुसलमान भाजपा को पराजित करने में सक्षम प्रत्याशी के पक्ष में गोलबंद हो रहे। सीमांचल ने यह संकेत विधानसभा चुनाव में ही दिया था। बांकीपुर ने उसे दोहराया।
    2. कांग्रेस के किनारा करने की आशंका अधिक है। उसकी रीति-नीति के लिए प्रशांत किशोर अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल हैं।
    3. मोल-जोल की क्षमता कमजोर होगी। वीआईपी, आईआईपी मनमानी करेंगे। ऐेसे में वाम दलों की शर्तों पर झुकना होगा।

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