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    बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर पर बंट गया NDA, विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष के नेताओं ने जताया विरोध 

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 07:49 PM (IST)

    भोजपुर के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले पर एनडीए में फूट पड़ गई है। सत्तारूढ़ दलों के नेताओं ने विपक्ष से अधिक विरोध किया, जिससे गठबं ...और पढ़ें

    भरत तिवारी एनकाउंटर। फाइल फोटो

    भरत तिवारी एनकाउंटर। फाइल फोटो

    HighLights

    1. भरत तिवारी एनकाउंटर पर एनडीए में दिखी फूट।

    2. सत्ता पक्ष के नेताओं ने पुलिस कार्रवाई का किया विरोध।

    3. जीतन राम मांझी ने एनकाउंटर को बताया उचित।

    राज्य ब्यूरो, पटना। भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर कांड में एनडीए के कई रंग नजर आए। पहली बार ऐसा हुआ जब सरकार की किसी कार्रवाई का विपक्ष ने कम और सत्तारूढ़ दलों ने अधिक विरोध किया।

    राज्य में एनडीए के पांच घटक दल हैं। इस मामले में सभी दलों की एक राय नहीं बन पाई। वोट की राजनीति का असर है या घटक दलों का असंतोष, इस प्रकरण ने एनडीए की एकजुटता की धारणा को बुरी तरह खंडित कर दिया है।

    जैसे ही 16 जून को एनकाउंटर हुआ। भाजपा नेता और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ऋृतुराज सिन्हा की त्वरित प्रतिक्रिया आई। इन तीनों ने पुलिस कार्रवाई की निन्दा की, लेकिन यह भरोसा भी जताया कि सम्राट चौधरी की सरकार दोषियों को जरूर दंडित करेगी।

    एनकाउंटर बंटे नेता 

    अश्विनी चौबे ने तो बिलौटी गांव जाकर पुलिस के विरुद्ध मोर्चा ही खोल दिया। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा ने एनकाउंटर को सेदेहास्पद बताया।

    इस कांड की न्यायिक जांच की घोषणा के बाद एनडीए के अधिसंख्य नेताओं ने अपना मोर्चा बंद कर दिया, लेकिन हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी का मोर्चा आज तक खुला हुआ है।

    मांझी लगातार एनकाउंटर को उचित बता रहे हैं। उनका कहना है कि परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं कि पुलिस के पास भरत तिवारी पर गोली चलाने का ही विकल्प रह गया था। संजय झा एक बार बोल कर चुप लगा गए।

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    उधर, उनकी पार्टी के दो मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा पुलिस के पक्ष में, तो अशाेक चौधरी विपक्ष में खड़े हो गए। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने सरकार पर टिप्पणी किए बिना जांच की मांग की।

    राजद ने नहीं की कास्ट पॉलिटिक्स 

    दिलचस्प यह है कि इस प्रकरण को अगड़े-पिछड़े के विवाद के रूप में चिन्हित करने की पहल मुख्य विपक्षी दल राजद की ओर से कभी नहीं की गई। भाजपा नेता और पूर्व मंत्री नागमणि कुशवाहा ने इसे अगड़ा-पिछड़ा विवाद बनाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन आम लोगों का समर्थन नहीं मिलने के कारण विवाद को आगे नहीं बढ़ा नहीं पाए।

    बिलौटी एनकाउंटर के अंतिम दृश्य में लोजपा रा के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का प्रवेश हुआ। वे शुक्रवार को इस बिलौटी पहुंचे। भरत तिवारी की मां के आंसू पोछे। कहा कि अगर भरत तिवारी ने आत्मसर्मण कर दिया था तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी। मारना नहीं चाहिए था।

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