बिहार के कोचिंग सेंटरों के लिए नियम तैयार: अब नहीं चलेंगे 'रैंक-1' के झूठे दावे, MCC न मानने पर लगेगा ताला
बिहार सरकार कोचिंग संस्थानों पर लगाम लगाने के लिए नया कानून ला रही है। इसके तहत भ्रामक विज्ञापनों और सफलता की गारंटी जैसे दावों पर रोक लगेगी, साथ ही स ...और पढ़ें

बिहार में कोचिंग के लिए नए नियम तैयार। फाइल फोटो

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राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में नया कोचिंग कानून लागू होगा। नये कानून के लागू होने के बाद कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर रोक लगेगी। कोचिंग संस्थान सफलता की गारंटी जैसे दावे भी नहीं कर पायेंगे। बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) प्राधिकरण का गठन होगा।
दरअसल, राजधानी पटना में मंगलवार को चर्चित खान सर कोचिंग संस्थान में हुई तोड़फोड़ की घटना के बाद बिहार सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि इस घटना को गंभीरता से लिया है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
कोचिंग संस्थान के मानक होंगे तय
राज्य सरकार जल्द ही कोचिंग संस्थानों के लिए नई नीति और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू करने जा रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कोचिंग कानून के लिए बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2026 लाया जाएगा। उसका ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। ड्राफ्ट में भ्रामक विज्ञापनों पर भी रोक लगाने का प्रविधान है।
कोचिंग संस्थान रैंक, चयन या सफलता की गारंटी जैसे दावे नहीं कर सकेंगे। गलत विज्ञापन देने पर कार्रवाई की जायेगी। प्रदर्शन के आधार पर बैच विभाजन नहीं होगा। परिणामों का भ्रामक प्रचार नहीं करना होगा।
ड्राफ्ट में कोचिंग संस्थानों के लिए बुनियादी सुविधाओं के मानक भी तय किये गये हैं। प्रत्येक छात्र के लिए न्यूनतम जगह, अग्निशमन प्रमाणपत्र, शुद्ध पेयजल, अलग शौचालय, CCTV कैमरा, प्राथमिक उपचार और दिव्यांग अनुकूल व्यवस्था अनिवार्य होगी।
प्रस्तावित कानून के तहत सभी कोचिंग संस्थानों को तीन माह में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। 24 घंटे शिकायत व्यवस्था और निरीक्षण की व्यवस्था होगी।
नए प्राधिकरण का होगा गठन
उन्होंने कहा कि बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) प्राधिकरण का गठन होगा। इसके अध्यक्ष शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव होंगे।
प्राधिकरण में डीजीपी या उनके प्रतिनिधि, शिक्षा विभाग सचिव, उच्च शिक्षा सचिव, स्वास्थ्य विभाग सचिव, समाज कल्याण विभाग सचिव, कौशल विकास विभाग सचिव, माध्यमिक शिक्षा निदेशक, प्राथमिक शिक्षा निदेशक और एससीइआरटी निदेशक को शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा वित्त विभाग के अधिकारी, कोचिंग संस्थानों के दो प्रतिनिधि और अभिभावकों के पांच प्रतिनिधियों को भी सदस्य बनाया जाएगा। गैर-सरकारी सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष का होगा। प्रस्तावित कानून के तहत प्रत्येक जिले में जिला समिति गठित की जाएगी।
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प्राधिकरण छात्रों की शिकायतों के लिए कॉल सेंटर स्थापित कर सकेगा। ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित किया जाएगा, जहां पंजीकरण, शिकायत और निगरानी की प्रक्रिया संचालित होगी।
प्राधिकरण और जिला समिति को निरीक्षण, जांच और रिकॉर्ड जांचने की शक्ति भी दी गयी है। उन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां प्राप्त होंगी। राज्य स्तर पर प्राधिकरण भी बनेगा।
पुलिस महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट तलब
उन्होंने कहा कि कोचिंग संचालकों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की गंदी होड़ लगी हुई है, लेकिन सरकार इस तरह की गुंडागर्दी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
पूरे मामले में पुलिस महानिदेशक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। उन्होंने कहा कि कई बार यह देखा गया है कि छात्र आंदोलनों के पीछे कोचिंग संचालकों की मुख्य भूमिका होती है, जो सरकार के खिलाफ छात्रों को भड़काने का काम करते हैं।
हाल ही में हुए टीआरई-चार शिक्षक भर्ती आंदोलन के दौरान भी यह साफ देखा गया कि छात्रों की आड़ में सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की गई थी।
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