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    बंगाल हिंसा पर बिहार में सियासत: अभिषेक पर हमले की मुकेश सहनी ने की निंदा, मंगल पांडेय ने दिया ये बयान

    Updated: Sun, 31 May 2026 11:49 PM (GMT+05:30)

    मंगल पांडेय ने बंगाल में भाजपा सरकार के गठन को तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार और हिंसा के अंत का शंखनाद बताया। मुकेश सहनी ने अभिषेक बनर्जी पर हमले की निंदा करत ...और पढ़ें

    मुकेश सहनी और मंगल पांडेय। फाइल फोटो

    मुकेश सहनी और मंगल पांडेय। फाइल फोटो

    HighLights

    1. मंगल पांडेय ने बंगाल में भाजपा सरकार गठन को सराहा।

    2. टीएमसी शासन को भ्रष्टाचार और हिंसा का पर्याय बताया।

    3. मुकेश सहनी ने अभिषेक बनर्जी पर हमले की निंदा की।

    राज्य ब्यूरो, पटना। पूर्व मंत्री व बंगाल भाजपा प्रभारी मंगल पांडेय ने कहा कि बंगाल की पावन धरती पर लोकतंत्र की एक नई सुबह हुई है। जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी के सशक्त नेतृत्व में नई सरकार का गठन किया है।

    उन्होंने कहा कि यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार एवं हिंसा की राजनीति के अंत तथा राज्य के नव-निर्माण का शंखनाद है। भाजपा सरकार बनते ही तृणमूल कांग्रेस के कई निर्वाचित जनप्रतिनिधि टीएमसी छोड़ रहे हैं। यह पलायन नहीं, यह बंगाल की जनता की भावना का प्रकटीकरण है। जिन जनप्रतिनिधियों ने सालों तक घुटन में काम किया, वे आज खुलकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

    TMC ने युवाओं के भविष्य को अंधकार में डाला 

    पांडेय ने कहा कि 2011 से 2026 तक टीएमसी शासन ने बंगाल को केवल नारों, घोटालों और भय के माहौल में जकड़ कर रखा था। शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला घोटाला, पशु तस्करी, नगरपालिका भर्ती घोटाला और ‘कट-मनी’ संस्कृति ने युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय कर दिया था।

    पंचायत चुनावों में लोकतंत्र की हत्या और राजनीतिक विरोधियों की टारगेट किलिंग ने बंगाल के माथे पर कलंक लगाया। सभी भर्ती परीक्षाएं अब पारदर्शी प्रक्रिया और सीसीटीवी निगरानी में हो रही हैं। पिछली सरकार के घोटालों की जांच तेज कर दी गई है।

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    अभिषेक बनर्जी पर हमले की घटना लोकतंत्र पर हमला : मुकेश सहनी

    विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के संस्थापकव पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ हुई मारपीट की घटना की कड़ी निंदा की है।
     
    उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा और मारपीट का कोई स्थान नहीं है।
     
    सहनी ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि देश का लोकतंत्र विचारों की विविधता और स्वस्थ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। यदि राजनीतिक विरोधियों को डराने, धमकाने या उन पर शारीरिक हमला करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जाएगा, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी।
     
    उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक कार्यकर्ता पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था पर भी हमला माना जाना चाहिए।
     
    भाजपा को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और अपने कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों पर अंकुश लगाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का चाल, चलन और चेहरा लगातार असहिष्णु राजनीति को बढ़ावा देने वाला दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विरोधियों के प्रति आक्रामक रवैया लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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