14 या 15 फरवरी, कब है महाशिवरात्रि? पंडित जी ने बताई सही तारीख
इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को उत्तराषाढ़ा, व्यतिपात और सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी। श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना ...और पढ़ें

उत्तराषाढ़ा व सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी महाशिवरात्रि

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, पटना। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी (Mahashivratri Date 2026) को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, व्यतिपात योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि के दिन सुबह से लेकर रात 7:40 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद भगवान शिव को प्रिय श्रवण नक्षत्र का संयोग बनेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि ऐसे शुभ योग और मुहूर्त में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की विधिवत पूजा-आराधना करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
उन्होंने बताया कि इस दिन सूर्य और शनि पिता-पुत्र हैं। एक ही राशि कुंभ में स्थित रहेंगे। इस योग में भगवत साधना करने से आध्यात्मिक और धार्मिक उन्नति होती है।
मंदिरों में दिनभर होगा जलाभिषेक
महाशिवरात्रि पर शहर के सभी मंदिरों और शिवालयों सुबह से लेकर पूरे दिन जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाएगा। वहीं, संध्या बेला में भव्य शिव श्रृंगार होगा।
श्रद्धालु गंगाजल, दूध, दही, घी, मधु, पंचामृत, चंदन, भस्म, फूलमाला, बेलपत्र, धतूरा और भांग आदि से भगवान शिव की पूजा करेंगे। इस दिन नर्मदेश्वर शिवलिंग, स्फटिक शिवलिंग और पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष विधान है।
राकेश झा ने ईशान संहिता का हवाला देते हुए बताया कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की मध्यरात्रि में आदिदेव भगवान शिव लिंगरूप में प्रकट हुए थे। इस रात्रि में भगवान शिव ने सृष्टि के संरक्षण और संहार का सृजन किया।
शिव को अर्पित वस्तुओं का महत्व
- गंगाजल: मानसिक अशांति से मुक्ति
- दूध: उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
- दही: जीवन में स्थिरता और गंभीरता
- घी: पौरुष, बल, बुद्धि और विवेक में वृद्धि
- मधु: वाणी में मधुरता
- गुड़: दुख, कष्ट और दरिद्रता का नाश
- इत्र: मन, कर्म और विचारों की पवित्रता
- केसर: यश, वैभव और सौम्यता
- भांग: रोग-शोक और नकारात्मक ऊर्जा का नाश
- चंदन: मान-सम्मान और यश-कीर्ति में वृद्धि
- बिल्वपत्र: चल-अचल संपत्ति की प्राप्ति
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