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    जीविका दीदियों पर आरोप लगाकर घिरे प्रशांत किशोर, बीजेपी ने कहा- हार के डर से महिलाओं का कर रहे अपमान

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 10:42 PM (IST)

    राजग नेताओं ने प्रशांत किशोर पर चुनाव आयोग, धनबल और जीविका दीदियों पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि पीके भ्रम फैला रहे हैं और जीविक ...और पढ़ें

    प्रशांत किशोर और रवि शंकर। फाइल फोटो

    प्रशांत किशोर और रवि शंकर। फाइल फोटो

    HighLights

    1. राजग ने प्रशांत किशोर के जीविका दीदियों पर आरोपों की निंदा की।

    2. पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पीके के आरोपों को बेबुनियाद बताया।

    3. जदयू ने जीविका दीदियों पर टिप्पणी को महिलाओं के सम्मान पर हमला बताया।

    राज्य ब्यूरो, पटना। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं ने रविवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में संयुक्त प्रेसवार्ता कर जन सुराज पार्टी (जसुपा) के प्रशांत किशोर को घेरा।

    पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है, लेकिन राजनीतिक मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर (पीके) चुनाव से पहले ही हार की आशंका से चुनाव आयोग, धनबल और प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि पीके द्वारा जीविका दीदियों पर लगाए गए आरोप बिहार की महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हैं। विपक्ष केवल भ्रम और बेबुनियाद आरोपों की राजनीति कर रहा है।

    ‎‎जदयू के मुख्य प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने जीविका दीदियों पर टिप्पणी दलित, अति पिछड़ा और पिछड़ा समाज की महिलाओं के सम्मान पर हमला है। पीके अनर्गल आरोप लगा रहे हैं, अगर नहीं कहा तो वे माफी मांगे।

    धरना के अलावा कोई उपाय नहीं 

    उन्होंने पूछा कि क्या जीविका समूह से जुड़ना गुनाह है? मतदाता जागरूकता अभियान चलाना गलत है? जीविका दीदीयां तो वोट बढ़ाने को प्रेरित कर रही हैं। वे परेशान हैं। जनता को बरगला रहे हैं।

    विधान पार्षद नवल किशोर यादव ने कहा कि विपक्ष भ्रम फैलाने और दुष्प्रचार की राजनीति कर रहा है, लेकिन जनता सब समझ रही है। जीविका दीदी के बहाने महिलाओं को अपमानित किया जा रहा है। उनके पास धरना देने के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं है।

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    उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन की चिंता करने वालों के पास जनाधार नहीं है। जिसका कोई जनाधार नहीं है, वे लोगों को बुला रहे हैं। उनकी बातों पर हम ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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