बिहार में दौड़ेगी रैपिड ट्रेन, पटना से आरा, गया और बेगूसराय के लिए बनेंगे 4 हाई-स्पीड कॉरिडोर
पटना पर आबादी का दबाव कम करने के लिए बिहार सरकार ने रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। मंत्रिमंडल ने चार आरआरटीएस कॉ ...और पढ़ें

बिहार में दौड़ेगी रैपिड ट्रेन, पटना से एक घंटे में पहुंचेंगे कई शहर (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, पटना। राजधानी पटना में प्रतिदिन हर दिन नौकरी, पढ़ाई, इलाज, व्यापार और सरकारी कामकाज के लिए लोगों का आना-जाना होता है, जबकि शहर पहले से अबादी के बोझ तले दबा है। नौकरी पेशा लोगों की मजबूरी है कि उन्हें पटना में स्थायी निवास बनाना पड़ता है या फिर किराये में रहना होता है।
पटना पर आबादी के दबाव को कम करने की इस चुनौती का स्थायी समाधान खोजने के लिए बिहार सरकार ने रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) की दिशा में कदम उठा दिए हैं।
शुरू होगी हाई-स्पीड रेल आधारित ट्रांजिट सेवा
आरआरटीएस एक सेमी-हाई-स्पीड रेल आधारित ट्रांजिट सेवा है, जिसे एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन टासंपोर्ट कॉरपोरेशन) द्वारा संचालित किया जाता है। आरआरटीएस सामान्य रेल या मेट्रो से अलग व्यवस्था है। यह लंबी दूरी के लिए तेज रफ्तार वाली क्षेत्रीय परिवहन सेवा होती है।
इसकी ट्रेनें आमतौर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की अधिकतम गति या फिर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार से चल सकती हैं।
इससे 80 से 120 किलोमीटर की दूरी भी घंटे भर में पूरी हो सकती है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सरकार का प्रयास है कि पटना से भी चयनित शहरों के बीच ऐसी ही सेवा शुरू हो सके।
पटना के आसपास के शहरों को मिलेगा लाभ
सरकार जिन चार कॉरिडोर का अध्ययन करा रही है, उनमें पटना से उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम दिशा के प्रमुख शहर शामिल होंगे। इनमें सोनपुर, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, फतुहा, बख्तियारपुर, बरौनी, बेगूसराय, बिहटा, आरा, मसौढ़ी, जहानाबाद और गया जैसे शहर प्रमुख पड़ाव बन सकते हैं।
खबरें और भी
इन शहरों और उनके आसपास के क्षेत्रों की आबादी लाखों में है। नगर विकास एवं आवास विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस योजना से करीब 20-25 लाख की आबादी को फायदा होगा। साथ ही पटना के नजदीक होने के कारण इन क्षेत्रों का भी विकास होगा।
डीपीआर में इन बातों पर सर्वाधिक रहेगा जोर
एनसीआरटीसी सबसे पहले यह अध्ययन करेगी कि किन मार्गों पर यात्रियों की संख्या सबसे अधिक है और कहां आरआरटीएस सबसे अधिक उपयोगी रहेगा।
इसके बाद संभावित रूट, स्टेशन, यात्री संख्या, लागत, भूमि की आवश्यकता, निर्माण तकनीक, वित्तीय मॉडल और परियोजना की व्यवहार्यता तय की जाएगी।
साथ ही यह भी देखा जाएगा कि आरआरटीएस को रेलवे, बस अड्डों, मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से कैसे जोड़ा जाए ताकि यात्रियों को एकीकृत परिवहन व्यवस्था मिल सके।
परियोजना प्रारंभ होने से क्या बदल जाएगा
परियोजना लागू होती है तो पटना में रहने की मजबूरी काफी हद तक कम हो सकती है। लोग मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, बिहारशरीफ, आरा या अन्य प्रमुख शहरों में रहकर भी रोजाना एक घंटे के भीतर पटना आ-जा सकेंगे।
इससे राजधानी में जनसंख्या और ट्रैफिक का दबाव घटेगा, आसपास के शहरों में आवास, उद्योग और व्यापार का विस्तार होगा तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिहार में भविष्य की शहरी और आर्थिक वृद्धि की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना साबित हो सकती है।
बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में पटना से जुड़े चार रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के लिए अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट (एएआर) और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है।
यह काम एनसीआरटीसी को दिया गया है। रैपिड ट्रांजिट के लिए जिन्हें प्रमुख कॉरिडोर बनाने की बात है उसमें पटना-गया, पटना एयरपोर्ट-बेगूसराय, पटना-हाजीपुर-प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट- मुजफ्फरपुर और पटना एयरपोर्ट-आरा हैं।
यह भी पढ़ें- बिहार में दौड़ेगी रैपिड रेल, मगर बक्सर का कटा पत्ता; पटना-आरा कॉरिडोर के विस्तार की उठी मांग
यह भी पढ़ें- '60 मिनट में पटना से मुजफ्फरपुर': बिहार में रफ्तार की नई क्रांति, 160 KM की स्पीड से दौड़ेगी रैपिड ट्रेन