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    समस्तीपुर में मानसून ने छोड़ा साथ: सिंचाई व्यवस्था भी बेपटरी, 377 में 129 सरकारी नलकूप बंद

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 03:32 PM (IST)

    समस्तीपुर में कमजोर मानसून और सरकारी सिंचाई व्यवस्था की विफलता से किसान चिंतित हैं, जिससे खेतों में नमी खत्म हो रही है और धान की बुआई प्रभावित हो रही ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. समस्तीपुर में कमजोर मानसून से किसान परेशान।

    2. 129 सरकारी नलकूप बंद, सिंचाई व्यवस्था बेपटरी।

    3. धान सहित खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित।

    जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। जिले में कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से जहां खेतों में नमी खत्म होती जा रही है, वहीं सरकारी सिंचाई व्यवस्था भी किसानों को राहत देने में नाकाम साबित हो रही है।

    हालात यह हैं कि जिले के 377 सरकारी नलकूपों में से 129 बंद पड़े हैं, जबकि चार पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को महंगे डीजल पंप और निजी नलकूपों के भरोसे सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।

    जिले में खरीफ मौसम की सबसे प्रमुख फसल धान की खेती लगभग 78 हजार हेक्टेयर में होती है, लेकिन बारिश की कमी के कारण अब तक मात्र 150 हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान का बिचड़ा डाला जा सका है।

    खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से बिचड़े सूखने लगे हैं और अधिकांश क्षेत्रों में धान की रोपनी शुरू ही नहीं हो सकी है। कुछ किसान पंपसेट से पानी निकालकर रोपनी कर रहे हैं, लेकिन बढ़ते डीजल और बिजली खर्च ने उनकी आर्थिक चिंता और बढ़ा दी है।

    मौसम के आंकड़े भी किसानों की परेशानी की पुष्टि कर रहे हैं। जून माह के अंत तक जिले में केवल 49.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 153.8 मिलीमीटर होती है। यानी जून में 104.3 मिलीमीटर कम बारिश हुई।

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    जुलाई की शुरुआत भी राहत देने वाली नहीं रही और अब तक मात्र 18.8 मिलीमीटर वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। बारिश की कमी से खेतों की ऊपरी सतह सूख गई है और खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है।

    सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 377 सरकारी नलकूप स्थापित हैं। इनमें केवल 244 ही चालू अवस्था में हैं, जबकि 129 नलकूप बंद पड़े हैं और चार पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।

    दूसरी ओर जिले में करीब 30,165 निजी नलकूप हैं, जिनके सहारे किसान किसी तरह फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि निजी सिंचाई व्यवस्था छोटे और सीमांत किसानों के लिए काफी महंगी साबित हो रही है।

    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई और बंद पड़े सरकारी नलकूपों को चालू नहीं कराया गया तो धान के साथ-साथ मक्का, बाजरा, अरहर और उड़द जैसी खरीफ फसलों की बुआई भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

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