सारण: दरियापुर का टायर कारखाना बना रोजगार का केंद्र, पंजाब-हरियाणा की ओर होने वाले पलायन पर लगेगा ब्रेक
दरियापुर के शीतलपुर में सेंट्रो इंडस्ट्रियल टायर कारखाने ने उत्पादन शुरू कर सारण जिले में रोजगार और औद्योगिक विकास की नई उम्मीदें जगाई हैं। ...और पढ़ें
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कारखाने में मशीन पर काम करते कुशल श्रमिक
HighLights
सेंट्रो इंडस्ट्रियल टायर कारखाने में उत्पादन शुरू, रोजगार सृजन।
प्रतिदिन 1000 टायर उत्पादन, साइकिल और ठेला टायर शामिल।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती, पलायन में कमी की उम्मीद।
दिनेश चंद्र द्विवेदी, दरियापुर (सारण)। दरियापुर प्रखंड के शीतलपुर बिजली ग्रिड के समीप हाजीपुर-छपरा फोरलेन एनएच-19 के किनारे स्थापित सेंट्रो इंडस्ट्रियल टायर कारखाना क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं लेकर आया है।
लंबे इंतजार के बाद उत्पादन शुरू होने से स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। कारखाने की चिमनी से निकलता धुआं अब केवल उत्पादन का संकेत नहीं, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार सृजन की नई उम्मीद का प्रतीक बन गया है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस उद्योग के संचालन से युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे रोजी-रोटी की तलाश में पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों की ओर होने वाले पलायन में कमी आएगी। खासकर तकनीकी और औद्योगिक कार्यों में दक्ष श्रमिकों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
कारखाने का निर्माण कार्य वर्ष 2022 में शुरू हुआ था। उस समय से ही लोगों को उम्मीद थी कि यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है। विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं, मशीनों की स्थापना और आवश्यक स्वीकृतियों के बाद फरवरी 2026 से यहां उत्पादन कार्य प्रारंभ किया गया। शुरुआती चरण में कच्चे माल की उपलब्धता और कुछ तकनीकी चुनौतियों के कारण उत्पादन प्रभावित रहा, लेकिन अब उत्पादन नियमित रूप से किया जा रहा है।
रेल पहिया कारखाने के बाद दरियापुर क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई के रूप में उभर रहा है। कारखाना प्रबंधन के अनुसार यहां प्रतिदिन लगभग एक हजार टायरों का उत्पादन किया जा रहा है। इनमें साइकिल, रेंजर साइकिल और ठेला के विभिन्न प्रकार के टायर शामिल हैं। सारण जिले में यह पहला ऐसा उद्योग है जहां साइकिल टायर का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
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(कारखाने में लगी लकड़ी की बायलर भट्ठी)
इस कारखाने के शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों को भी बड़ा लाभ मिल रहा है। अब तक साइकिल टायर की खरीद के लिए व्यापारियों को पंजाब के लुधियाना सहित अन्य औद्योगिक शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
कई बार उन्हें स्वयं वहां जाकर माल लाना पड़ता था या फिर लंबी प्रक्रिया के तहत ऑर्डर देना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होने से परिवहन खर्च में कमी आने के साथ-साथ समय की भी बचत हो रही है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है।
कारखाना प्रबंधन के अनुसार उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल लुधियाना, दिल्ली और कोलकाता से मंगवाया जाता है। वर्तमान में यहां 18 कुशल तथा दो अकुशल श्रमिक कार्यरत हैं। उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ भविष्य में और लोगों को रोजगार देने की योजना है। श्रमिकों को उनके कार्य और दक्षता के आधार पर वेतन दिया जाता है।
कारखाने में निर्मित टायरों की कीमत उनकी गुणवत्ता और आकार के अनुसार निर्धारित की जाती है। औसतन एक टायर की लागत लगभग 170 रुपये बताई जाती है। कारखाने का साप्ताहिक कारोबार सात से आठ लाख रुपये तक पहुंच चुका है। यहां तैयार होने वाले टायरों की आपूर्ति सारण और पटना के अलावा नेपाल तक की जा रही है। इसके अतिरिक्त आसपास के कई जिलों में भी उत्पाद भेजे जा रहे हैं, जिससे इस उद्योग का बाजार लगातार विस्तार पा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले रोजगार की तलाश में क्षेत्र के कुशल श्रमिकों को लुधियाना और जालंधर जैसे औद्योगिक केंद्रों का रुख करना पड़ता था। अब उन्हें अपने ही जिले में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ी है। इससे न केवल श्रमिकों को अपने परिवार के साथ रहने का अवसर मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कारखाने में सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों का पालन करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। समय-समय पर प्रदूषण नियंत्रण और अग्निशमन विभाग के अधिकारी निरीक्षण करते हैं।
हालांकि प्रबंधन का कहना है कि बिजली कटौती उत्पादन क्षमता को प्रभावित करती है। जेनरेटर के माध्यम से उत्पादन कार्य पूरी तरह सुचारु ढंग से नहीं चल पाता। इसके अलावा लकड़ी आधारित बायलर के लिए पर्याप्त ईंधन की उपलब्धता भी एक चुनौती बनी हुई है।