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अभिभावकों को बड़ी राहत: निजी स्कूलों की मनमानी पर सिवान DM सख्त, फिक्स दुकान से स्टेशनरी खरीदने का खेल खत्म

Published: Fri, 03 Apr 2026 02:24 PM (IST)

सिवान जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को विशिष्ट दुकानों से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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संवाद सूत्र, दारौंदा (सिवान)। जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी पर आखिरकार जिला प्रशासन का डंडा चल गया है। अभिभावकों से किताब, यूनिफार्म, जूते और कापियां निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए दबाव बनाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिलाधिकारी-सह-जिला दंडाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने कड़ा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिया है।

अब कोई भी निजी स्कूल छात्रों या अभिभावकों को किसी एक तय दुकान से स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। प्रशासन के इस फैसले को शिक्षा के नाम पर चल रही ‘फिक्स दुकान’ व्यवस्था पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

पेरेंट्स की जेब पर पड़ रहा था असर

बताया जाता है कि कई स्कूलों ने यूनिफार्म, किताबें और अन्य सामग्री के लिए अपनी ‘फिक्स दुकानों’ का नेटवर्क बना रखा था, जहां खुले बाजार की तुलना में काफी ज्यादा कीमत वसूली जा रही थी। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के अभिभावकों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा था।

जारी आदेश के अनुसार, सभी निजी विद्यालयों को 15 अप्रैल 2026 से पहले हर कक्षा की अनिवार्य पुस्तक सूची और यूनिफार्म का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।

स्कूलों पर सख्त कार्रवाई का दिया निर्देश

साथ ही यह जानकारी विद्यालय परिसर में सार्वजनिक रूप से चस्पा करना भी अनिवार्य होगा, ताकि अभिभावक पारदर्शिता के साथ अपनी सुविधा अनुसार खरीदारी कर सकें।

डीएम ने स्पष्ट किया है कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 के तहत पहले से ही ऐसी बाध्यता गैरकानूनी है और नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का मानना है कि इस तरह की एकाधिकार व्यवस्था से समाज में असंतोष और अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में इस पर रोक लगाना जरूरी था। इस फैसले के बाद अभिभावकों में राहत की उम्मीद जगी है। अब वे बाजार में उपलब्ध सस्ते विकल्पों से अपने बच्चों के लिए किताबें और यूनिफार्म खरीद सकेंगे, जिससे शिक्षा का खर्च कुछ हद तक कम हो सकेगा।

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