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    8th Pay Commission: 1.9 से ज्यादा नहीं मिलेगा फिटमेंट फैक्टर? 50% DA, OPS पर NFIR की खरी-खरी; NPS-UPS को बता दिया छलावा!

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 06:31 PM (GMT+05:30)

    8th Pay Commission Latest Update: नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के कार्यकारी अध्यक्ष बीसी शर्मा ने 8वें वेतन आयोग पर सरकारी कर्मचारियों की उ ...और पढ़ें

    8वें वेतन आयोग पर NFIR का बड़ा खुलासा: फिटमेंट फैक्टर, 50% DA मर्जर और OPS पर रखी बेबाक राय (फोटो AI जनरेटेड है)

    8वें वेतन आयोग पर NFIR का बड़ा खुलासा: फिटमेंट फैक्टर, 50% DA मर्जर और OPS पर रखी बेबाक राय (फोटो AI जनरेटेड है)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    नई दिल्ली| आजादी के बाद 55 रुपए से शुरू हुई सरकारी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी सातवें वेतन आयोग तक आते-आते 18,000 रुपए पहुंच गई। अब बारी है- आठवें वेतन आयोग की। महंगाई आसमान छू रही है, ऐसे में हर कर्मचारी की नजर इस बात पर है कि अगली सैलरी कितनी बढ़कर आएगी? क्या सच में शुरुआती वेतन 69 हजार हो जाएगा? बेसिक पे में 50% DA मर्जर की सच्चाई क्या है? और पुरानी पेंशन (OPS) पर सरकार का क्या रुख है? इन्हीं सुलगते सवालों के सटीक और बेबाक जवाब दिए- नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के कार्यकारी अध्यक्ष बीसी शर्मा (BC Sharma) ने। आइए 10 सवालों में जानते हैं वो सबकुछ, जो आपको जानना जरूरी है।

    सवाल 1: आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से सरकारी कर्मचारियों को क्या उम्मीदें हैं? खास तौर पर रेलवे के संदर्भ में?

    बीसी शर्मा: मैंने चौथे पे कमीशन से लेकर अब तक की प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया है। छठा, सातवां और अब आठवें वेतन आयोग में हमारी पूरी भागीदारी है। पे कमीशन असल में बाजार के हालात और महंगाई को देखकर बिठाया जाता है ताकि एक कर्मचारी अपने परिवार को आसानी से पाल सके। रेलवे कोई आम सरकारी विभाग नहीं है, यह एक यूनिक इंडस्ट्री है। इसमें 236 से ज्यादा अलग-अलग कैटेगरी हैं। एक साधारण डेस्क जॉब करने वाले और रेलवे ट्रैक पर अपनी जान जोखिम में डालने वाले की तुलना आप एक ही पैमाने पर नहीं कर सकते। इसलिए सरकार को फॉर्मूला बदलना चाहिए। जैसे बैंकिंग सेक्टर में परमानेंट वेज रिव्यू कमेटी होती है, वैसी ही व्यवस्था रेलवे में भी होनी चाहिए।

    10 साल का इंतजार क्यों? जब महंगाई हर साल बढ़ती है और साल में दो बार डीए (DA) मिलता है, तो वेतन की समीक्षा 5 साल में या हर साल क्यों नहीं हो सकती? देश में जैसी महंगाई बढ़े, उसी के हिसाब से लिविंग वेज यानी जीने योग्य वेतन भी बढ़ना चाहिए।

    सवाल 2: आपने आयोग के सामने 3.833 फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की मांग रखी है, जिससे बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़कर 69,000 रुपए हो जाएगी। क्या पे कमीशन से आपको कोई पॉजिटिव फीडबैक मिला है?

    बीसी शर्मा: पे कमीशन का काम सभी पक्षों को सुनकर फैसला लेना है। यह 3.833 का आंकड़ा हमने हवा में नहीं उछाला है। इसके पीछे एक पुख्ता फॉर्मूला है। 1957 में इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) और डॉ. एक्रॉयड (Dr. Aykroyd) के फॉर्मूले के आधार पर यह तय होता है कि एक परिवार को जीने के लिए क्या चाहिए? दाल, चावल, आटा, घी, दवाइयां, बच्चों की शिक्षा और शादी-ब्याह। पहले इस फॉर्मूले में परिवार के केवल 3 यूनिट (पति, पत्नी और दो बच्चे) गिने जाते थे।

    सुप्रीम कोर्ट के 2007 के फैसले के बाद इसमें माता-पिता को भी डायरेक्ट डिपेंडेंट मानकर जोड़ा गया, जिससे कुल 5 यूनिट हो गए। इन्हीं 5 यूनिट्स का आज के बाजार भाव से खर्च निकालें, तो न्यूनतम बेसिक पे 69,000 रुपए ही बैठती है। हमारी आयोग के मेंबर सेक्रेटरी पंकज जैन जी से मुलाकात हुई थी। हमने उन्हें समझाया कि रेलवे में इंजीनियरिंग, गैटमैन, ट्रैकमैन, टेक्निशियन, पेंटर जैसी ढेरों कैटेगरी हैं। उन्होंने हमारी बात समझी और हमें अपना पक्ष विस्तार से रखने का समय दिया है। हमें पूरी उम्मीद है कि हमारे तर्कों को सुना जाएगा।

    सवाल 3: जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग कैसा काम कर रहा है? क्या प्रक्रिया तेजी से चल रही है?

    बीसी शर्मा: यह आयोग पिछले आयोगों से काफी अलग तरीके से काम कर रहा है। यह पूरी तरह से 'पेपरलेस' और डिजिटल वर्किंग पर जोर दे रहा है। चाहे मेमोरेंडम देना हो या सप्लीमेंट्री डिटेल्स, सब कुछ उनकी वेबसाइट के जरिए हो रहा है। आयोग देश भर में घूम-घूम कर (जैसे लखनऊ में) स्टेकहोल्डर्स से मिल रहा है। वे डेटा स्टोर कर रहे हैं और अंत में हमें बुलाकर फाइनल चर्चा करेंगे। काम तो तेजी से हो रहा है।

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    सवाल 4: कई लोगों को लगता है कि 3.833 का फिटमेंट फैक्टर सिर्फ एक हवा-हवाई नंबर (Figment of Imagination) है या महज दिखावा है, क्योंकि 7वें वेतन आयोग में 2.57 फैक्टर ही मिला था। इस पर आप क्या कहेंगे?

    बीसी शर्मा: अगर घर में बच्चा 100 रुपए की चीज मांगता है, तो हम उसे तुरंत मना नहीं करते। भले ही हम उसे 50 रुपए की चीज लाकर दें, लेकिन एक नेगोशिएशन तो होता है। हमारी मांग 100% तार्किक है। हमने बाजार के भाव और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का बेस लेकर यह फैक्टर तय किया है।

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    सातवें वेतन आयोग में 2.57 फैक्टर के आधार पर सैलरी में सिर्फ 14.29% की बढ़ोतरी हुई थी, जो अब तक की सबसे कम थी। तब भी न्यूनतम सैलरी 26,000 मांगी गई थी, लेकिन 18,000 ही मिली। पर इसका मतलब यह नहीं कि हम अपनी जायज मांग रखना छोड़ दें। 2.57 से नीचे जाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता, यह सरकार के लिए भी मुश्किल है। हमें उम्मीद है कि हमारे तर्कों (69,000 न्यूनतम और 2,59,500 अधिकतम वेतन) के आधार पर हमें सफलता मिलेगी।

    सवाल 5: 18 हजार से 69 हजार की मांग का मतलब है कि ग्रॉस सैलरी 90-95 हजार तक पहुंच जाएगी। क्या हर सरकारी कर्मचारी की शुरुआती सैलरी अब 1 लाख के करीब होगी?

    बीसी शर्मा: सैलरी का नंबर भले ही बड़ा दिख रहा हो, लेकिन आज की मार्केट वैल्यू देखिए। आज ग्रुप डी का कर्मचारी भी इनकम टैक्स के दायरे में आ गया है। सैलरी जितनी बढ़ती है, उतना ही टैक्स भी कट जाता है। रुपए की परचेजिंग पावर यानी खरीदने की क्षमता) आज बहुत कम हो गई है। बिजली के बिलों में पुराने पेंशन सरचार्ज जोड़े जा रहे हैं। एक मिडिल क्लास आदमी को जरूरतें पूरी करने के लिए आज भी लोन और ब्याज का सहारा लेना पड़ता है। इसलिए 1 लाख की सैलरी सुनने में भले ही बड़ी लगे, लेकिन बाजार की महंगाई उसे वहीं लाकर खड़ा कर देती है जहां वो पहले था।

    सवाल 6: सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि सरकार 1.8 या 1.9 से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर नहीं देगी। क्या सरकार फिटमेंट फैक्टर के अलावा परफॉर्मेंस बेस जैसे किसी और फॉर्मूले पर विचार कर रही है?

    बीसी शर्मा: जो लोग 1.8 या 1.9 की बात कर रहे हैं, वे सिर्फ बढ़े हुए DA (महंगाई भत्ते) को जोड़कर अंदाजा लगा रहे हैं। लेकिन क्या सरकार बाजार की असल महंगाई को इग्नोर कर देगी? जहां तक परफॉर्मेंस की बात है, तो रेलवे में यह पहले से लागू है। हमें प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस मिलता है। अगर हम तय टारगेट से कम काम करेंगे तो हमें बोनस नहीं मिलेगा।

    आज 18 लाख कर्मचारियों का काम 12.5 लाख कर्मचारी कर रहे हैं। वंदे भारत और अमृत भारत जैसी गाड़ियां बिना किसी नई पोस्ट के चलाई जा रही हैं। यह परफॉर्मेंस ही तो है! सांसदों और विधायकों की सैलरी जब मर्जी होती है, बढ़ जाती है। फिर वर्किंग क्लास को 10 साल बाद मिलने वाले हक के लिए इतने सवाल क्यों?

    सवाल 7: Basic Pay में 50% DA Merge होने की खबरें बहुत वायरल हो रही हैं। इसकी असल सच्चाई क्या है?

    बीसी शर्मा: यह कोई फेक न्यूज या किसी सरकार की मेहरबानी नहीं है। यह एक तय फॉर्मूला है जो सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में भी शामिल है। जब महंगाई भत्ता (DA) 50% तक पहुंच जाता है, तो उसे बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाता है। इसके साथ ही तमाम अलाउंस (जैसे HRA) भी 25% तक बढ़ जाते हैं। पिछले वेतन आयोगों में भी DA को मर्ज करने के बाद ही नया मल्टीप्लायर फैक्टर तय किया गया था। सरकार इसे हर हाल में लागू करेगी, इसमें कोई शक नहीं है। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो उन्हें नया फिटमेंट फैक्टर और भी ज्यादा देना पड़ेगा।

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    सवाल 8: वेतन आयोग की प्रक्रिया अगर लंबी खिंचती है (मान लीजिए 2027 तक), तो क्या सरकार एरियर (Arrears) या Interim Relief (अंतरिम राहत) देगी? और कोविड के समय जो पैसा रुका था, उसका क्या?

    बीसी शर्मा: हमारी पूरी कोशिश है और मुझे लगता है कि रिपोर्ट जनवरी 2026 तक लागू हो जानी चाहिए। अगर देरी होती है, तो निश्चित रूप से हम कम से कम 20% Interim Relief की मांग करेंगे, जो बाद में बेसिक पे में मर्ज हो जाती है। हालांकि, पांच-छह राज्यों के आगामी चुनावों को देखते हुए सरकार इसे ज्यादा डिले नहीं करेगी।

    जहां तक कोविड के समय रोके गए 3 DA इंस्टॉलमेंट की बात है, वो सरासर बेइंसाफी थी। भारत के इतिहास में कभी महंगाई भत्ता फ्रीज नहीं हुआ था। इसका सबसे बड़ा नुकसान रिटायर हो रहे कर्मचारियों को हुआ, जिनकी डीसीआरजी (DCRG), पेंशन और लीव इनकैशमेंट पर सीधा असर पड़ा। सरकार को तुरंत प्रभाव से वो फ्रीज किया हुआ पैसा रिलीज करना चाहिए।

    सवाल 9: लेवल 1 और ग्रुप-डी कर्मचारियों को इस 8th Pay Commission से कितना और क्या फायदा होने वाला है?

    बीसी शर्मा: नियम यह है कि जब भी नया पे कमीशन आता है, नई भर्ती वालों को सबसे ज्यादा फायदा होता है। लेकिन हमारी मुख्य चिंता न्यूनतम और अधिकतम सैलरी के बीच की खाई को कम करने की है। चौथे पे कमीशन तक न्यूनतम और अधिकतम सैलरी का अंतर 1:9 के करीब था। आज एक अधिकारी 2.5 लाख ले रहा है और निचले स्तर का कर्मचारी 18,000 रुपए। सबसे ज्यादा पसीना ग्रुप-डी और नॉन-गैजेटेड स्टाफ बहाता है, लेकिन भत्ते और सुविधाएं ऊपर वालों को ज्यादा मिलती हैं (जैसे पास की सुविधा)। विदेशों की तरह भारत में भी 'काम करने वालों' की वैल्यू बढ़नी चाहिए। इस गैप को हर हाल में कम किया जाना चाहिए।

    सवाल 10: पेंशनर्स की काफी उम्मीदें हैं। OPS (Old Pension Scheme) vs NPS (New Pension Scheme) vs UPS (Unified Pension Scheme) पर आपका क्या कहना है?

    बीसी शर्मा: 2004 में लाई गई NPS पूरी तरह से फेल है। इसे सरकार पर बोझ बताकर लाया गया था, जो कि गलत तर्क है। सिर्फ उत्तर रेलवे (Northern Railway) के रिटायर्ड कर्मचारियों का करीब 1.47 लाख करोड़ रुपए सरकार के पास जमा है। सरकार इस फंड से पैसा कमाती है। रेलवे अपनी पेंशन खुद जनरेट करती है।

    अगस्त 2023 में रामलीला मैदान में हमारे विशाल प्रदर्शन के बाद घबराकर सरकार ने UPS (Unified Pension Scheme) की घोषणा कर दी। लेकिन UPS भी छलावा है! इसमें शर्त रख दी कि 25 साल की सर्विस के बाद ही 50% पेंशन मिलेगी। अगर कोई 15 साल सर्विस करके रिटायर होता है, तो उसका क्या? कॉरपस (Corpus) के नाम पर शेयर बाजार में पैसा लगाया जा रहा है, जिससे किसी को 1500 तो किसी को 5000 रुपये पेंशन मिल रही है। क्या इसमें किसी का बुढ़ापा कट सकता है?

    96% कर्मचारियों ने UPS को नकार दिया है। हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है- हमें पे-आउट नहीं, पुरानी पेंशन (OPS) चाहिए। OPS कोई बोझ नहीं है, यह कर्मचारियों का अपना हक है जो उनके द्वारा कमाए गए प्रोविडेंट फंड के ब्याज से ही पूरा हो सकता है। सरकार को इसे वापस लाना ही होगा।