8th Pay Commission में OPS की मांग क्यों कर रहे कर्मचारी? दिल्ली में करने जा रहे बड़ी मीटिंग; NPS-UPS पर नाराजगी क्यों?
8th Pay Commission: कर्मचारी 8वें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए 6 सितंबर को दिल्ली में एक बड़ी बैठक आय ...और पढ़ें

8th Pay Commission में OPS की मांग क्यों कर रहे कर्मचारी? (AI Generated Image)
HighLights
8वें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन योजना की मांग।
OPS, NPS और UPS के बीच मुख्य अंतर।
दिल्ली में 6 सितंबर को कर्मचारियों की बड़ी बैठक।
नई दिल्ली। 1 जनवरी 2026 से लागू माने जा रहे 8वें वेतन को लेकर कोई आधिकारिक एलान नहीं हुआ है। फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, HRA कितने मिलेगा, डीए कितना मिलेगा, इन सभी बातों पर कयास लगाए जा रहे हैं। कर्मचारी संगठन भी लगातार एक तरफ फिटमेंट फैक्टर ज्यादा रखने की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर ओपीएस की बहाली का मुद्दा भी देशभर में आग की तरह फैलता जा रहा है।
2004 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में ओपीएस को हटाकर एनपीएस लागू की गई थी। वहीं UPS (Unified Pension Scheme) 1 अप्रैल 2025 से लागू हुई। अब जब पे कमीशन 10 सालों बाद फिर से सैलरी बढ़ाने के लिए बैठा है, तो कर्मचारियों की मांग की 8वें वेतन आयोग में ओपीएस को फिर बहाल किया जाए, जिसे लेकर दिल्ली में कर्मचारी संगठन की ओर से महासम्मेलन का आयोजिन भी किया जाने वाला है । ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को ओपीएस से क्या लाभ मिलेगा और सरकार इसके पक्ष में क्यों नहीं है। आइए आपको OPS, NPS और UPS के बारे में विस्तार से बताते हैं।
कौन सी स्कीम है सबसे पुरानी?
ओपीएस सबसे पुरानी स्कीम है। इसकी शुरुआत 1924 में ब्रिटिश शासन में हुई थी, जब सरकार के लिए काम करने वालों के लिए पेंशन के रूप में वेतन का आधा हिस्सा देने की सिफारिश की गई थी। लेकिन 2004 में वित्तीय कारणों की वजह से इसे हटाकर एनपीएस लाया गया।
OPS के फायदे क्या हैं?
OPS का सबसे बड़ा फायदा है तय पेंशन की गारंटी। जो कर्मचारियों को एनपीएस में नहीं मिलता है।
- OPS में तय पेंशन की गारंटी मिलती है
- महंगाई भत्ता बढ़ने से पेंशन खुद बढ़ जाती है
- कर्मचारी की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन की सुविधा
- शेयर बाजार के उतार चढ़ाव पर निर्भर नहीं
- OPS में कर्मचारी का अंशदान बिलकुल नहीं
क्या है एनपीएस?
एनपीएस का मतलब है न्यू पेंशन स्कीम। जिसे 1 जनवरी 2004 से लागू किया गया था। सरकार वित्तीय बोझ को कम करने के लिए ये स्कीम लेकर आई थी। इस स्कीम की सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें से तय पेंशन की गारंटी को हटा दिया गया था।
खबरें और भी
- हर महीने मिलने वाली पेंशन की गारंटी नहीं
- NPS में कर्मचारी का 10% का अंशदान जरूरी
- शेयर बाजार में लगाया जाता है पैसा
- मंहगाई से अलग रखी गई ये स्कीम
- निवेश करने पर टैक्स में छूट का प्रावधान
- रिटायरमेंट पर 60% फंड निकालने पर टैक्स की छूट
OPS, NPS से कितनी अलग है UPS?
UPS का मतलब है यूनिफाइड पेंशन स्कीम। ये एनपीएस से काफी अलग है। ये ओपीएस और एनपीएस से कई मामलों में अलग है।
- UPS में पेंशन आखिरी वेतन के 50 फीसदी बराबर
- इसमें कम से कम ₹10000 की पेंशन का प्रावधान
- कर्मचारी का योगदान 10% और सरकार का 18.5%
- महंगाई के हिसाब से मिलता है DA
- कर्मचारी की मृत्यु होने पर 60% पेंशन परिवार को
क्यों हो रही है OPS की मांग?
देशभर में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme - OPS) को बहाल करने की जोरदार मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि या तो सरकार ओपीएस की बहाली करे या फिर न्यूनतम पेंशन को तय करे। इसी मांग को उठाने के लिए AINPSEF ने 6 सितंबर को दिल्ली में बहुत बड़ी बैठक के आयोजन का एलान किया है, जहां देशभर से लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स के आने की संभावना है।