अडानी के खिलाफ अनिल अग्रवाल ने खोला मोर्चा, हर्ष गोयनका का भी मिला साथ, JP Associates Deal से जुड़ा है विवाद
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण से जुड़े मामले पर निराशा व्यक्त की, जिसे अडानी समूह ने हासिल कर लिया। मशहूर उद ...और पढ़ें

HighLights
वेदांता समूह ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई थी।
अनिल अग्रवाल ने अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
अनिल अग्रवाल के X पोस्ट का हर्ष गोयनका ने समर्थन किया।
नई दिल्ली। वेदांता ग्रुप ने दिवालिया समूह 'जयप्रकाश एसोसिएट्स' (Jaiprakash Associates) को खरीदने के लिए बोली जीत ली थी लेकिन इसके बावजूद अधिग्रहण नहीं कर सके और यह कंपनी अडानी समूह के हाथों में चली गई। इस मुद्दे पर वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agrawal) ने अपने मन की भड़ास निकाली। खास बात है कि मशहूर उद्योगपति हर्ष गोयनका (Harsh Goenka) ने उनका समर्थन किया। दरअसल, अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता समूह को जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया था, लेकिन बाद में इस फैसले को पलट दिया गया। X पर एक पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता "उचित माध्यमों" के जरिए अपना पक्ष रखेगी।
अनिल अग्रवाल ने 29 मार्च को X पर पोस्ट किया, जिसे हर्ष गोयनका ने रीपोस्ट किया। हर्ष गोयनका, भारत के मशहूर उद्योगति और RPG Enterprises के चेयरमैन हैं। वे अक्सर, सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं और विभिन्न मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं। अनिल अग्रवाल ने जब सुबह X पर पोस्ट डाला तो हर्ष गोयनका ने इसे रीपोस्ट कर दिया। इसके अलावा, कई यूजर्स ने अनिल अग्रवाल के पोस्ट पर तरह-तरह से अपने रिएक्शन दिए। हालांकि, इस मामले को लेकर अनिल अग्रवाल के पोस्ट के बाद अडानी ग्रुप की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
This morning, I was reading Chapter 15 of the Bhagavad Gita. One thought stayed with me. “Have courage. Stay humble. Do your duty without attachment.” Life tested this.
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) March 29, 2026
Some years ago, Shri Jaiprakash Gaur, who built Jaypee Group, came to meet me in London. He had built an… pic.twitter.com/aEPQet0WQH
अनिल अग्रवाल ने क्या कहा?
अनिल अग्रवाल X पर पोस्ट में कहा, "जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए बोली की प्रक्रिया 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड' (IBC) के तहत लेनदारों की समिति (CoC) द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से पूरी हुई। उनके अनुसार, कई बोलीदाताओं ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया, लेकिन बाद में वे इससे बाहर हो गए, जिसके बाद वेदांता सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में बची।"

वेदांता समूह के चेयरमैन ने दावा किया, "आखिरकार, हमें सार्वजनिक रूप से सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया। यह एक पारदर्शी प्रक्रिया थी। हमें लिखित रूप में सूचित किया गया कि हम जीत गए हैं"। लेकिन, कुछ दिनों बाद फैसला बदल दिया गया। मैं डिटेल में नहीं जाना चाहता।"
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क्या चाहते थे जयप्रकाश गौड़?
अनिल अग्रवाल ने यह दावा भी किया कि जयप्रकाश गौड़ ने वर्षों पहले लंदन में उनसे संपर्क किया था और कहा था कि उनकी एकमात्र इच्छा थी कि उन्होंने जो कुछ भी बनाया है, वह सुरक्षित हाथों में जाए और सही इरादे के साथ उसे आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि उस समय वेदांता इस मामले में आगे नहीं बढ़ी, लेकिन जब वह एसेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस में गई, तो यह मौका फिर से सामने आया।
अनिल अग्रवाल का यह बयान वेदांता के उस कदम के बाद आया है, जिसमें उसने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की प्रतिद्वंद्वी बोली को मिली मंजूरी को चुनौती दी थी। इस महीने की शुरुआत में, वेदांता ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के एक आदेश के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) का रुख किया था। NCLT की इलाहाबाद बेंच ने 17 मार्च को समाधान योजना को मंजूरी दे दी थी, और अदाणी एंटरप्राइजेज को सफल रेजोल्यूशन आवेदक के तौर पर समर्थन दिया था।