Vedanta Demerger: 5 कंपनियों में बंट जाएगा 250000 करोड़ का कारोबार, अनिल अग्रवाल ने बताया प्लान और तारीख
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड अप्रैल की शुरुआत में 5 अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित होगी। ...और पढ़ें
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HighLights
वेदांता लिमिटेड का अप्रैल की शुरुआत में डीमर्जर होगा।
कंपनी 5 अलग-अलग सूचीबद्ध इकाइयों में बंटेगी।
डीमर्जर से शेयरधारकों के लिए वैल्यू क्रिएशन होगा।
नई दिल्ली। भारत के दिग्गज माइनिंग कारोबारी अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता समूह (Vedanta Demerger) अप्रैल की शुरुआत में ही 5 अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित होने जा रही है। इस डीमर्जर का काफी लंबे समय से शेयरधारकों को इंतजार था। कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल का मानना है कि यह डीमर्जर शेयरधारकों के लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि इससे वैल्यू क्रिएशन होगा।
एफटी की रिपोर्ट के अनुसार, अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) ने कहा कि इस विभाजन से प्रत्येक व्यवसाय को 'विकास की पूरी आजादी' मिलेगी। यह डीमर्जर भारत के सबसे बड़े मिनरल समूह में से वेदांता लिमिटेड एक के लिए एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत है। इस डीमर्जर के तहत वेदांता को एल्युमीनियम, जस्ता, तेल और गैस, इस्पात और बिजली जैसे क्षेत्रों में स्वतंत्र इकाइयों में विभाजित किया जाएगा।
अनिल अग्रवाल ने डीमर्जर पर क्या कहा?
अनिल अग्रवाल ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि पांचों नई कंपनियों पर डीमर्जर के बाद कुल मिलाकर लगभग 7 अरब डॉलर का कर्ज होगा, जो समूह के व्यापक कर्ज घटाने के प्रयासों में एक उल्लेखनीय कमी है। इसके अलावा, पांचों कंपनियों का ज्वाइंट मार्केट कैप वेदांता के मौजूदा लगभग 27 अरब डॉलर के वैल्यूएशन से काफी अधिक हो सकता है।
वेंदाता लिमिटेड का यह कदम कई वर्षों से विचाराधीन था, जो वेदांता के जटिल कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को सरल बनाने और निवेशकों को अपने मुख्य व्यवसायों की बेहतर जानकारी देने के प्रयासों को दर्शाता है। लगभग 37 अरब डॉलर के मार्केट कैप वाली इस कंपनी को मूल्यांकन और लीवरेज को लेकर लगातार सवालों का सामना करना पड़ा है, जिनका समाधान इस डीमर्जर से होने की उम्मीद है।
डीमर्जर से कम होगा कंपनी का कर्ज
इस डीमर्जर से वेदांता अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने का व्यापक प्रयास कर रहा है। माइनिंग समूह लिस्टेड इकाई और मूल कंपनी दोनों स्तरों पर कर्ज कम करने के लिए काम कर रहा है, जो पिछले कुछ वर्षों से निवेशकों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय रहा है।
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फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वेदांता समूह इस योजना को पहले भारतीय सरकार के विरोध का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते डीमर्जर की प्रोसेस में देरी हुई। हालांकि, वेदांता ने पिछले साल एक महत्वपूर्ण कानूनी बाधा को पार कर लिया, जिससे पुनर्गठन को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया।