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    चीन फिर दिखा रहा बदमाशी! भारतीयों के बिजनेस वीजा आवेदन कर रहा रद, देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ेगा बुरा असर?

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 02:27 PM (IST)

    चीन ने भारतीय कारोबारियों के लिए बिजनेस वीजा प्रक्रिया सख्त कर दी है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और व्यापारिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ रहा है। उद् ...और पढ़ें

    चीन भारतीयों के बिजनेस वीजा के नियमों को कर रहा सख्त

    चीन भारतीयों के बिजनेस वीजा के नियमों को कर रहा सख्त

    HighLights

    1. चीन ने भारतीय कारोबारियों के बिजनेस वीजा आवेदन रद्द किए।

    2. इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित।

    3. उद्योग ने सरकार से कूटनीतिक हस्तक्षेप का आग्रह किया।

    नई दिल्ली| भारत के लोग विदेशों में काम करने में खूब दिलचस्पी दिखा रहे हैं। पिछले कुछ सालों से अमेरिका, कनाडा, यूके और चीन की ओर बड़े पैमाने पर भारतीयों ने रुख किया है। लेकिन अब कारोबार के सिलसिले में चीन (China) जाने वाले भारतीय अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के लिए वीजा हासिल करना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है। उद्योग जगत से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, चीन ने हाल के महीनों में भारतीय नागरिकों के लिए बिजनेस वीजा मंजूर करने की प्रक्रिया को सख्त कर दिया है, जिससे कई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के प्रोजेक्ट्स और कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।

    वीजा आवेदन हो रहे रद

    इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि पहले जहां लगभग सभी वीजा आवेदनों को मंजूरी मिल जाती थी, लेकिन अब बहुत ही कम आवेदनों को ही स्वीकृति मिल रही है। कई मामलों में वीजा आवेदन खारिज होने पर कंपनियों को दोबारा आवेदन करना पड़ रहा है, जिससे प्रक्रिया और लंबी हो रही है और उसके बाद भी बिजनेस वीजा की मंजूरी बेहद सीमित हो गई है।

    चीन पर हमारी निर्भरता अधिक

    उद्योग जगत का कहना है कि यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब भारत कई क्षेत्रों में पुर्जों, पूंजीगत उपकरणों (Capital Equipment) और तकनीकी विशेषज्ञता (Technical Expertise) के लिए अभी भी चीन पर काफी हद तक निर्भर है। उद्योग के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों में 50 प्रतिशत तक कंपोनेंट और कैपिटल गुड्स चीन से आयात किए जाते हैं।

    मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कई कंपनियों ने अनौपचारिक रूप से केंद्र सरकार से संपर्क कर इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर बीजिंग के समक्ष उठाने का आग्रह किया है। भारत-चीन संबंधों से परिचित एक व्यक्ति ने बताया कि केंद्र सरकार को इस समस्या की जानकारी है।

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    भारत के विकास को प्रभावित कर रहा चीन

    मीडिया के सूत्र ने कहा कि चीन भारत की प्रगति और विकास को बाधित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। भारतीय कारोबारियों के वीजा आवेदनों को खारिज करना भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। "भारतीय सप्लाई चेन, उत्पादों, तकनीक और मानव संसाधन के फ्लो को कम करने या दबाव बनाने की नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।" हालांकि, नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने इस संबंध में भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है।

    चीन के लिए भी बनाए गए थे सख्त नियम

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की यात्रा करने वाले कई भारतीय कारोबारी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वीजा अस्वीकृति की बढ़ती घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू होने के बावजूद वीजा मंजूरी की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है।

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    बता दें कि साल 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में दरार आई है। इसके बाद से भारत ने चीन की कंपनियों के निवेश पर कड़े नियम लागू किए और प्रेस नोट-3 के तहत बहु-मंत्रालयीय मंजूरी को अनिवार्य किया था। इसके साथ ही चीनी नागरिकों के लिए वीजा नियम भी कड़े किए गए थे। हालांकि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत भारतीय कंपनियों के साथ काम करने वाले कुछ तकनीकी विशेषज्ञों को सीमित छूट दी गई थी।