ड्रैगन की चाल ने मोड़ दिया श्रीलंका का मुंह, भारत को पछाड़ चीन बना कोलंबो का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
चीन ने भारत को पीछे छोड़ते हुए 2025 में श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। यह बदलाव चीनी वाहनों के आयात पर प्रतिबंधों में ढील के कारण ...और पढ़ें

भारत को पीछे छोड़ श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना चीन
HighLights
चीन 2025 में श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना।
भारत को पीछे छोड़ने का मुख्य कारण वाहन आयात में ढील।
श्रीलंका का चीन के साथ व्यापार $5.5 बिलियन तक पहुंचा।
नई दिल्ली। अब तक श्रीलंका का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर भारत था। लेकिन अब कहानी पूरी तरह से बदल चुकी है। चीन ने ऐसी चाल चली कि अब वह खुद श्रीलंका का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर बन (Sri Lanka Biggest Trading Partner) चुका है। श्रीलंका के सेंट्रल बैंक (CBSL) ने बताया कि 2025 में चीन ने भारत को पीछे छोड़कर श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है।
भारत को चीन इसलिए पछाड़ पाया क्योंकि उसे प्रतिबंधों में ढील मिली। यानी चीनी वस्तुओं का श्रीलंका में आयात आसान हुआ है। प्रतिबंधों में ढील के बाद आयात, खासकर वाहनों के आयात में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण हुआ।
श्रीलंका और चीन के बीच ट्रेड $5.5 बिलियन तक पहुंचा
सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका ने इसकी जानकारी अपनी 'वार्षिक आर्थिक समीक्षा 2025' दी। बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चीन के साथ श्रीलंका का कुल व्यापार लगभग $5.5 बिलियन तक पहुंच गया। यह आंकड़ा भारत के साथ $5.4 बिलियन के आंकड़े से ज्यादा है। इस तरह, 2021 से 2024 तक भारत को मिली बढ़त खत्म हो गई। अमेरिका $3.5 बिलियन के साथ श्रीलंका का तीसरा सबसे बड़े साझेदार रहा। इन तीनों देशों का कुल माल व्यापार में 41.1% हिस्सा रहा।
China is now Sri Lanka's #1 trading partner. 🇨🇳 🤝🇱🇰
— Yu Jing (@ChinaSpox_India) May 5, 2026
According to the Central Bank of Sri Lanka's 2025 Annual Review, China-Sri Lanka trade hit $5.5B.
Through projects like the Port of Colombo and ventures into EVs and clean energy, China and Sri Lanka are partnering to drive a… pic.twitter.com/aVb1Qn4Te2
वाहनों के आयात के चलते चीन बना श्रीलंका का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर
श्रीलंका ने चीनी वाहनों के आयात में छूट दी। यही कारण है कि चीन उसका सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर (Why China Became Biggest Trading Partner Of Sri Lanka) बन गया। इसके साथ श्रीलंका के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई। दोनों देशों के बीच हुए व्यापार के कुल मूल्य में बढ़ोतरी का एक मुख्य कारण वाहनों का आयात रहा, जिसमें इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल भी शामिल थे।
पिछले 5 सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार में आए उतार-चढ़ाव को मुख्य रूप से बाहरी संकट के दौरान लगाए गए आयात नियंत्रणों और उसके बाद उन प्रतिबंधों में दी गई ढील ने प्रभावित किया है।
2022 और 2023 में, जब प्रतिबंधों को और कड़ा किया गया, तब चीन और भारत दोनों के साथ होने वाले व्यापार में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, चीन के साथ व्यापार में गिरावट ज्यादा तेज थी। इसकी वजह यह थी कि चीन से श्रीलंका आने वाले निर्यात में मुख्य रूप से मशीनरी, निर्माण सामग्री और अन्य गैर-जरूरी या निवेश से जुड़ी वस्तुएं शामिल थीं, और प्रतिबंधों के दौरान सबसे पहले इन्हीं वस्तुओं के आयात में कटौती की गई थी।
खबरें और भी
इसके विपरीत 2022 और 2023 में श्रीलंका और भारत के साथ होने वाला व्यापार ज्यादा मजबूत रहा। इसकी मुख्य वजह यह थी कि भारत से ईंधन, दवाएं और मध्यवर्ती वस्तुएं जैसी जरूरी और कम समय में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं का आयात जारी रहा। प्रतिबंधों के कड़े दौर में भी भारत से आने वाली इन वस्तुओं की आपूर्ति बाधित नहीं हुई, जिसके चलते भारत, श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यपारिक साझेदार बना रहा।
बढ़ गया श्रीलंका व्यापार घाटा
सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि श्रीलंका ने चीन के साथ अपने सबसे बड़े व्यापार घाटे को दर्ज किया, जो 2024 में दर्ज $4.1 बिलियन से बढ़कर 2025 में $4.9 बिलियन तक काफी बढ़ गया। 2025 में भारत के साथ भी व्यापार घाटा बढ़ा, जिसका मुख्य कारण मोटर वाहनों के आयात में वृद्धि थी। इस बीच, अमेरिका एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार बना रहा, जिसके साथ 2025 में कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग $3.5 बिलियन रहा।"