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    चीन को तगड़ा झटका! 1991 के बाद सबसे कम लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाया ड्रैगन, ईरान संघर्ष से हिल गई अर्थव्यवस्था

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 05:29 PM (IST)

    चीन ने दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें उसकी अर्थव्यवस्था उम्मीद से धीमी 4.3% बढ़ी, जो 1991 के बाद के सबसे कम वार्षिक लक्ष्य से भी क ...और पढ़ें

    चीन की Q2 GDP वृद्धि दर 4.3% रही।

    चीन की Q2 GDP वृद्धि दर 4.3% रही।

    HighLights

    1. चीन की Q2 GDP वृद्धि दर 4.3% रही।

    2. 1991 के बाद सबसे कम लक्ष्य भी हासिल नहीं।

    3. घरेलू मांग और ईरान संघर्ष का असर।

    नई दिल्ली। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन ने ताजा जीडीपी आंकड़े जारी हो गए हैं। आंकड़े चीन को झटका देने वाले हैं। क्योंकि कोविड काल के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब चीन अपना टार्गेट हासिल नहीं कर पाया है। इस समय वह चुनौतियों से संघर्ष कर रहा है। साल की दूसरी तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था की विकास दर (China GDP Growth Rate) उम्मीद से धीमी रही।

    अप्रैल की शुरुआत से जून के आखिर तक चीन की आर्थिक विकास दर (Economic growth rate) में गिरावट देखी गई।,मजबूत एक्सपोर्ट के बावजूद कमजोर घरेलू मांग और ईरान युद्ध का तेल की कीमतों का असर उस पर हावी रहा।

    डगमगा गई चीन की अर्थव्यवस्था

    सरकारी जीडीपी (GDP) आंकड़ों से पता चला कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था दूसरी तिमाही में 4.3% बढ़ी, जो बीजिंग के सालाना लक्ष्य से कम है और पहली तिमाही में हुई 5% की बढ़ोतरी के बाद आई है।

    यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही अलग आंकड़ों से पता चला था कि पिछले साल के मुकाबले जून में चीन के एक्सपोर्ट में 27% की बढ़ोतरी हुई थी।

    1991 के बाद चीनी अर्थव्यवस्था का सबसे छोटा टार्गेट

    ये आंकड़े 4.5% की बढ़ोतरी की उम्मीद से कम रहे। मार्च में, चीन ने अपने विकास के लक्ष्य को घटाकर 4.5% से 5% के दायरे में कर दिया था। CNN की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह 1991 के बाद से उसका सबसे कम आर्थिक विकास का लक्ष्य था। कुछ जानकारों का कहना है कि इस कदम से बीजिंग को पहले से मौजूद आर्थिक कमजोरी को स्वीकार करने का मौका मिला है।

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    ये आंकड़े साफ बता रहे हैं कि 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान संघर्ष का असर चीन पर भी दिखा है। कमजोर आर्थिक डेटा इस बात का संकेत है कि घरेलू स्तर पर सुस्त खपत, चीनी निर्यात में हालिया तेजी पर भारी पड़ रही है, और देश ईरान में युद्ध से पैदा हुई आर्थिक उथल-पुथल से अछूता नहीं है।

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    फाइनेंशियल फर्म नैटिक्सिस (Natixis) में एशिया पैसिफिक की चीफ इकोनॉमिस्ट एलिसिया गार्सिया-हेरेरो ने कहा, "घरेलू मांग का न होना और पूरी तरह से निर्यात पर निर्भर रहना। सच कहूं तो, यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती।"

    आयात में हुई बढ़ोतरी

    सालाना आधार पर चीन आयात 36% बढ़कर पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। उसने अपना मासिक कच्चा तेल आयात घटाकर लगभग एक दशक के निचले स्तर पर ला दिया है; यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 41.3% कम है।

    चीन का ट्रेड सरप्लस (Trade Surplus) जून में बढ़कर 125.62 अरब डॉलर हो गया। इससे दुनिया भर के व्यापारिक साझेदारों, खासकर यूरोपीय संघ के साथ तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि यूरोपीय संघ ने औद्योगिक निर्यात से अपने बाजार को पाट देने के लिए चीन की आलोचना की है।

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