भारत ने चीन के लिए खोले सरकारी टेंडर के दरवाजे, 4 चीनी कंपनियों को बोली प्रक्रिया में भाग लेने की मंजूरी
भारत ने गलवान हिंसा के बाद चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी है। अब चार चीनी कंपनियों को बिजली क्षेत्र के सरकारी टेंडर में बोली लगाने की अनुम ...और पढ़ें

भारत ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में भाग लेने की अनुमति दी।
HighLights
भारत ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में भाग लेने की अनुमति दी।
ये कंपनियां अब बिजली क्षेत्र के प्रोजेक्ट्स में बोली लगा सकेंगी।
भारत की बढ़ती बिजली मांग और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के लिए छूट।
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते सुधर रहे हैं। दोनों देशों के बीच होने वाला व्यापार फिर से फल-फूल रहा है। 2020 में हुई गलवान हिंसा के बाद दोनों देशों के रिश्ते तल्ख हो गए थे। भारत ने चीनी कंपनियों पर सरकारी टेंडर में भाग लेने से संबंधित नियम को और कड़ा कर दिया था। लेकिन अब धीरे-धीरे भारत चीनी निवेश (India China Trade) को लेकर नरमी के संकेत दे रहा है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी मालिकाना हक या उनसे जुड़ी चार कंपनियों को भारतीय सरकार की ओर से बिजली क्षेत्र में निकाले गए प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की इजाजत दी गई है।
इन चार चीनी कंपनियों के लिए भारत ने खोले सरकारी टेंडर के दरवाजे
रॉयटर्स द्वारा देखे गए भारत के वित्त मंत्रालय के 24 जून के आदेश के अनुसार, TBEA एनर्जी, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) को टेंडर में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी। यानी अब ये चीनी कंपनियों बिजली क्षेत्र में निकाले गए प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगा सकती हैं।
यह भी पढ़ें- भारत के निशाने पर फिर आया चीन, स्टील के बाद अब इन उत्पादों पर एंटी डंपिंग जांच शुरू; कई देश भी लपेटे में आए
फैसले के अनुसार, यह छूट जारी होने के बाद दो साल तक लागू रहेगी और दूसरे कारोबार इसे एक मॉडल के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
बिजली मंत्रालय ने मांगी थी छूट
रिपोर्ट के अनुसार भारत के बिजली मंत्रालय ने जनवरी में उन कंपनियों के लिए छूट मांगी थी जिनके भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं और जो जरूरी बिजली प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं।
इससे पहले जनवरी में खबर आई थी कि भारत सरकार सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए चीनी बोली लगाने वालों को और ज्यादा छूट देने पर विचार कर रही है।
दरअसल, 2020 में सीमा पर हुई झड़प के बाद से, भारत ने चीन की कंपनियों को सरकारी टेंडर में बोली लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना और राजनीतिक व सुरक्षा मंजूरी हासिल करना जरूरी कर दिया था।
यह छूट ऐसे समय में दी जा रही है जब भारत बढ़ती बिजली की मांग और रिन्यूएबल एनर्जी को जोड़ने के लिए अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार तेजी से कर रहा है।