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    Hormuz Strait Closed: वो 21 मील जो दुनिया को करते हैं कंट्रोल! शेयर बाजार, पेट्रोल-डीजल से महंगाई तक, भारत पर क्या असर?

    Updated: Sun, 01 Mar 2026 12:23 PM (IST)

    Iran Israel WaR: मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की खबर है, जिससे भारत पर गंभीर असर पड़ सकता है। शेयर बाजार, पेट्रोल ...और पढ़ें

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz blocked) बंद होने की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही (Iran closes Hormuz) रोक दी है। अब इसका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है।

    खाड़ी देशों से आने वाला बड़ा हिस्सा इसी रूट से गुजरता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है तो भारत का तेल आयात, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतें दबाव (petrol diesel price rise India) में आ सकती हैं। जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था (Hormuz impact India) और आपकी जेब पर पड़ सकता है।

    होर्मुज स्ट्रेट की इतनी अहमियत क्यों?

    होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी के मुहाने पर एक संकरा समुद्री रास्ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में यूएई व ओमान हैं। इसकी चौड़ाई सबसे संकरे हिस्से में सिर्फ 21 मील है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20-25% इसी रास्ते से गुजरता है। रोजाना 2 करोड़ बैरल से ज्यादा क्रूड और पेट्रोलियम उत्पाद यहां से ट्रांजिट होते हैं।

    ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज यानी ओपेक (OPEC) देश सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और ईरान का एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन को तेल भेजने का मुख्य रास्ता यही है।

    भारत पर कैसे पड़ेगा इसका असर?

    डेटा के मुताबिक, भारत के 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन (यानी करीब 26 लाख बैरल रोज) कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर आती है। यह भारत के कुल क्रूड आयात का लगभग 50% हिस्सा है।

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    यानी अगर यह रास्ता बंद होता है तो भारत की हर महीने आने वाली तेल सप्लाई का आधा हिस्सा खतरे में पड़ सकता है। पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूसी तेल की हिस्सेदारी थोड़ी घटाई और मिडिल ईस्ट से खरीद बढ़ाई है। इससे खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता फिर बढ़ी है और होर्मुज से जुड़े जोखिम भी।

    Hormuz

    क्या होर्मुज पूरी तरह बंद हो सकता है?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्र में जहाजों को रेडियो मैसेज के जरिए चेतावनी दी गई है कि वे होर्मुज से न गुजरें। अमेरिका ने भी अपने कमर्शियल जहाजों को सतर्क रहने को कहा है। हालांकि ईरान की ओर से औपचारिक तौर पर पूर्ण बंदी की पुष्टि नहीं हुई है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि के लिए पूरी तरह बंद होना मुश्किल है, क्योंकि इससे ईरान की अपनी तेल सप्लाई भी प्रभावित होगी। लेकिन डर और खतरे की आशंका भर से भी टैंकर रुक सकते हैं, जिससे सप्लाई चेन धीमी पड़ सकती है।

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    भारत को असली झटका कहां लगेगा?

    पहला और तात्कालिक असर कीमतों पर पड़ेगा।

    • ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ेंगी
    • फ्रेट चार्ज और वॉर-रिस्क इंश्योरेंस महंगा होगा
    • भारत का आयात बिल बढ़ेगा

    अगर क्रूड ऑयल महंगा होता है तो पेट्रोल-डीजल की लागत बढ़ेगी। इससे महंगाई ऊपर जा सकती है और शेयर बाजार में भी दबाव दिख सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तुरंत फिजिकल कमी नहीं होगी, लेकिन कीमतों में उछाल तय है।

    तो क्या रूस फिर बनेगा विकल्प?

    अगर खाड़ी से सप्लाई घटती है, तो भारत फिर रूसी तेल की ओर रुख कर सकता है। हिंद महासागर और अरब सागर में रूसी कार्गो और फ्लोटिंग स्टोरेज मौजूद है, जिससे शॉर्ट टर्म में सप्लाई लचीलापन मिल सकता है।

    क्या विविधीकरण भारत को बचाएगा?

    भारत 40 से ज्यादा देशों से तेल खरीदता है, जिनमें रूस, अमेरिका, वेस्ट अफ्रीका और लैटिन अमेरिका शामिल हैं। यह रणनीति संकट के समय मदद करती है। लेकिन अटलांटिक क्षेत्र से तेल लाने में 25-45 दिन लग सकते हैं, जबकि खाड़ी से सिर्फ 5-7 दिन में सप्लाई हो जाती है। यानी मिडिल ईस्ट लॉजिस्टिक तौर पर अब भी सबसे अहम है।

    भारत के पास क्या बैकअप है?

    भारत के पास सामरिक पेट्रोलियम भंडार यानी एसपीआर (India SPR oil reserve) मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा रिफाइनरियों और डिपो में डीजल, पेट्रोल, एटीएफ और एलपीजी का स्टॉक रहता है, जो शॉर्ट टर्म झटकों को संभाल सकता है।

    सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां आमतौर पर तुरंत खुदरा कीमतें नहीं बढ़ातीं। कीमतों में बदलाव अक्सर लगातार बढ़ोतरी के बाद ही होता है।

    अब आगे क्या?

    फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा सप्लाई बंद होना नहीं, बल्कि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और बढ़ता आयात बिल है। अगर होर्मुज स्ट्रेट पर जंग लंबी चली, तो असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा।

    महंगाई, रुपया, शेयर बाजार और आम आदमी की जेब सब प्रभावित होंगे। यानी होर्मुज की हर हलचल पर भारत की नजर इसलिए है, क्योंकि वहां की आग सीधे यहां की अर्थव्यवस्था को गर्म कर सकती है।