इस साल या 2027 में, हाथ में कब आएंगे प्लास्टिक के नोट? RBI गवर्नर ने दिया जवाब
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने बताया है कि अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत में प्लास्टिक के नोट चलन में आ सकते हैं, जो मौजूदा कागजी नोटों के साथ चलेंगे। ...और पढ़ें

HighLights
अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत में आ सकते हैं प्लास्टिक नोट।
आरबीआई गवर्नर ने दी जानकारी।
₹10 और ₹20 के नोटों से होगी पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत।
नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से भारत में प्लास्टिक के नोटों (Plastic Notes) को लेकर बड़ी चर्चा है। लेकिन, सवाल है कि देश में प्लास्टिक के नोट आएंगे कब? इसका जवाब रिजर्व बैंक के गवर्नर ने दे दिया है। RBI मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद मीडिया से बात करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "हमारा लक्ष्य है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अगले फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में पॉलिमर नोट चलन में आ जाएंगे।"
पॉलिमर नोट मौजूदा कागज़ी नोटों के साथ ही चलन में लाए जाएंगे; कागज़ी करेंसी को बदलने की कोई योजना नहीं है। भारत में पिछले कुछ सालों में करेंसी का स्वरुप लगातार बदला है। नोट के डिजाइन से लेकर सिक्योरिटी तक भारत में मुद्रा पर काफी काम हुआ है, और अब इसी कड़ी में देश के अंदर प्लास्टिक के नोट लाने की तैयारी की जा रही है।
2009 में हुआ था पहला प्रयास
यह कदम RBI की ओर से पॉलीमर नोट लाने की दूसरी कोशिश है; इससे पहले 2009 में प्रस्तावित एक पायलट प्रोजेक्ट को "तकनीकी दिक्कतों" के कारण रोक दिया गया था। अगर यह नया ट्रायल सफल रहता है, तो सेंट्रल बैंक ₹100 और ₹500 जैसे बड़े मूल्य के नोटों के लिए भी पॉलीमर नोट लाने पर विचार कर सकता है।
कागजी नोट से कैसे बेहतर प्लास्टिक करेंसी?
- पॉलिमर बैंकनोट नमी, गंदगी और फटने के प्रति ज़्यादा मज़बूत होते हैं। ऐसे में कागज़ी नोटों की तुलना में इनकी उम्र ज़्यादा होगी।
- ₹10 और ₹20 के नोट चलन में मौजूद कुल नोटों की संख्या का लगभग 25% हिस्सा हैं, जबकि कुल वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी सिर्फ़ 1.4% है।
- चलन में इनकी ज़्यादा संख्या और कम मॉनेटरी वैल्यू इन्हें इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए सही डिनॉमिनेशन बनाती है, क्योंकि अगर कोई ऑपरेशनल दिक्कत आती है, तो इससे होने वाला फाइनेंशियल असर कम रहेगा।
- इस पायलट प्रोजेक्ट से RBI को पॉलीमर नोटों की टिकाऊपन, लोगों की स्वीकार्यता, छपाई की क्षमता और नकली नोट बनाने वालों द्वारा इनके डिज़ाइन और सुरक्षा फीचर्स की नकल करने की क्षमता का आकलन करने में मदद मिलेगी।
- कम कीमत वाले नोट चुनने से कामकाज में भी आसानी होती है। ज़्यादा कीमत वाले नोटों के उलट, ₹10 और ₹20 के नोट ज़्यादातर बैंक शाखाओं से बांटे जाते हैं, न कि ATM से। इससे RBI को कैश डिस्पेंसर और कैश रीसाइक्लर में तुरंत अपग्रेड किए बिना ही इन नोटों को टेस्ट करने का मौका मिलता है।
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- मौजूदा ATM पॉलीमर नोटों की पहचान करने के लिए नहीं बने हैं, और ज़्यादा कीमत वाले नोटों के लिए बड़े पैमाने पर इनके इस्तेमाल से पहले कैलिब्रेशन और सॉफ़्टवेयर में बदलाव की ज़रूरत पड़ सकती है।