Gold Investment: ज्वैलरी खरीदकर बेचना कितना सही, ₹1.5 लाख के गहने बेचे तो 5 साल में फायदा होगा या नुकसान? पूरा कैलकुलेशन
Gold buy and sell benefits: अगर आप सोने के गहने बार-बार खरीदकर बेच देते हैं तो यह खबर आपके लिए है। क्योंकि गहने बार-बार खरीदकर बेचने से आपको तगड़ा नुक ...और पढ़ें
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सोने की ज्वैलरी में निवेश का पूरा गणित समझें, जानें कब होगा फायदा कब नुकसान
HighLights
सोने के गहनों में मेकिंग चार्ज और जीएसटी लगता है।
निवेश के लिए सोने के सिक्के या बार बेहतर विकल्प।
डिजिटल गोल्ड भी सुरक्षित निवेश का एक अच्छा माध्यम।
नई दिल्ली| Gold Investment: सोना खरीदना भारतीय परिवारों में सिर्फ शौक नहीं, बल्कि सुरक्षित निवेश की एक पुरानी परंपरा है। चाहे शादी-ब्याह हो या फिर त्योहार, सोना हमेशा से भरोसेमंद निवेश माना जाता है। लेकिन जब यही सोना गहनों के रूप में खरीदा और फिर बेचा जाता है, तो असली सवाल सामने आता है कि क्या यह फायदेमंद साबित होता है फिर घाटे का सौदा (gold buy and sell benefits) साबित होता है? क्योंकि मेकिंग चार्ज, टैक्स और बेचने के समय मिलने वाली कीमत पूरा खेल बदल सकती है। तो चलिए समझते हैं ज्वैलरी खरीदकर बेचने का पूरा कैलकुलेशन।
क्या फायदे हो सकते हैं?
सबसे पहले बात करते हैं फायदे की, कि आखिर आपको क्या-क्या फायदे हो सकते हैं?
- तेजी में मुनाफा- अगर आपने कम दाम पर सोना यानी ज्वैलरी खरीदी और कुछ ही महीनों में कीमत बढ़ गई तो बेचकर अच्छा-खासा मुनाफा कमाया जा सकता है।
- लिक्विड एसेट- जरूरत पड़ने पर सोना तुरंत कैश में बदल सकता है। इसे स्टॉक या प्रॉपर्टी की तरह बेचने के लिए कोई लंबा प्रोसेस नहीं होता।
- मार्केट का लचीलापन- सोने की कीमतें हर दिन बदलती हैं। इस उतार-चढ़ाव का फायदा ट्रेडिंग करने वाले लोग उठा सकते हैं और मुनाफा कमा सकते हैं।
क्या हो सकते हैं नुकसान?
- मेकिंग चार्ज और टैक्स- ज्वैलरी में मेकिंग चार्ज और GST लगता है। बार-बार खरीदने-बेचने पर ये खर्च आपके मुनाफे को लगातार कम कर सकते हैं।
- प्राइस रिस्क- सोना हमेशा बढ़ेगा यह जरूरी नहीं। कभी-कभी ग्लोबल मार्केट या डॉलर की मजबूती की वजह से सोने की कीमत गिर भी जाती है।
- लॉन्ग-टर्म गेन मिस करना- अगर आप शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट के चक्कर में बार-बार बेचते रहेंगे तो सोने के लंबे समय के कंपाउंड गेन का फायदा नहीं उठा पाएंगे।
फायदे-नुकसान का पूरा कैलकुलेशन
अगर आप 10 ग्राम सोना 1.50 लाख रुपए में खरीदते हैं और 10% वार्षिक रिटर्न के साथ 6 महीने बाद बेचते हैं, तो आपको 7,500 रुपए का मुनाफा होगा। वहीं, 5 साल बाद मुनाफा 75000 रुपए तक हो सकता है।
लेकिन अगर आप सोने की ज्वैलरी खरीदते हैं, तो मेकिंग चार्ज (15%) और जीएसटी (3%) को जोड़कर कुल लागत 1,18,450 रुपए हो सकती है। ज्वैलरी को 6 महीने बाद बेचने पर, मेकिंग चार्ज और जीएसटी की लागत वापस नहीं मिलती, जिससे 99,750 रुपए मिल सकते हैं, यानी 19,700 रुपए का घाटा।
- कुल सोने की ज्वैलरी- 10 ग्राम
- सोने की कीमत= ₹1,50,000
- मेकिंग चार्ज= ₹22,500 (औसत 15 प्रतिशत)
- जीएसटी (GST)= ₹5,175 (औसत 3 प्रतिशत)
- कुल कीमत= 1,50,000 + 22,500 + 5,175 = ₹1,77,675
- 6 महीने में बेचने पर फायदा या नुकसान- 20,175 रुपए का घाटा
- 5 साल बाद बेचने पर फायदा या नुकसान- 47,325 रुपए का फायदा
इसलिए एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेश के लिए सोने के सिक्के या बार बेहतर विकल्प हैं, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज नहीं लगते। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स गोल्ड में डिजिटल निवेश ज्यादा भरोसा करते हैं, क्योंकि वह ज्यादा सिक्योर होता है।
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आज क्या हैं गोल्ड के ताजा रेट?
10 अगस्त यानी सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 1,52,589 रुपए (Gold Price Today) प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। इस दौरान इसका हाई लेवल 1,52,999 रुपए और लो लेवल 1,51,461 रुपए (Silver Price Today) रहा। वहीं इंडिया बिलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन पर 24 कैरेट सोना 1,51,061 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
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