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    Gold Rate Alert: सोने के भाव आसमान पर, लेकिन मांग धड़ाम! क्या कस्टम ड्यूटी और पीएम मोदी की अपील का दिखा असर?

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 01:15 PM (IST)

    अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग 6% गिरकर 131.4 टन हो गई, जिसका मुख्य कारण ऊंची कीमतें, बढ़ी कस्टम ड्यूटी और प्रधानमंत्री मोदी की ...और पढ़ें

    गोल्ड डिमांड क्यों घटी?

    गोल्ड डिमांड क्यों घटी?

    HighLights

    1. Q2 2026 में सोने की मांग 6% घटकर 131.4 टन हुई।

    2. ऊंची कीमतों के कारण सोने पर खर्च रिकॉर्ड ₹1,98,100 करोड़ रहा।

    3. कस्टम ड्यूटी बढ़ने से सोने की तस्करी का खतरा बढ़ा।

    नई दिल्ली: भारतीयों का सोने (Gold) से प्यार जगजाहिर है, लेकिन साल 2026 की अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़े एक बेहद चौंकाने वाली कहानी बयां कर रहे हैं। सोने की आसमान छूती कीमतों (Gold Price), बढ़ाई गई कस्टम ड्यूटी (Custom Duty) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की एक खास अपील का ऐसा असर हुआ है कि देश में सोने की कुल मांग (Gold Demand Decrease) 6 % गिरकर 131.4 टन पर आ गई है।

    विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) की ‘Q2 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट ने भारतीय सर्राफा बाजार की एक नई तस्वीर पेश की है।

    मांग घटी, लेकिन खर्च में बन गया रिकॉर्ड!

    WGC की रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि भले ही लोगों ने सोना कम खरीदा (Gold Buying) हो, लेकिन उनकी जेब से पैसा रिकॉर्ड स्तर पर खर्च हुआ है। अप्रैल-जून 2026 में सोने की कुल मांग (Gold Demand) 131.4 टन रही, जो पिछले साल (2025) की इसी तिमाही में 139.7 टन थी। मांग घटने के बावजूद, सोने की खपत का मूल्य ₹1,98,100 करोड़ रहा (जो 2025 में ₹1,32,500 करोड़ था)। इसका सीधा मतलब है कि सोने के दाम इतने ऊंचे हैं कि कम सोना खरीदने के लिए भी लोगों को 50% ज्यादा पैसे चुकाने पड़े।

    PM मोदी की अपील का दिखा बड़ा असर

    आखिर मांग क्यों घटी? WGC के भारत क्षेत्र के CEO सचिन जैन के मुताबिक, इसके तीन मुख्य कारण हैं मौसमी सुस्ती, कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री की अपील। गौरतलब है कि इस साल मई में पीएम मोदी ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों (Crude Oil Prices) के बीच विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) बचाने के लिए देशवासियों से 'गैर-जरूरी सोने की खरीद कम करने' और बचत के दूसरे विकल्पों में निवेश करने का आग्रह किया था। आंकड़ों से साफ है कि जनता ने इस अपील को गंभीरता से लिया है।

    ज्वैलरी का क्रेज घटा, लेकिन 'निवेश' में आई तेजी

    इस तिमाही में आभूषणों की मांग 15% घटकर 75.1 टन रह गई (पिछले साल यह 88.8 टन थी)। ज्वैलरी की मांग भले ही घटी हो, लेकिन सोने के बिस्कुट और सिक्कों में निवेश 9% बढ़कर 50.3 टन हो गया। वहीं, भारत के गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में भी 4.2 टन का शुद्ध निवेश आया।

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    सबसे बड़ा खतरा

    सचिन जैन ने कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद एक बड़ी चिंता भी जाहिर की है। ड्यूटी ज्यादा होने के कारण 'ग्रे मार्केट' (Grey Market) में अवैध रूप से सोने की तस्करी बढ़ रही है। जैन ने साफ चेतावनी दी है कि तस्करी और अवैध सोने का बाजार में पहुंचना इस इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा जोखिम है, जिसके संकेत अब साफ मिलने लगे हैं।

    बाजार की नजर अब आगे की तिमाहियों पर

    अप्रैल-जून 2026 में भारत का कुल सोना आयात 23% गिरकर 98.1 टन रह गया है। पूरे साल (2026) के लिए सोने की मांग 650 से 750 टन के बीच रहने का अनुमान है। अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होते हैं, सोने की कीमतों में गिरावट आती है या सरकार कस्टम ड्यूटी में राहत देती है, तो मांग फिर से जोर पकड़ सकती है।

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