टमाटर-प्याज की खेती करने वाले किसानों को इस सरकार का बड़ा तोहफा, नुकसान से बचाने के लिए बना ₹4.26 करोड़ का कोष
टमाटर और प्याज उत्पादक किसानों को मूल्य उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए ₹4.26 करोड़ का विशेष कोष बनाया है। ...और पढ़ें

टमाटर प्याज उगाने वाले किसानों को खुशखबरी
HighLights
तमिलनाडु सरकार ने किसानों के लिए ₹4.26 करोड़ का कोष बनाया।
टमाटर और प्याज उत्पादकों को मूल्य उतार-चढ़ाव से मिलेगी सुरक्षा।
मार्केट इंटरवेंशन स्कीम-प्राइस स्टेबलाइजेशन रिवॉल्विंग फंड लागू।
नई दिल्ली| नकदी फसलों की खेती करने वाले किसानों की कमाई मौसम, बाजार मांग और सप्लाई पर निर्भर रहती है। अन्य फसलों के मुकाबले सब्जियों की खेती को मुनाफे वाली खेती माना जाता है, लेकिन इसमें रिस्क भी बना रहता है। सब्जियों की खेती की बात करें तो TOP (टमाटर, प्याज और आलू) के किसान अक्सर परेशान रहते हैं, क्योंकि इन सब्जियों के मौसम के उतार-चढ़ाव का प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिलता है।
आमतौर पर टमाटर और प्याज उगाने वाले किसान अक्सर चर्चा में रहते हैं। टमाटर और प्याज की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए तमिलनाडु की नई-नवेली विजय सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
किसानों के लिए ₹4.26 करोड़ का प्रावधान
राज्य के कृषि बजट 2026-27 में टमाटर और प्याज उत्पादक किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए खास प्लान बनाया गया है। उत्पादकों के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) और मूल्य स्थिरीकरण व्यवस्था लागू करने की घोषणा की गई है। इसके लिए सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम-प्राइस स्टेबलाइजेशन रिवॉल्विंग फंड (MIS-PSRF) के तहत ₹4.26 करोड़ का विशेष कोष बनाने का प्रस्ताव रखा है। आइए समझ लेते हैं कि इस स्कीम का लाभ किन किसानों को मिलेगा?
टमाटर-प्याज किसानों को मिलेगी मदद
सरकार का उद्देश्य किसानों को उन परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा देना है, जब बाजार में टमाटर और प्याज के दाम अचानक गिर जाते हैं और किसानों को उत्पादन लागत भी नहीं मिल पाती। तमिलमाडु सरकार की ओर से प्रस्तावित इस फंड के जरिए बाजार में हस्तक्षेप कर कीमतों को स्थिर रखने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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टमाटर और प्याज ऐसी फसलें हैं जिनकी कीमतों में अक्सर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। अधिक उत्पादन होने पर किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है, जबकि कमी होने पर उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ता है। राज्य सरकार का मानना है कि मूल्य स्थिरीकरण कोष से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा मिलेगा। तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर खेती-किसानी की जाती है, राज्य में किसानों को मदद देने के उद्देश्य से विजय सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।