FD vs PPF, SSY: ब्याज दर, टैक्स छूट और लॉक-इन पीरियड; जानिए एफडी या सरकारी स्कीम्स, दोनों में से किस में होता ज्यादा फायदा?
यह लेख बैंक एफडी और सरकारी योजनाओं जैसे पीपीएफ, एनएससी, सुकन्या समृद्धि योजना के बीच ब्याज दर, लॉक-इन पीरियड और टैक्स लाभों के आधार पर तुलना करता है। ...और पढ़ें

FD vs PPF, NSC, SSY ब्याज दर, टैक्स छूट और लॉक-इन पीरियड; जानिए एफडी या सरकारी स्कीम्स, दोनों में से किस में होता ज्यादा फायदा (AI Generat Image)
HighLights
सरकारी योजनाओं में एफडी से बेहतर ब्याज दरें मिलती हैं।
पीपीएफ, एनएससी में टैक्स छूट और लंबा लॉक-इन पीरियड।
विशेषज्ञों की सलाह: लंबी अवधि के लिए दोनों का मिश्रण करें।
नई दिल्ली। अगर आप अपने पैसे को बिल्कुल सुरक्षित रखना चाहते हैं और शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव से दूर रहना पसंद करते हैं, तो आपके के लिए कुछ ऐसे तरीके भी हैं जो आपकी कमाई करवा सकते हैं। बैंक एफडी और कई सारी सरकारी स्कीम आपको एक बेहतर और सुरक्षित निवेश का मौका देती हैं।
लेकिन जब निवेश की बात आती है तो हर बार यही सोचा जाता है कि एफडी में निवेश करें या फिर सरकारी स्कीम्स में। पैसे लगाने के लिए ये दोनों ही ऑप्शन एवरग्रीन हैं, दोनों ही ऑप्शन सुरक्षित हैं, बस अंतर इनकी ब्याज दरों में है। ऐसे में आइए समझते हैं कि एफडी या फिर सरकारी स्कीम्स, कहां निवेश करने से आपकी ज्यादा कमाई होगी।
कौन दे रहा ज्यादा मुनाफा?
सबसे पहली नजर मुनाफे पर जाती है। फिलहाल सरकार ने इस तिमाही के लिए अपनी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन फिर भी ये बैंकों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं।
- सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): सबसे ज्यादा 8.2% ब्याज।
- नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC): 7.7% ब्याज।
- किसान विकास पत्र (KVP): 7.5% ब्याज।
- मंथली इनकम स्कीम (MIS): 7.4% ब्याज।
- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): 7.1% ब्याज।
- पोस्ट ऑफिस सेविंग्स डिपॉजिट: 4% ब्याज।
इनके अलावा एफडी की बात करें तो अलग-अलग बैंक में एफडी करवाने पर अलग-अलग ब्याज दर रहती है। स्माल फाइनेंस बैंक जहां 8% से ज्यादा की ब्याज दर तो देते हैं पर इसमें काफी रिस्क रहता है, वहीं पब्लिक और प्राइवेट बैंक की ब्याज दर लगभग 6-7% ही होती है। कुछ बैंकों की बात करें तो-
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- SBI, HDFC और ICICI बैंक: करीब 6.25% ब्याज।
- कोटक महिंद्रा बैंक: लगभग 6.50% ब्याज।
- यस बैंक (Yes Bank): करीब 6.66% ब्याज।
बैंक की ये ब्याज दर समय के हिसाब से बदलती रहती है। कुछ लोग एक साल के लिए एफडी करवाते हैं तो कुछ लोग 3 साल, 5 साल और 10 साल के लिए भी एफडी करवाते हैं।
किसका लॉक-इन पीरियड ज्यादा?
सरकारी स्कीम्स: यहां ज्यादा ब्याज तो मिलता है, लेकिन पैसा लंबे समय के लिए लॉक हो जाता है। उदाहरण के लिए, PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड है और NSC में 5 साल का। यानी ये लंबे समय के लक्ष्यों के लिए सही है। इन स्कीम्स में पैसा डालने के बाद बीच में निकाल तो सकते हैं लेकिन फिर उतना ब्याज नहीं है जितना स्कीम के मैच्योर होने पर मिलता है।
बैंक एफडी: एफडी में आपको समय की पूरी आजादी मिलती है। आप 7 दिन से लेकर 10 साल तक की एफडी चुन सकते हैं। अगर आपको शॉर्ट टर्म या मीडियम टर्म के लिए पैसा पार्क करना है, तो एफडी ज्यादा बेहतर है।
कितना कर सकते हैं निवेश?
सरकारी स्कीम्स में मिनिमम निवेश की राशि काफी कम है। जैसे पीपीएफ में आप सालभर में कम से कम ₹500 तक का निवेश कर सकते हैं लेकिन सालभर में ₹1.5 लाख से ज्यादा का निवेश नहीं कर सकते हैं। ठीक ऐसे ही एफडी में भी निवेश राशि का प्रावधान अलग-अलग बैंकों पर निर्भर करता है, कहीं आप ₹10,000 का निवेश कर सकते हैं तो कहीं आप ₹5 लाख का निवेश भी कर सकते हैं।
कहां ज्यादा लगता है टैक्स?
सरकारी स्कीम्स: PPF से होने वाले फायदे पर टैक्स नहीं लगता है और NSC जैसी स्कीम्स में निवेश करने पर आपको इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। इसके अलावा पोस्ट ऑफिस के ब्याज पर सेक्शन 80TTA के तहत ₹10,000 तक की राहत भी मिलती है।
बैंक एफडी: नॉर्मल बैंक एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है। आपकी जो भी इनकम टैक्स स्लैब (Tax Slab) होगी, उसके हिसाब से इस ब्याज पर टैक्स कटेगा।
कैलकुलेशन के जरिए समझें
उदाहरण 1- मान लीजिए आपने एफडी में 3 साल के लिए ₹1 लाख का निवेश किया 6.5% की ब्याज दर पर। तो 3 साल बाद आपका निवेश ₹1 लाख होगा और आपको ब्याज के हिसाब के ₹23,144 का फायदा होगा। यानी कि 3 साल बाद जब आप पैसा निकालेंगे तो आपके ₹1 लाख, ₹1,23,144 बन गए होंगे, जिसकी निकासी पर आपको एक निश्चित टैक्स भी देना पड़ेगा।
उदाहरण 2- अगर आप 15 साल के लिए पीपीएफ में निवेश करते हैं और हर साल आप ₹10,000 पीपीएफ अकाउंट में डालते हैं, तो 7.1% की ब्याज दर के हिसाब से आपको ₹1,21,214 का फायदा मिलेगा और 15 सालों में आपने जो ₹1,50,000 निवेश किए हैं, वो ₹2,71,214 बन जाएंगे। और क्योंकि पीपीएफ को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है तो आपको हुए मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी एक विकल्प के पीछे भागने के बजाय "दोनों का मिक्स" इस्तेमाल करें। अगर आपका कोई लंबा गोल है (जैसे बच्चों की पढ़ाई, शादी या रिटायरमेंट) और आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो सरकारी स्कीम्स (PPF, SSY) में पैसा लगाएं। अगर आपको लगता है कि बीच में कभी भी पैसों की अचानक जरूरत पड़ सकती है, तो कुछ पैसा बैंक एफडी में रखें ताकि जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत निकाला जा सके।