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    सैलरी अकाउंट में EMI कटने की ये तारीख सेट की है तो हो जाएं सतर्क, पेनल्टी के साथ बिगड़ सकता है CIBIL स्कोर

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 10:15 PM (IST)

    सैलरी क्रेडिट और ऑटो-डेबिट की तारीखों में बेमेल होने से EMI भुगतान में देरी, पेनल्टी और CIBIL स्कोर पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे बचने के लिए 4-स्टेप ...और पढ़ें

    सैलरी मैनेजमेंट के इन तरीकों से बचाएं अपना CIBIL स्कोर और वित्तीय नुकसान

    सैलरी मैनेजमेंट के इन तरीकों से बचाएं अपना CIBIL स्कोर और वित्तीय नुकसान

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। क्या सैलरी आते ही आप राहत की सांस लेते हैं? अगर आपकी सैलरी महीने के आखिरी दिन आती है, लेकिन आपने लोन की EMI या दूसरे ज़रूरी बिलों के लिए महीने की 1 तारीख को ऑटो-डेबिट सेट कर रखा है, तो तारीखों के बीच का यह छोटा सा अंतर आपको भारी पड़ सकता है।

    यदि वीकेंड या बैंक की छुट्टी के कारण पैसे क्लियर होने में देरी होती है, तो अकाउंट में काफ़ी बैलेंस होने के बावजूद पेमेंट फ़ेल हो सकता है। इसके नतीजों में फ़ाइनेंशियल पेनल्टी से लेकर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर बुरा असर पड़ना शामिल हो सकता है। आसान शब्दों में कहें तो, जिस तारीख को आपको इनकम मिलती है और जिस तारीख को आप पेमेंट करते हैं, उनके बीच तालमेल न होने से कैश-फ़्लो की बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।

    महीने के आखिर में सैलरी मिलना रिस्की क्यों है?

    अगर आपकी सैलरी शुक्रवार को क्रेडिट होती है और उसके बाद लंबा वीकेंड (छुट्टियां) आता है, तो NEFT या RTGS ट्रांसफर आपके बैलेंस में तो दिखेगा, लेकिन सोमवार तक पैसे निकालने के लिए क्लियर नहीं होगा। ऐसे में, अगर आपने महीने की 1 तारीख के लिए ऑटो-डेबिट सेट किया है, तो क्लियरिंग में देरी की वजह से भारी पेनल्टी लग सकती है और आपके क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ सकता है।

    सैलरी मैनेजमेंट का 4-स्टेप फॉर्मूला

    स्टेप 1- 72 घंटे (महीने की 1-2 तारीख) तक इंतजार करें। इस दौरान कोई लेन-देन न करें और बैंकिंग सिस्टम में पैसे को पूरी तरह क्लियर होने दें।

    स्टेप 2- 3 तारीख को 'वेल्थ एक्सट्रैक्शन' (पैसे को निवेश में बदलना) करें, इसके लिए अपनी सैलरी का कुछ हिस्सा (जैसे 20%) तुरंत निवेश या SIP में ट्रांसफर करें।

    स्टेप 3- 5 से 7 तारीख के बीच, अपने खर्चों (जैसे किराया, होम लोन की EMI और बिजली जैसे यूटिलिटी बिल) के पेमेंट को ऑटोमेट करें।

    स्टेप 4- 8 तारीख तक 'अलाउंस' ट्रांसफर करें यानी बचे हुए पैसे का आधा हिस्सा रोज़मर्रा के खर्चों के लिए अलग रख लें (UPI अकाउंट में)।

    बजट ड्रिफ्ट और 22 तारीख का खतरा

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, महीने की 22 तारीख 'डेंजर ज़ोन' (खतरे का समय) होती है। इस समय तक सैलरी मिलने का शुरुआती उत्साह खत्म हो चुका होता है और अगले महीने का इंतज़ार बहुत लंबा लगने लगता है। अगर 22 तारीख तक आपका UPI अकाउंट खाली हो जाता है, तो इसे 'बजट ड्रिफ्ट' कहा जाता है। इससे बचने के लिए, रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि आप अपने इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल न करें; इसके बजाय, गैर-ज़रूरी खर्चों को पूरी तरह से रोक दें।

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    काम की बात वाली चार चेकलिस्ट

    1. बफर बनाएं

    अपने सैलरी अकाउंट में हमेशा अपने महीने के खर्चों का 50% हिस्सा एक्स्ट्रा (बफ़र के तौर पर) रखें।

    2. ऑटो-स्वीप

    अपने बैंक अकाउंट पर ऑटो-स्वीप सुविधा चालू करें ताकि बेकार पड़े पैसे पर भी फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) जैसा ब्याज मिल सके।

    3. कूलिंग-ऑफ पीरियड

    ऑनलाइन सेल के लालच में आने से बचने के लिए, शॉपिंग कार्ट में सामान डालने के बाद खरीदारी पूरी करने से पहले 48 घंटे इंतज़ार करें।

    4. तारीख बदलें

    अपनी बिलिंग की तारीख को महीने की 10 तारीख के हिसाब से सेट करने के लिए अपने क्रेडिट कार्ड प्रोवाइडर से संपर्क करें।

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