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42 साल बाद 1984 दंगा पीड़ित को मिलेगी सरकारी नौकरी, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर खुला रास्ता

Updated: Sat, 09 May 2026 08:00 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक पीड़ित पंकज बख्शी को 42 साल बाद सरकारी नौकरी मिलेगी।

यह नियुक्ति केंद्र सरकार की 2006 की उस योजना के तहत की जा रही है, जिसमें दंगा पीड़ितों को रोजगार देने का प्रविधान है।

यह नियुक्ति केंद्र सरकार की 2006 की उस योजना के तहत की जा रही है, जिसमें दंगा पीड़ितों को रोजगार देने का प्रविधान है।

HighLights

  1. 1984 दंगा पीड़ित को 42 साल बाद सरकारी नौकरी।

  2. दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से मिला रोजगार का अवसर।

  3. दिल्ली सरकार ने पंकज बख्शी के नाम की सिफारिश की।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वर्ष 1984 सिख विरोधी दंगों में अपने माता-पिता को खोने वाले एक पीड़ित को 42 साल बाद सरकारी नौकरी मिलने का रास्ता साफ हुआ है। दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली सरकार ने 53 वर्षीय पीड़ित पंकज बख्शी के नाम की सिफारिश नौकरी के लिए कर दी है। यह नियुक्ति केंद्र सरकार की 2006 की उस योजना के तहत की जा रही है, जिसमें दंगा पीड़ितों को रोजगार देने का प्रविधान है।

छह सप्ताह के भीतर कार्रवाई के आदेश

न्यायमूर्ति पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जिला मजिस्ट्रेट, सेंट्रल नार्थ कार्यालय ने 24 अप्रैल 2026 को दो दंगा पीड़ितों के मामलों की सिफारिश रोजगार के लिए की है, जिनमें एक मामला पंकज बख्शी का है। अदालत ने निर्देश दिया कि इस सिफारिश पर छह सप्ताह के भीतर कार्रवाई की जाए और याचिकाकर्ता को इसकी सूचना दी जाए।

योजना के लाभ से रह गया वंचित

पंकज बख्शी ने वर्ष 2021 में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली सरकार को रोजगार देने का निर्देश जारी करने की मांग की थी। उनके अधिवक्ता गगन गांधी ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 16 जनवरी 2006 को दंगा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए रोजगार संबंधी योजना जारी की थी, लेकिन अब तक इसका लाभ याचिकाकर्ता को नहीं मिला। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि वर्ष 2006 से अब तक की अवधि के लिए आय के नुकसान का मुआवजा भी दिया जाए, जो उस वेतन के आधार पर हो, जिसके वह हकदार होते।

तय समय में कार्रवाई के निर्देश

अदालत को बताया गया कि पंकज बख्शी के पिता की एक नवंबर 1984 को मंगोलपुरी स्थित घर में दंगों के दौरान हत्या कर दी गई थी। वहीं उनकी मां जसपाल कौर का 20 जुलाई 1986 को दंगों के कारण हुई लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिला मजिस्ट्रेट द्वारा भेजी गई सिफारिश पर तय समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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